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कोरोना मरीजों के उपचार के लिए परिवार से बना ली दूरी
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डॉ. नमिता रस्तौगी।
- फोटो : BULANDSHAHR
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कोरोना मरीजों के उपचार के लिए परिवार से बना ली दूरी
बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जहां लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। वहीं, कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचाने के लिए कोरोना योद्धा मैदान में डटे हैं। इनमें बहुत से ऐसे हैं जो बीते वर्ष भी मिसाल बने थे। तब इनमें से कई खुद भी संक्रमित हुए, लेकिन हौसला नहीं खोया। इस बार भी यह कोरोना योद्धा पीपीई किट पहनकर 12 से 16 घंटे तक की ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं।
एक छत की नीचे रहने के बावजूद परिवार से दूर
पहासू सीएचसी अधीक्षक के पद पर कार्यरत डॉ. मनोज कुमार कोरोना संक्रमितों के उपचार में जुटे हैं। कई-कई दिन तक परिवार से नहीं मिल पा रहे। बारह घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन बस एक ही धुन है कि किसी भी तरह कोरोना को हराना है। गत वर्ष भी सर्विलांस टीम में 12 घंटे से अधिक समय तक बिताए।
मरीजों की सेवा ही है मिशन
होम्योपैथिक विभाग में तैनात डॉ. नमिता रस्तोगी भी कोरोना मरीजों के उपचार के लिए तैयार हैं। वह कहती हैं कि कोरोना काल मेें खुद को बचाते हुए उन्प्होंने मरीजों की सेवा की। परिवार गाजियाबाद में रहता है। डॉ. नमिता रस्तोगी ने बताया कि वह ड्यूटी से जब भी घर लौटतीं तो एक कमरे में खुद को कैद कर लेती थीं, वहीं, परिवार के लोग भी दूर से देखकर हालचाल पूछ लिया करते। घर जाने पर बेटे को प्यार करने का मन करता लेकिन बच्चे को प्यार को मन में महसूस कर वह खुद को उनके पास जाने से रोक लेतीं। इस बार भी वह पूरी जिम्मेदारी के साथ जंग को तैयार हैं।
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दिन-रात सेवा करने को तैयार
वैर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सचिन भाटी कहते हैं कि इस बार फिर से विभाग द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के लिए वह तैयार हैं। बताया कि यदि चिकित्सक ही कोरोना से डर जाएंगे तो इलाज कौन करेगा। हम सब को मिलकर इसके लिए लड़ना होगा। गत वर्ष परिवार से काफी समय तक दूर रहे और विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाती उसे पूरा करने तक कार्य में जुटे रहते। कभी-कभी दिन का खाना तक भूल जाते। डॉ. सचिन भाटी ने बताया कि सभी को पता था कि संक्रमण खतरनाक साबित हो रहा हैा।
टीके की डोज से मरीजों को दे रहे शक्ति
लखावटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि इस बार विभाग द्वारा कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके लिए वह जुटे हैं और संक्रमण से टीम और स्वयं को बचाने का प्रयास करते रहते हैं। गत वर्ष कोरोना संक्रमित की पुष्टि करने के लिए जांच की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान लखावटी ब्लॉक क्षेत्र में गांव-गांव और गली-मोहल्ले में टीम के साथ जाकर लोगों का सैंपल लेकर जांच करवाई। इस कार्य में कभी-कभी रात के आठ-नौ भी बज जातेे।
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जहां लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। वहीं, कोरोना संक्रमित लोगों की जान बचाने के लिए कोरोना योद्धा मैदान में डटे हैं। इनमें बहुत से ऐसे हैं जो बीते वर्ष भी मिसाल बने थे। तब इनमें से कई खुद भी संक्रमित हुए, लेकिन हौसला नहीं खोया। इस बार भी यह कोरोना योद्धा पीपीई किट पहनकर 12 से 16 घंटे तक की ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं।
एक छत की नीचे रहने के बावजूद परिवार से दूर
पहासू सीएचसी अधीक्षक के पद पर कार्यरत डॉ. मनोज कुमार कोरोना संक्रमितों के उपचार में जुटे हैं। कई-कई दिन तक परिवार से नहीं मिल पा रहे। बारह घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन बस एक ही धुन है कि किसी भी तरह कोरोना को हराना है। गत वर्ष भी सर्विलांस टीम में 12 घंटे से अधिक समय तक बिताए।
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मरीजों की सेवा ही है मिशन
होम्योपैथिक विभाग में तैनात डॉ. नमिता रस्तोगी भी कोरोना मरीजों के उपचार के लिए तैयार हैं। वह कहती हैं कि कोरोना काल मेें खुद को बचाते हुए उन्प्होंने मरीजों की सेवा की। परिवार गाजियाबाद में रहता है। डॉ. नमिता रस्तोगी ने बताया कि वह ड्यूटी से जब भी घर लौटतीं तो एक कमरे में खुद को कैद कर लेती थीं, वहीं, परिवार के लोग भी दूर से देखकर हालचाल पूछ लिया करते। घर जाने पर बेटे को प्यार करने का मन करता लेकिन बच्चे को प्यार को मन में महसूस कर वह खुद को उनके पास जाने से रोक लेतीं। इस बार भी वह पूरी जिम्मेदारी के साथ जंग को तैयार हैं।
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दिन-रात सेवा करने को तैयार
वैर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. सचिन भाटी कहते हैं कि इस बार फिर से विभाग द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी के लिए वह तैयार हैं। बताया कि यदि चिकित्सक ही कोरोना से डर जाएंगे तो इलाज कौन करेगा। हम सब को मिलकर इसके लिए लड़ना होगा। गत वर्ष परिवार से काफी समय तक दूर रहे और विभाग द्वारा जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाती उसे पूरा करने तक कार्य में जुटे रहते। कभी-कभी दिन का खाना तक भूल जाते। डॉ. सचिन भाटी ने बताया कि सभी को पता था कि संक्रमण खतरनाक साबित हो रहा हैा।
टीके की डोज से मरीजों को दे रहे शक्ति
लखावटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि इस बार विभाग द्वारा कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके लिए वह जुटे हैं और संक्रमण से टीम और स्वयं को बचाने का प्रयास करते रहते हैं। गत वर्ष कोरोना संक्रमित की पुष्टि करने के लिए जांच की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान लखावटी ब्लॉक क्षेत्र में गांव-गांव और गली-मोहल्ले में टीम के साथ जाकर लोगों का सैंपल लेकर जांच करवाई। इस कार्य में कभी-कभी रात के आठ-नौ भी बज जातेे।