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Bulandshahar News: सीएमओ कार्यालय परिसर में बनेगा ई-कोर्ट

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 10:32 PM IST
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E-court will be built in CMO office premises
जिला चिकित्सालय।
बुलंदशहर। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े चिकित्सकों को बयान के लिए अब हाईकोर्ट या बाहरी जनपदों की कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। सीएमओ कार्यालय परिसर में ई-कोर्ट (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम) बनाया जाएगा। इसके लिए शासन ने एलईडी व अन्य जरूरी उपकरण भेज दिए हैं। जल्द ही ई-कोर्ट बनाने के लिए स्थान का चुनाव कर लिया जाएगा।
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जिले के स्वास्थ्य विभाग में तैनात चिकित्सक या अधिकारी समय-समय पर किसी ना किसी मामले की गवाही के लिए के लिए अन्य जनपद या हाईकोर्ट जाना पड़ जाता है। इसमें समय की बर्बादी होती है। साथ ही चिकित्सक के न होने से मरीजों को भी परेशानी होती है। पिछले वर्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. बृजेश राठौर ने पत्र भेजकर ई-कोर्ट (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम) बनाने के निर्देश दिए। करीब पांच माह इंतजार करने के बाद जिले को ई-कोर्ट बनाने के लिए पत्र और सामान मिला है। सामान आ जाने पर विभागीय अफसर एक कक्ष को चिन्हित करने में जुट गए हैं।
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प्रतिमाह जाते हैं 10 से अधिक चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के विधिक सलाहकार हर्ष उदयचंद्रा ने बताया कि प्रतिमाह हाईकोर्ट या अन्य जनपद की कोर्ट में 10 से अधिक चिकित्सक जाते-आते रहते हैं। कभी-कभी गवाही से अलग भी दस्तावेज मांग लिए जाते हैं। इसके लिए दूसरी तारीख पर जाना पड़ता है। अब जिले में ई-कोर्ट बनेगी तो अधिक समय बर्बाद नहीं होगा और न ही किसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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2023 में प्रधानमंत्री ने की थी घोषणा
ई-कोर्ट परियोजना का उद्देश्य न्यायपालिका के लिए एक एकीकृत प्रौद्योगिकी मंच स्थापित करना है। जो न्यायालयों, वादियों और अन्य हितधारकों के बीच एक सहज और पेपरलेस इंटरफ़ेस प्रदान करेगा। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ई-कोर्ट परियोजना चरण-तीन को मंजूरी दी थी। भारत में ई-कोर्ट परियोजना का तीसरा चरण “पहुंच और समावेशन” के दर्शन पर आधारित है। ई-कोर्ट चरण-तीन का उद्देश्य रिकॉर्ड सहित पूरे न्यायालय रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के माध्यम से डिजिटल, ऑनलाइन और पेपरलेस कोर्ट की दिशा में आगे बढ़ते हुए न्याय की अधिक से अधिक आसान व्यवस्था शुरू करना। इसके अलावा ई-सेवा केंद्रों के साथ सभी न्यायालय परिसरों की परिपूर्णता के माध्यम से ई-फाइलिंग/ई-भुगतान का सार्वभौमिकरण करना भी है। इससे मामलों को पुनर्निधारण या प्राथमिकता देते समय न्यायाधीशों और रजिस्ट्रियों के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम और कुशल स्मार्ट प्रणालियां स्थापित होंगी।


कार्यालय परिसर में ई-कोर्ट (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम) बनाने के लिए कक्ष को चिन्हित किया जा रहा है। जहां पर शोरगुल न हो और बैठने की उचित व्यवस्था हो। इसके बनने से काफी राहत मिलेगी। - डॉ. मंजू अग्रवाल, कार्यवाहक सीएमओ
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