{"_id":"598cbbb14f1c1bc5508b45bf","slug":"101502395313-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कजरी की धुन पर झूमे गीत रसिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कजरी की धुन पर झूमे गीत रसिक
Updated Fri, 11 Aug 2017 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
मुगलसराय। आर्य समाज, सुर सरिता और चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में नगर में पहली बार कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया। नगर के आर्य समाज मंदिर में आयोजित महोत्सव में गायक कलाकारों ने कजरी गायन से गीत रसिकों को श्रावणी फुहार एहसास कराया। राधा कृष्ण की प्रेमलीला, पति पत्नी की नोक झोंक और ननद भौजाई की तुनकमिजाजी को गीतों में पिरोकर पेश किया। पिया मेहंदी लिया द मोती झील से गीत को सुन श्रोताओं ने भद्रपद में सावन का अहसास किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रजीत शर्मा ने कहा कि आज कजरी उत्सव मनाने का दिन है। कहा कि कजरी सावन व भाद्रपद के महीने में ही खास कर के गाया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि कजरी का प्रचलन मां विंध्यवासिनी के दरबार से शुरू हुआ है क्योंकि उन्हें मां कज्जला के नाम से भी जाना जाता है। इस पारंपरिक लोकधुन को बचाने व जीवंत रखने के उद्देश्य से कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया है। गीतों की शुरुआत गायक अशोक सिद्धार्थ ने पिया मेंहदी लिया दा मोती झील से जाइके साइकिल से ना से किया। उसके गायक आते गए और रसभरी कजरी से लोगों को विभोर करते रहे। संतोष पाठक, सुनील दुबे,वाचस्पति साहू,संतोषी आर्य, सविता आर्य ने देर अपने भाव पूर्ण गीतों से श्रोताओें को सराबोर कि या।
ढोलक पर रोहित केशरी, हारमोनियम सुशील दुबेे संगत किया। इस मौके पर विनय वर्मा, रामधनी सिंह चौहान, संजय शर्मा, संजय श्रीवास्तव, आरडी शर्मा, नंदलाल मेहता, उमेश सिंह, भीम मोदी, राहुल जायसवाल, सौरभ केसरी, संतोष खरवार, डॉ. राजकुमार गुप्ता, सुरेंद्र सिंह, शीला तिवारी, दमयंती चौबे, सतीश जिंदल, रसमेत तमाम लोग उपस्थित रहे। संचालन आशाराम यादव ने और धन्यवाद ज्ञापन अरुण आर्य ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रजीत शर्मा ने कहा कि आज कजरी उत्सव मनाने का दिन है। कहा कि कजरी सावन व भाद्रपद के महीने में ही खास कर के गाया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि कजरी का प्रचलन मां विंध्यवासिनी के दरबार से शुरू हुआ है क्योंकि उन्हें मां कज्जला के नाम से भी जाना जाता है। इस पारंपरिक लोकधुन को बचाने व जीवंत रखने के उद्देश्य से कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया है। गीतों की शुरुआत गायक अशोक सिद्धार्थ ने पिया मेंहदी लिया दा मोती झील से जाइके साइकिल से ना से किया। उसके गायक आते गए और रसभरी कजरी से लोगों को विभोर करते रहे। संतोष पाठक, सुनील दुबे,वाचस्पति साहू,संतोषी आर्य, सविता आर्य ने देर अपने भाव पूर्ण गीतों से श्रोताओें को सराबोर कि या।
विज्ञापन
ढोलक पर रोहित केशरी, हारमोनियम सुशील दुबेे संगत किया। इस मौके पर विनय वर्मा, रामधनी सिंह चौहान, संजय शर्मा, संजय श्रीवास्तव, आरडी शर्मा, नंदलाल मेहता, उमेश सिंह, भीम मोदी, राहुल जायसवाल, सौरभ केसरी, संतोष खरवार, डॉ. राजकुमार गुप्ता, सुरेंद्र सिंह, शीला तिवारी, दमयंती चौबे, सतीश जिंदल, रसमेत तमाम लोग उपस्थित रहे। संचालन आशाराम यादव ने और धन्यवाद ज्ञापन अरुण आर्य ने किया।
विज्ञापन