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Bulandshahar News: नवजातों की देखभाल के लिए जिले में बनेंगे तीन और एसएनसीयू
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नवजातों की देखभाल के लिए जिले में बनेंगे तीन और एसएनसीयू
बुलंदशहर। नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जिले में जल्द ही लखावटी, अनूपशहर और शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एसएनसीयू वार्ड बनेंगे। अब तक जिले में पांच एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहे हैं। तीन और बनने के बाद इनकी संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी।
नवजात शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए पूर्व में सिर्फ जिला महिला अस्पताल में न्यू सिक बार्न यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड का संचालन होता था। यहां नवजात शिशुओं को भर्ती कर 24 घंटे तक बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य स्टॉफ द्वारा निगरानी की जाती थी लेकिन, जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में बेड की संख्या सीमित होने के कारण अन्य नवजातों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता था। शिशु मृत्यु दर न रुकने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन से जिले के अन्य सरकारी चिकित्सालयों पर एसएनसीयू वार्ड बनवाने की मांग की। इसके बाद संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, स्याना, पहासू और डिबाई में एसएनसीयू वार्ड बनाकर इनका संचालन शुरू करवा दिया गया। वहीं, अब विभाग द्वारा तीन और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एसएनसीयू वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सीएचसी का भी चयन कर लिया गया है।
एसएनसीयू वार्ड बनने से शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी
न्यू सिक बार्न यूनिट न होने के करण देहात क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसका कारण जिले के मात्र पांच सरकारी चिकित्सालयों के एसएनसीयू वार्ड में बेड की संख्या कम होना माना जाता है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोग रेफर होने पर असमर्थ हो जाते थे। इसके कारण कई बार शिशु की मौत हो जाती है। अब तीन और स्थानों पर इसके स्थापित हो जाने से काफी हद तक इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
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जिले में अब तक जिला महिला अस्पताल समेत पांच सरकारी चिकित्सालयों में एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहे हैं। जल्द ही लखावटी, अनूपशहर और शिकारपुर स्थित सीएचसी पर एसएनसीयू वार्ड खोला जाएगा। जिससे शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जिले में जल्द ही लखावटी, अनूपशहर और शिकारपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एसएनसीयू वार्ड बनेंगे। अब तक जिले में पांच एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहे हैं। तीन और बनने के बाद इनकी संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी।
नवजात शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए पूर्व में सिर्फ जिला महिला अस्पताल में न्यू सिक बार्न यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड का संचालन होता था। यहां नवजात शिशुओं को भर्ती कर 24 घंटे तक बाल रोग विशेषज्ञ समेत अन्य स्टॉफ द्वारा निगरानी की जाती थी लेकिन, जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में बेड की संख्या सीमित होने के कारण अन्य नवजातों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ता था। शिशु मृत्यु दर न रुकने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन से जिले के अन्य सरकारी चिकित्सालयों पर एसएनसीयू वार्ड बनवाने की मांग की। इसके बाद संयुक्त चिकित्सालय सिकंदराबाद, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, स्याना, पहासू और डिबाई में एसएनसीयू वार्ड बनाकर इनका संचालन शुरू करवा दिया गया। वहीं, अब विभाग द्वारा तीन और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एसएनसीयू वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सीएचसी का भी चयन कर लिया गया है।
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एसएनसीयू वार्ड बनने से शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी
न्यू सिक बार्न यूनिट न होने के करण देहात क्षेत्र के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसका कारण जिले के मात्र पांच सरकारी चिकित्सालयों के एसएनसीयू वार्ड में बेड की संख्या कम होना माना जाता है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोग रेफर होने पर असमर्थ हो जाते थे। इसके कारण कई बार शिशु की मौत हो जाती है। अब तीन और स्थानों पर इसके स्थापित हो जाने से काफी हद तक इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
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जिले में अब तक जिला महिला अस्पताल समेत पांच सरकारी चिकित्सालयों में एसएनसीयू वार्ड संचालित हो रहे हैं। जल्द ही लखावटी, अनूपशहर और शिकारपुर स्थित सीएचसी पर एसएनसीयू वार्ड खोला जाएगा। जिससे शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