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शीतलहर के बीच पारा गिरकर पहुंचा 5 डिग्री पर
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शीतलहर के बीच पारा गिरकर पहुंचा 5 डिग्री पर
बुलंदशहर। पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते चल रही शीतलहर के साथ रविवार को पारा गिरकर पांच डिग्री पर पहुंच गया। धूप निकलने के बाद भी शीतलहर का अहसास कम नहीं हुआ। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी कई दिन तक ठिठुरन के साथ शीतलहर जारी रहने की संभावना है। साथ ही मौसम में बदलाव हो सकता है।
सुबह के समय धूप निकलने के बाद भी शीतलहर का प्रकोप कम नहीं हुआ। इससे बचाव के लिए लोगों ने तरह-तरह के उपाय किए। बावजूद इसके निजात नहीं मिली। ठंड से बचने के लिए लोग धूप में भी बैठे, लेकिन शीतलहर चलने से राहत नहीं मिल सकी। रविवार को अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल का कहना है कि पहाड़ों पर बर्फबारी से शीतलहर ने जोर पकड़ लिया है। इससे आगामी कई दिन तक शीतलहर जारी रहने की संभावना है। वहीं, मौसम में बदलाव भी हो सकता है। इसके चलते आने वाले दिनों में कोहरे के साथ पाला भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, दूसरी और कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज ने लगातार मौसम में आ रहे बदलाव को लेकर फसलों में नुकसान की संभावना जताई है। उनका कहना है कि यह मौसम गेहूं की फसल के लिए सही है। लेकिन आलू, मटर और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मौसम में नमी अधिक होने पर इन फसलों को झुलसा रोग का अधिक प्रकोप होता है। किसानों को सावधान रहने की जरूरत है।
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बुलंदशहर। पहाड़ों पर बर्फबारी के चलते चल रही शीतलहर के साथ रविवार को पारा गिरकर पांच डिग्री पर पहुंच गया। धूप निकलने के बाद भी शीतलहर का अहसास कम नहीं हुआ। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी कई दिन तक ठिठुरन के साथ शीतलहर जारी रहने की संभावना है। साथ ही मौसम में बदलाव हो सकता है।
सुबह के समय धूप निकलने के बाद भी शीतलहर का प्रकोप कम नहीं हुआ। इससे बचाव के लिए लोगों ने तरह-तरह के उपाय किए। बावजूद इसके निजात नहीं मिली। ठंड से बचने के लिए लोग धूप में भी बैठे, लेकिन शीतलहर चलने से राहत नहीं मिल सकी। रविवार को अधिकतम तापमान 22 और न्यूनतम पांच डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल का कहना है कि पहाड़ों पर बर्फबारी से शीतलहर ने जोर पकड़ लिया है। इससे आगामी कई दिन तक शीतलहर जारी रहने की संभावना है। वहीं, मौसम में बदलाव भी हो सकता है। इसके चलते आने वाले दिनों में कोहरे के साथ पाला भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, दूसरी और कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज ने लगातार मौसम में आ रहे बदलाव को लेकर फसलों में नुकसान की संभावना जताई है। उनका कहना है कि यह मौसम गेहूं की फसल के लिए सही है। लेकिन आलू, मटर और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे मौसम में नमी अधिक होने पर इन फसलों को झुलसा रोग का अधिक प्रकोप होता है। किसानों को सावधान रहने की जरूरत है।
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