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कोरोना की दूसरी लहर में फूल के दामों में 90 फीसदी की गिरावट
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कोरोना की दूसरी लहर में फूल के दामों में 90 फीसदी की गिरावट
बुलंदशहर। जनपद में फूल उत्पादक किसानों पर कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर आई है। कोरोना कर्फ्यू की लगातार मियाद बढ़ने से फूलों की बिक्री के साथ दामों में भी भारी गिरावअ आई है। फूलों का कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। कोरोना से पहले 40 रुपये के हिसाब से बिकने वाले फूल की कीमत मात्र पांच रुपये प्रति किलो रह गई है। ऐसे में फूल उत्पादक किसान गत वर्ष की तरह इस बार भी हो रहे नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
165 हेक्टेयर में होती है फूल की खेती
जनपद में फूल की खेती का रकबा 165 हेक्टेयर है।
- 150 हेक्टेयर में गेंदा
- 10 हेक्टेयर में गुलाब
- पांच हेक्टेयर में अन्य तरह के फूल
पांच हजार किसान करते हैं खेती
जिले में करीब पांच हजार किसान फूल की खेती करते हैं। इस समय सभी जरूरी काम, जिसमें फूलाें की जरूरत होती है। वह बंद होने के कारण फूल की मांग न के बराबर रह गई है। किसान और विक्रेताओं का दावा है कि इस समय फूल की मांग मात्र 10 फीसदी ही है। कोरोना ने इस कारोबार को पूरी तरह से ठप कर दिया है। दिल्ली में फूल का दाम पांच रुपये मिल रहा है। ऐसे में किसान अपनी फूल की फसल को खेत में ही जोतने का मन बनाने लगे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धीरेंद्र सिंह का कहना है कि इस समय फूल उत्पादक किसान खासे परेशान हैं और उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है।
उत्पादन में लगने वाली लागत और अन्य जानकारी
- एक बीघा फूल उगाने में आती है 10 हजार रुपये की लागत
- फसल तैयार होने पर होती है करीब 20- 25 हजार रुपये की आमदनी
- इस समय फूल नहीं बिकने से किसान फसल को खेत में जोतने की कर रहे तैयारी
- जनपद से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में होता है फूलों की सप्लाई
- जनपद में भी फूलाें का कारोबार घटकर रह गया मात्र 10 फीसदी
- फूल विक्रेताओं के अनुसार अब तो फूल नहीं बिकने के कारण हो रहे खराब
- जनपद में गेंदा, गुलाब आदि फूलों की की जाती है पैदावार
दो से पांच रुपये किलो मिल रहा दाम
कोरोना काल से पहले फूलों का दाम 40 रुपये प्रति किलो मिल रहा था। अब दिल्ली में ही दो- से पांच रुपये किलो का भाव है। ऐसे में गाड़ी का किराया भी नहीं निकल पाएगा। इस बार भी किसान गत वर्ष की तरह बर्बाद हो गया है। अब तो फसल को जोतने का मन बना लिया है।
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- लोकेश, किसान
लागत नहीं निकलने से फसल को जोतने का मन
फूलों की खेती से अच्छी आमदनी हो जाती थी। लेकिन पिछले दो साल से कोरोना काल के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब स्थिति यह है कि फूल नहीं बिकने पर खेत में ही फसल को जोतने का मन कर रहा है।
विनोद सैनी, किसान
दस फीसदी से कम है बिक्री
कोरोना के चलते फूलों का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। इस समय 10 फीसदी ही फूल बिक रहे हैं। फूल खरीदने के बाद नहीं बिकने पर रोजाना काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि किसी शादी की गाड़ी सजने के लिए आती है तो यह अलग बात है।
भीम सिंह, फूल विक्रेता।
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बुलंदशहर। जनपद में फूल उत्पादक किसानों पर कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर आई है। कोरोना कर्फ्यू की लगातार मियाद बढ़ने से फूलों की बिक्री के साथ दामों में भी भारी गिरावअ आई है। फूलों का कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। कोरोना से पहले 40 रुपये के हिसाब से बिकने वाले फूल की कीमत मात्र पांच रुपये प्रति किलो रह गई है। ऐसे में फूल उत्पादक किसान गत वर्ष की तरह इस बार भी हो रहे नुकसान को लेकर चिंतित हैं।
165 हेक्टेयर में होती है फूल की खेती
जनपद में फूल की खेती का रकबा 165 हेक्टेयर है।
- 150 हेक्टेयर में गेंदा
- 10 हेक्टेयर में गुलाब
- पांच हेक्टेयर में अन्य तरह के फूल
पांच हजार किसान करते हैं खेती
जिले में करीब पांच हजार किसान फूल की खेती करते हैं। इस समय सभी जरूरी काम, जिसमें फूलाें की जरूरत होती है। वह बंद होने के कारण फूल की मांग न के बराबर रह गई है। किसान और विक्रेताओं का दावा है कि इस समय फूल की मांग मात्र 10 फीसदी ही है। कोरोना ने इस कारोबार को पूरी तरह से ठप कर दिया है। दिल्ली में फूल का दाम पांच रुपये मिल रहा है। ऐसे में किसान अपनी फूल की फसल को खेत में ही जोतने का मन बनाने लगे हैं।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धीरेंद्र सिंह का कहना है कि इस समय फूल उत्पादक किसान खासे परेशान हैं और उन्हें लगातार नुकसान हो रहा है।
उत्पादन में लगने वाली लागत और अन्य जानकारी
- एक बीघा फूल उगाने में आती है 10 हजार रुपये की लागत
- फसल तैयार होने पर होती है करीब 20- 25 हजार रुपये की आमदनी
- इस समय फूल नहीं बिकने से किसान फसल को खेत में जोतने की कर रहे तैयारी
- जनपद से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में होता है फूलों की सप्लाई
- जनपद में भी फूलाें का कारोबार घटकर रह गया मात्र 10 फीसदी
- फूल विक्रेताओं के अनुसार अब तो फूल नहीं बिकने के कारण हो रहे खराब
- जनपद में गेंदा, गुलाब आदि फूलों की की जाती है पैदावार
दो से पांच रुपये किलो मिल रहा दाम
कोरोना काल से पहले फूलों का दाम 40 रुपये प्रति किलो मिल रहा था। अब दिल्ली में ही दो- से पांच रुपये किलो का भाव है। ऐसे में गाड़ी का किराया भी नहीं निकल पाएगा। इस बार भी किसान गत वर्ष की तरह बर्बाद हो गया है। अब तो फसल को जोतने का मन बना लिया है।
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- लोकेश, किसान
लागत नहीं निकलने से फसल को जोतने का मन
फूलों की खेती से अच्छी आमदनी हो जाती थी। लेकिन पिछले दो साल से कोरोना काल के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। अब स्थिति यह है कि फूल नहीं बिकने पर खेत में ही फसल को जोतने का मन कर रहा है।
विनोद सैनी, किसान
दस फीसदी से कम है बिक्री
कोरोना के चलते फूलों का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। इस समय 10 फीसदी ही फूल बिक रहे हैं। फूल खरीदने के बाद नहीं बिकने पर रोजाना काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है। यदि किसी शादी की गाड़ी सजने के लिए आती है तो यह अलग बात है।
भीम सिंह, फूल विक्रेता।