{"_id":"58cad8f44f1c1b992132a363","slug":"isd-calls-on-fake-id-big-scam-suspects","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी आईडी पर आईएसडी कॉल्स, बड़े घोटाले का शक","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फर्जी आईडी पर आईएसडी कॉल्स, बड़े घोटाले का शक
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Thu, 16 Mar 2017 11:57 PM IST
विज्ञापन
क्राइम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
आईएसडी कॉल के जरिए अधिकारियों को धमकाने के मामले में फर्जी सिमों का प्रयोग हो रहा था। ये सिमें एक ही नामी कंपनी की ली गई थी। फेक आईएसडी कॉल आने और उनमें फर्जी सिम प्रयोग होने के कारण पुलिस को राष्ट्र की सुरक्षा और सरकार के राजस्व को चूना लगाने का शक हुआ।
इसीलिए पुलिस ने पांच आरोपियों से खुलासे के बाद आईबी, एनआईए और डीओटी को सूचना दी थी। पुलिस को शक है कि गैंग का मकसद पैसा ही नहीं कुछ और भी हो सकता है। पुलिस अब आरोपियों के आकाओं की तलाश में जुट गई है।
विज्ञापन
एसपी देहात जगदीश शर्मा ने बताया कि 12 मार्च 2017 में कोतवाली देहात के भूड़ चौराहे पांचों आरोपियों ने एक बड़ा खुलासा किया कि आरोपी फर्जी आईडी पर लिए गए सिमों के जरिए आईएसडी कॉल्स कराते थे। जिले के अधिकारियों के पास धमकी भरे कॉल्स पहुंचने के बाद इनकी धरपकड़ हुई।
विज्ञापन
फर्जी सिम, आईएसडी कॉल्स और विदेश से संबंध होने के कारण पुलिस अलर्ट हो गई। एसपी देहात ने बताया कि इसमें भारत सरकार को चूना लगाने और देश की सुरक्षा के खतरे को देखते हुए तत्काल एनआईए, आईबी और डीओटी को सूचना दी गई थी।
इसी कारण बृहस्पतिवार को आरोपियों को रिमांड के लिए एनआईए की टीम बुलंदशहर पहुंची। पूरे मामले की शक है कि गैंग में और लोग भी जुड़े हो। इसके तार आजमगढ़ से भी जुड़ रहे हैं। टेलीकॉम उपकरण बेचने वाले आजमगढ़ निवासी सरफुद्दीन की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
एसपी देहात का कहना है कि आरोपियों का मुख्य मकसद अभी तक पता नहीं चला है। यह अभी जांच का विषय है। चूंकि इसमें देश की सुरक्षा का मामला था, इसीलिए तत्काल देश की प्रमुख खुफिया विंग एनआईए को सूचना दी गई।
पुलिस को शक है कि आरोपियों का मकसद आईएसडी कॉल्स कराकर पैसा कमाना होगा। जिससे भारत सरकार को चूना लग रहा था। उनका मोटिव और कुछ भी हो सकता है। आरोपियों के आकाओं की तलाश की जा रही है।
फर्जी आईडी पर ली गई सिमों के जरिए आईसीडी कॉल्स की जा रही थीं। ऐसे में शक है कि गैंग भारत सरकार के राजस्व को चूना लगा रहा हो। इसके तार विदेश से जुड़े हुए हैं और फर्जी कॉल्स की जा रही है। इसलिए देश को खतरा है।
इस कारण ही तत्काल एनआईए, डीओटी, आईबी और एसटीएफ पत्र लिखा गया है। - जगदीश शर्मा, एसपी देहात, बुलंदशहर
फाइनेंसकर्मी ने किश्त के लिए एडीजीसी को की थी कॉल
एडीजीसी को फोन कर धमकाने वाला आरोपी बदमाश नहीं बल्कि फाइनेंसकर्मी था। आरोपी ने किश्त की अदायगी के लिए फोन किया था। एडीजीसी के पड़ोसी ने फाइनेंसकर्मी को एडीजीसी का नंबर दे दिया था। जांच में मामला फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने राहत की सास ली है।
यमुनापुरम निवासी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नवनीत कुमार शर्मा पुत्र प्यारे लाल शर्मा ने नगर कोतवाली में एनसीआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि छह मार्च की सुबह 11.35 बजे उनके मोबाइल पर अज्ञात नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने जान से मारने की धमकी दी।
कॉल करने वाले ने यह भी कहा कि यह नंबर उसे सुभाष चंद शर्मा पुत्र भूदत्त ने दिया है। तुम उसे जानते होंगे। नगर कोतवाल पोसीराम शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की तो पता चला कि जिस नंबर से कॉल आई थी वह एक नामी फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी की थी।
कॉल करने वाले ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले गुलावठी थाना क्षेत्र के गांव सरायतुल्ला नई बस्ती निवासी सुभाष चंद शर्मा पुत्र भूदत्त शर्मा ने एक बाइक यूपी13 एएम 5172 फाइनेंस पर खरीदी थी। सुभाष पिछले कुछ समय से बाइक की अंतिम किश्त 1958 रुपये जमा नहीं कर रहा था।
छह मार्च को जब सुभाष को फोन किया तो उसने एडीजीसी का नंबर दे दिया। इस संबंध में जब सुभाष चंद शर्मा से पूछताछ की तो उसने नंबर देने की बात कबूल कर ली।