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पांच बार मुआयना फिर भी अस्पताल की बीमारी दूर न कर पाए विधायक
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स्याना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।
- फोटो : BULANDSHAHR
पांच बार मुआयना फिर भी अस्पताल की बीमारी दूर न कर पाए विधायक
बुलंदशहर। जिले के अस्पतालों में सुविधाओं का घोर अभाव है। हालत यह है कि जिन अस्पतालों को जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया है, वहां भी स्थिति सही नहीं है।
अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद दिलाए थे। अभी तक जिले के सात में से पांच विधायकों ने ही अस्पताल गोद लिए हैं। अनूपशहर विधायक संजय शर्मा और शिकारपुर विधायक व वन राज्य मंत्री अनिल शर्मा ने अभी तक किसी भी अस्पताल को गोद नहीं लिया है। वहीं, माननीयों के गोद लिए इन अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का खासा अभाव है। सड़क दुर्घटनाओं या अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों को यहां से केवल रेफर करते हुए खानापूर्ति कर ली जाती है। जिसके चलते आज भी जनता को या तो कई किमी की दूरी तय करते हुए बड़े अस्पताल या निजी अस्पतालों में मोटी रकम इलाज के लिए खर्च करनी पड़ती है। विधायकों के गोद लिए अस्पतालों में औसतन 300 से 400 मरीज रोजाना अपना उपचार कराने पहुंचते हैं।
अगौता सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा नहीं
अगौता सीएचसी पर क्षेत्र के करीब 80 गांवों के लोग उपचार के लिए आते हैं। सदर विधायक उषा सिरोही ने इस अस्पताल को गोद लिया। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अभी हालात ढाक के तीन पात ही हैं। अस्पताल में न तो मरीजों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा दी गई है और न ही खून की जांच की पर्याप्त सुविधा है। वहीं चिकित्सक व स्टाफ के साथ ही संसाधनों की कमी के कारण गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को रेफर कर खानापूर्ति कर ली जाती है। विधायक के मुताबिक अस्पताल में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। तीन बार जाकर मौके का निरीक्षण कर स्टाफ की तैनाती के लिए भी शासन को पत्र लिखा है। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट के लिए 50 लाख रुपये विधायक निधि से दिया था, जिसका कार्य पूरा हो गया है।
धरपा सीएचसी पर नहीं दूर हुई स्टाफ की कमी
खुर्जा विधायक बिजेंद्र सिंह ने धरपा सीएचसी को गोद लिया था। जिससे क्षेत्र के 110 गांवों के लोगों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद जगी थी। विधायक के अनुसार करीब दस बार वह अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक चिकित्सक व स्टाफ की कमी को दूर नहीं करा सके हैं। आलम यह है कि अस्पताल में सात चिकित्सकों के स्थान पर केवल दो चिकित्सक तैनात हैं। वहीं, बारिश में जल भराव की समस्या से भी लोगों को जूझना प़ड़ता है। अस्पताल में खून की जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। विधायक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल को गोद लेने के बाद भवन की रंगाई-पुताई कराते हुए परिसर में साफ-सफाई भी कराई है। इसके अलावा समय-समय पर अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से बातचीत और अस्पताल में सुविधाओं की जानकारी ली जाती है।
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स्याना में नहीं लगी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन
स्याना सीएचसी को विधायक देवेंद्र सिंह लोधी ने गोद लिया है। अस्पताल में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। कोविड के दौर में ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने अपनी निधि से 50 लाख रुपये ऑक्सीजन प्लांट और 25 लाख रुपये से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन की सुविधा के लिए प्रयास किए हैं। अस्पताल में मरीजों के लिए 30 ऑक्सीजन बेड के साथ ही आईसीयू की सुविधा है। हालांकि विधायक निधि से अभी तक एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित नहीं हो सकी है। जिसके लिए मरीजों को आज भी निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है, या फिर जिला अस्पताल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। विधायक देवेंद्र सिंह ने बताया कि जल्द से जल्द मरीजों को अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल का करीब पांच बार दौरा कर चुका हूं। मौके पर जो भी अव्यवस्था मिलती है उसके सुधार के प्रयास रहते हैं।
