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कागजों में 15 की जगह 13 कर दी मीट फैिक्ट्रयां

Sat, 25 Mar 2017 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Sat, 25 Mar 2017 01:05 AM IST
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Meat Factories 13 in Paper instead of 13
बूचड़खानों - फोटो : अमर उजाला

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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अफसरों ने मीट फैक्ट्रियों की गणना में भी खेल कर दिया है। 15 मार्च-2015 की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में एक्टिव एवं नॉन एक्टिव मीट प्लांट्स की संख्या 15 बताई गई थी।

नए निजाम में जो रिपोर्ट भेजी गई है उसमें बंद और चालू फैक्ट्रियों की संख्या 13 हो गई। डीएम ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अफसरों को नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी।
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हाल ही में जो रिपोर्ट डीएम के पास भेजी गई है उसमें छह बूचड़खाने नगर पालिकाओं के हैं। चार मीट प्लांट निर्माणाधीन और तीन मीट प्लांट चालू हालत में हैं। 15 मार्च 2015 को जो रिपोर्ट भेजी गई थी। सवाल यह है कि जब एक साल पहले मीट प्लांट और बूचड़खानों की संख्या 15 थी तो अब संख्या कैसे कम हो गई।
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सूत्रों का कहना है कि मीट व्यापार से जिन जिन अफसरों को सीधा कनेक्शन हैं उनकी जड़े भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई हैं। खासतौर पर पशुपालन विभाग, नगर पालिका खुर्जा, तहसील प्रशासन खुर्जा और पॉल्यूशन विभाग को   मीट व्यवसाय से सीधे कनेक्शन होता है।

स्लाटर हाउस की वास्तविक स्थिति 13 है। पिछली बार हो सकता है गलती से रिपोर्ट चली गई हो। जिले में चार स्लाटर हाउस निर्माणाधीन है। तीन स्लाटर हाउस चालू हालत में है। छह बूचड़खाने नगर पालिकाओं के हैं। नोटिस की जानकारी नहीं है। जानकारी मिलने पर जवाब दे दिया जाएगा।-जीएस श्रीवास्तव,क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

एक दशक से नहीं लिया गया मीट का सैंपल
गुणवत्ता परखने के लिए मीट का नमूना कौन सा विभाग लेगा, इसकी जानकारी अफसरों को नहीं है। नगर पालिका ने जिम्मेदारी फूड सेफ्टी विभाग के अफसरों की बताई है। फूड सेफ्टी अधिकारी नमूना लेने का अधिकारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को बता रहे हैं। यही कारण है कि जिले में एक दशक से मीट का एक भी नमूना नहीं भरा गया।

मालूम रहे कि नगर समेत जनपद में पांच हजार से अधिक मीट की फुटकर दुकानें हैं। नगर में ही डेढ़ हजार से अधिक दुकानों पर मीट और मछली की बिक्री होती है। नियम के तहत वर्ष 2011 तक मीट का नमूना भरने की जिम्मेदारी नगर पालिका के पास थी।


इसके बाद मीट की सैंपलिंग का अधिकार फूड सेफ्टी विभाग के पास पहुंच गया। डीओ फूड सेफ्टी डा. गौरीशंकर ने बताया कि चूंकि विभाग के पास मीट सैंपलिंग भेजने और सील करने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। फूड सेफ्टी में मीट की गुणवत्ता परखने की व्यवस्था नहीं है। सैपंलिंग भरने की सही जिम्मेदारी किसकी है इसका आला अधिकारियों को भी पता नहीं है।

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