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बेकाबू हुए कुते, काटने से मासूम की हुई मौत

Sun, 09 Sep 2018 11:09 PM IST
Updated Sun, 09 Sep 2018 11:09 PM IST
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कुत्ता काटने से बच्चे की मौत
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बुलंदशहर / अनूपशहर। जनपद में पिछले कुछ दिनों में कुत्तों का आतंक बढ़ा है। लगातार कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अब अनूपशहर क्षेत्र में कुत्ता के काटने से चार वर्षीय मासूम की मौत हो गई। वहीं, मौत का कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज वैक्सीन न मिलना बताया जा रहा है। अगर समय से बच्चे को एंटी रैबीज वैक्सीन लग गया होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। स्वास्थ विभाग का सिस्टम दम तोड़ रहा है।
अनूपशहर नगर क्षेत्र के मोहल्ला मोरीगेट निवासी भूपेंद्र कुमार का चार वर्षीय बेटा हिमांशु डेढ़ माह पूर्व घर के बाहर खेल रहा था। खेलते समय एक कुत्ते ने अचानक मासूम पर हमला कर दिया और उसके चेहरे व शरीर पर गहरे घाव कर दिए। परिजनों ने बताया कि हिमांशु को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने एंटी रैबीज वैक्सीन न होने की बात कह वापस भेज दिया। पिता भूपेंद्र कुमार ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन न मिलने पर हिमांशु का देशी इलाज करवाया जा रहा था। शनिवार को हिमांशु की हालत अधिक बिगड़ने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए। जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर बता हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया। बताया कि दिल्ली के एक अस्पताल ने मासूम को लाईलाज घोषित कर वापस कर दिया। रविवार को घर पर ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
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पालिका और पंचायत अफसरों द्वारा नहीं चलाया जाता अभियान
क्षेत्र में खूंखार हो रहे कुत्ते-बंदर और अन्य जानवरों को पकड़ने का कार्य नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायत अफसरों का है। शिकायत मिलने पर अफसरों द्वारा अभियान चलाने के नाम पर लापरवाही बरती जा रही है। जिससे क्षेत्रों में कुत्ते-बंदर और अन्य जानवर और अधिक खूंखार हो रहे हैं। हिमांशु के परिजनों ने जिला प्रशासन से बंदरों व कुत्तों की बढ़ती तादात व उनके द्वारा हो रहे हमलों पर नाराजगी जताते हुए अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।
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सीएचसी-पीएचसी पर नहीं मिलती एंटी रैबीज वैक्सीन
कुत्ता या बंदर काटने के बाद सीएचसी-पीएचसी जाने पर मरीज और तीमारदारों को एंटी रैबीज वैक्सीन न होने की बात कह वापस कर दिया जाता है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर सीएचसी-पीएचसी पर पर्याप्त मात्रा में एंटी रैबीज वैक्सीन से लेकर सभी प्रकार की दवाईयों की बात कहते हैं। समय-समय पर अफसरों के ये दावे हवाई साबित नजर आते रहते है।

पूर्व में कई लोगों की हो चुकी है मौत
जिले में गत वर्ष में चार से अधिक लोगों की कुत्ते के काटने से मौत हो चुकी है। जिनका कारण भी समय से एंटी रैबीज वैक्सीन न मिलना रहा। साथ ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के नाम पर परिजनों ने भी लापरवाही बरती।


एक माह में चार वैक्सीन होती है अनिवार्य
कुत्ता या बंदर काटने के बाद पीड़ित को एक माह के अंदर चार एंटी रैबीज वैक्सीन लगवानी पड़ती है। चिकित्सकों के अनुसार ये एंटी रैबीज वैक्सीन पहले दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन और 28 वें दिन पीड़ित को अवश्य लगवाने चाहिए। तभी रैबीज का असर कम होता है। कुछ लोग एक-दो वैक्सीन लगवाने के बाद लापरवाही बरत देते है। ऐसा नहीं होना चाहिए। समय से वैक्सीन न लगने पर रैबीज फैलने का डर रहता है और मरीज की हालत बिगड़ने के साथ परिवार के किसी अन्य सदस्य में भी फैलने का खतरा बना रहता है।
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