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आज से नौ दिन तक होगी शक्ति की आराधना
सार
आज से नौ दिन तक होगी शक्ति की आराधनाबुलंदशहर।इससे पूर्व रविवार को नगर से लेकर देहात तक के सभी मंदिरों में सजावट आदि की गई।नवरात्र के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है।
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विस्तार
आज से नौ दिन तक होगी शक्ति की आराधना
बुलंदशहर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। इससे पूर्व रविवार को नगर से लेकर देहात तक के सभी मंदिरों में सजावट आदि की गई। श्रद्धालुओं ने पूजा और फलाहार आदि सामानों की खरीदारी। दिल्ली से मां कालका के मंदिर से जोत लेकर भक्त लौट आए हैं। सोमवार सुबह मंदिरों और घरों में कलश स्थापित कर मां भगवती की आराधना की जाएगी।
पंडित नरेश कुमार शर्मा और पंडित राज शर्मा ने बताया कि ने बताया कि इस बार माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। नवरात्र में भगवती की उपासना से सभी प्रकर के कष्ट दूर होते हैं। इस बार नवरात्र का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है। यह शुभ संयोग देने वाला माना जाता है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है।
माता रानी की आराधना की विधि
नवरात्र के पहले दिन सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर शुभ मुहूर्त में माता रानी की चौकी स्थापित करें। इसके बाद आसन लगाकर माता रानी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर रखें। उसके बाद वस्त्र, चुनरी, फूल माला से मां का शृंगार करें। इसके बाद चौकी के सामने कलश स्थापित कर उसमें जौ बोएं। फल और मिठाई से माता रानी को भोग लगाकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।
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कलश स्थापना का मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:36 से 5:23 तक
शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 से 7:51 तक
अभिजीत मुहूर्त 11:00 बजकर 48 मिनट से 12:36 तक रहेगा
मां कालका से जोत लेकर लौटे भक्त
शारदीय नवरात्र के एक दिन पहले रविवार को जिले की सड़कों पर मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। रविवार को पूरे दिन दिल्ली कालका जी से मां की जोत लेकर श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते और डीजे पर झूमते हुए गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। सोमवार को प्रथम शारदीय नवरात्र के दौरान लाई गई मां की जोत को मंदिरों व घरों में स्थापित किया जाएगा। माता की जोत लाने वालों में बच्चे, युवा और महिला-पुरुष शामिल रहे। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सेवादार भी जगह-जगह शिविर लगाकर प्रसाद ग्रहण कराने में जुटे रहे।
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बुलंदशहर। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ सोमवार से हो रहा है। इससे पूर्व रविवार को नगर से लेकर देहात तक के सभी मंदिरों में सजावट आदि की गई। श्रद्धालुओं ने पूजा और फलाहार आदि सामानों की खरीदारी। दिल्ली से मां कालका के मंदिर से जोत लेकर भक्त लौट आए हैं। सोमवार सुबह मंदिरों और घरों में कलश स्थापित कर मां भगवती की आराधना की जाएगी।
पंडित नरेश कुमार शर्मा और पंडित राज शर्मा ने बताया कि ने बताया कि इस बार माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। नवरात्र में भगवती की उपासना से सभी प्रकर के कष्ट दूर होते हैं। इस बार नवरात्र का प्रारंभ सोमवार से हो रहा है। यह शुभ संयोग देने वाला माना जाता है। पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घर में कलश की स्थापना की जाती है।
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माता रानी की आराधना की विधि
नवरात्र के पहले दिन सोमवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर शुभ मुहूर्त में माता रानी की चौकी स्थापित करें। इसके बाद आसन लगाकर माता रानी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर रखें। उसके बाद वस्त्र, चुनरी, फूल माला से मां का शृंगार करें। इसके बाद चौकी के सामने कलश स्थापित कर उसमें जौ बोएं। फल और मिठाई से माता रानी को भोग लगाकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।
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कलश स्थापना का मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:36 से 5:23 तक
शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 से 7:51 तक
अभिजीत मुहूर्त 11:00 बजकर 48 मिनट से 12:36 तक रहेगा
मां कालका से जोत लेकर लौटे भक्त
शारदीय नवरात्र के एक दिन पहले रविवार को जिले की सड़कों पर मां भगवती के जयकारे गूंजते रहे। रविवार को पूरे दिन दिल्ली कालका जी से मां की जोत लेकर श्रद्धालुओं के लौटने का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालु रंग-गुलाल उड़ाते और डीजे पर झूमते हुए गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। सोमवार को प्रथम शारदीय नवरात्र के दौरान लाई गई मां की जोत को मंदिरों व घरों में स्थापित किया जाएगा। माता की जोत लाने वालों में बच्चे, युवा और महिला-पुरुष शामिल रहे। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए सेवादार भी जगह-जगह शिविर लगाकर प्रसाद ग्रहण कराने में जुटे रहे।