{"_id":"5d0d21a38ebc3e014601f889","slug":"156114165213-bulandshahr-news93","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस वर्षो से चल रहा था फर्जी मार्कशीट बनाने का गोरखधंधा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
दस वर्षो से चल रहा था फर्जी मार्कशीट बनाने का गोरखधंधा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दस वर्षों से चल रहा था फर्जी मार्कशीट बनाने का धंधा
औरंगाबाद। क्षेत्र में फर्जी मार्कशीट बनाने का गोरखधंधा करीब दस वर्षों से चल रहा था, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। रविंद्र फर्जी मार्कशीट बनाने में माहिर था। वह रातभर अपनी दुकान खोलकर गोरख धंधे को अंजाम देता था। रविंद्र अब तक लगभग तीन दुकानें भी बदल चुका था।
अगौता पुलिस की गिरफ्त में आया रविंद्र शर्मा फर्जी मार्कशीट बनाने में बेहद शातिर है। मूल मार्कशीट के जैसी नकली मार्कशीट बनाकर ऐसे देता है कि किसी को कोई शक नहीं हो सके। पुलिस ने उसकी दुकान से बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब उन दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी रविंद्र ने सौ से अधिक लोगों को फर्जी मार्कशीट बनाकर बेची है। पुलिस उसको रिमांड पर लेकर और भी अहम खुलासा कर सकती है। जिन लोगों की रविंद्र ने फर्जी मार्कशीट बनाई है, उनको भी पूछताछ के दायरे में लाया जा सकता है। इससे पहले औरंगाबाद निवासी एक युवक फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में जेल जा चुका है। इंस्पेक्टर अगौता जेपी चौबे ने बताया कि मामले में जांच चल रही है जो भी नाम प्रकाश में आएंगे, उन सभी से पूछताछ की जाएगी।
रविंद्र अपने साथियों के साथ मिलकर कंप्यूटर और स्कैनर की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। यह मार्कशीट देखने में भी असली लगती थी।
विज्ञापन
औरंगाबाद। क्षेत्र में फर्जी मार्कशीट बनाने का गोरखधंधा करीब दस वर्षों से चल रहा था, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। रविंद्र फर्जी मार्कशीट बनाने में माहिर था। वह रातभर अपनी दुकान खोलकर गोरख धंधे को अंजाम देता था। रविंद्र अब तक लगभग तीन दुकानें भी बदल चुका था।
अगौता पुलिस की गिरफ्त में आया रविंद्र शर्मा फर्जी मार्कशीट बनाने में बेहद शातिर है। मूल मार्कशीट के जैसी नकली मार्कशीट बनाकर ऐसे देता है कि किसी को कोई शक नहीं हो सके। पुलिस ने उसकी दुकान से बड़ी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस अब उन दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी रविंद्र ने सौ से अधिक लोगों को फर्जी मार्कशीट बनाकर बेची है। पुलिस उसको रिमांड पर लेकर और भी अहम खुलासा कर सकती है। जिन लोगों की रविंद्र ने फर्जी मार्कशीट बनाई है, उनको भी पूछताछ के दायरे में लाया जा सकता है। इससे पहले औरंगाबाद निवासी एक युवक फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में जेल जा चुका है। इंस्पेक्टर अगौता जेपी चौबे ने बताया कि मामले में जांच चल रही है जो भी नाम प्रकाश में आएंगे, उन सभी से पूछताछ की जाएगी।
विज्ञापन
रविंद्र अपने साथियों के साथ मिलकर कंप्यूटर और स्कैनर की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। यह मार्कशीट देखने में भी असली लगती थी।