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बीमा कंपनी ब्याज सहित चुकाए इलाज का खर्च, उपभोक्ता न्यायालय ने सुनाया फैसला

Thu, 25 Mar 2021 11:08 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 25 Mar 2021 11:08 PM IST
सार

-इलाज में खर्च हुई एक लाख 68 हजार 352 रुपये मय ब्याज रकम परिवादी को 45 दिन में देने का आदेश
 

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consumer court order to insurance company paid medical expenses including interest
कोर्ट ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिक्लेम पॉलिसी का भुगतान नहीं करने पर न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है। इलाज में खर्च हुई एक लाख 68 हजार 352 रुपये मय ब्याज रकम परिवादी को 45 दिन में देने का आदेश दिया है। 45 दिन में परिवादी को भुगतान नहीं करने पर ब्याज का फीसद बढ़ाने के आदेश भी दिए हैं। 
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न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के पीए शेखर वर्मा ने बताया कि वर्ष 2016 में देवीपुरा निवासी एडवोकेट भूपेंद्र राजपूत ने परिवाद दायर किया था। जिसमें बताया गया था कि उन्होंने वर्ष 2014 में यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से दो लाख रुपये की मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। परिवादी के पुत्र अश्वनी राजपूत की वर्ष 2015 में अचानक तबीयत खराब हो गई। अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के बाद वहां से दिल्ली एम्स के लिए रेफर किया गया। जहां परिवादी के पुत्र की सर्जरी हुई और काफी समय तक इलाज चला। जिसमें करीब तीन लाख का खर्च आया। 
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आरोप लगाया कि कैशलैस पॉलिसी होने के कारण अस्पताल ने नगद धनराशि जमा कराई। बीमा कंपनी से मेडिक्लेम लेने के लिए कहा। बीमा कंपनी ने परिवादी का मेडिक्लेम दावा खारिज कर दिया। कहा कि उनके पुत्र की पीठ में कुब्भ था। पॉलिसी लेते समय इस बीमारी को छिपाया गया। जबकि परिवादी ने बताया कि इलाज कुब्भ का नहीं बल्कि सी-6 और सी-7 बर्टिबरा के फियुज्ड से उत्पन्न बीमारी का हुआ है। इलाज खर्च तीन लाख, मानसिक क्षतिपूर्ति 50 हजार और वाद व्यय पांच हजार रुपये दिलाने के लिए उपभोक्ता न्यायालय की शरण ली। जिस पर न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह और सामान्य सदस्य मोहित कुमार सिंह ने बीमा कंपनी का तर्क खारिज कर दिया। परिवादी को वाद दायर करने की तिथि से छह फीसद ब्याज की दर से भुगतान के आदेश बीमा कंपनी को दिए हैं।
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