139 गांवों के मरीजों के लिए रेफरल सेंटर है वैर पीएचसी
सिकंदराबाद विधायक विमला सोलंकी ने वैर पीएचसी को गोद तो ले लिया, लेकिन 139गांवों के मरीजों के लिए आज भी वह एक रेफर सेंटर से अधिक कुछ नहीं है। स्थिति यह है कि अभी तक विधायक ने केवल पांच बार ही अस्पताल का निरीक्षण किया है। हालांकि दावा है कि इमरजेंसी रूम वह 30 केवीए का जेनरेटर लगवाया है। साथ ही इमरजेंसी के लिए आठ बेड ऑक्सीजन युक्त व तीमारदारों के बैठने के लिए एक टीन शेड की व्यवस्था कराई गई है। केंद्र प्रभारी के मुताबिक पीएचसी में डिलीवरी, इमरजेंसी, ओपीडी, आईपीडी की सुविधाएं मौजूद है। जबकि एक्सरे, अल्ट्रासाउंडसमेत अन्य सुविधाएं अभी भी नदारद हैं। विधायक विमला सोलंकी ने बताया कि अस्पताल में काफी कार्य कराए गए हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए संसाधन जुटाने के लिए शासन को पत्र भी लिखा है। अस्पताल का चार बार दौरा किया है।
सीएचसी में आज भी स्ट्रेचर पर उपचार के लिए मजबूर हैं मरीज
डिबाई सीएचसी को विधायक अनीता लोधी ने गोद तो लिया, लेकिन इमरजेंसी कक्ष न होने के कारण सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को आज भी स्ट्रेचर पर उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सीएचसी में प्रतिदिन करीब 400 मरीज उपचार के लिए आते हैं। यहां पर उन्हें परामर्श देने के लिए केवल दो ही चिकित्सक तैनात हैं। इन्हें भी मेडिकोलीगल व अन्य सरकारी कार्यों का बोझ दिया गया है। विधायक डा. अनीता लोधी ने बताया कि 15 लाख डिबाई सीएचसी, 12 लाख कसरेकलां पीएचसी तथा दो लाख की धनराशि दानपुर सीएचसी को सुविधाएं बढ़ाने के लिए दी गई है। शासन व सीएमओ को चिकित्सक तैनाती को कई बार पत्र लिखा गया है। गोद लेने के बाद अस्पताल का पांच बार निरीक्षण किया है।
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बुलंदशहर। जिले के अस्पतालों में सुविधाओं का घोर अभाव है। हालत यह है कि जिन अस्पतालों को जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया है, वहां भी स्थिति सही नहीं है।
अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद दिलाए थे। अभी तक जिले के सात में से पांच विधायकों ने ही अस्पताल गोद लिए हैं। अनूपशहर विधायक संजय शर्मा और शिकारपुर विधायक व वन राज्य मंत्री अनिल शर्मा ने अभी तक किसी भी अस्पताल को गोद नहीं लिया है। वहीं, माननीयों के गोद लिए इन अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का खासा अभाव है। सड़क दुर्घटनाओं या अन्य बीमारियों के गंभीर मरीजों को यहां से केवल रेफर करते हुए खानापूर्ति कर ली जाती है। जिसके चलते आज भी जनता को या तो कई किमी की दूरी तय करते हुए बड़े अस्पताल या निजी अस्पतालों में मोटी रकम इलाज के लिए खर्च करनी पड़ती है। विधायकों के गोद लिए अस्पतालों में औसतन 300 से 400 मरीज रोजाना अपना उपचार कराने पहुंचते हैं।
अगौता सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा नहीं
अगौता सीएचसी पर क्षेत्र के करीब 80 गांवों के लोग उपचार के लिए आते हैं। सदर विधायक उषा सिरोही ने इस अस्पताल को गोद लिया। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन अभी हालात ढाक के तीन पात ही हैं। अस्पताल में न तो मरीजों को अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की सुविधा दी गई है और न ही खून की जांच की पर्याप्त सुविधा है। वहीं चिकित्सक व स्टाफ के साथ ही संसाधनों की कमी के कारण गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को रेफर कर खानापूर्ति कर ली जाती है। विधायक के मुताबिक अस्पताल में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। तीन बार जाकर मौके का निरीक्षण कर स्टाफ की तैनाती के लिए भी शासन को पत्र लिखा है। साथ ही ऑक्सीजन प्लांट के लिए 50 लाख रुपये विधायक निधि से दिया था, जिसका कार्य पूरा हो गया है।
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धरपा सीएचसी पर नहीं दूर हुई स्टाफ की कमी
खुर्जा विधायक बिजेंद्र सिंह ने धरपा सीएचसी को गोद लिया था। जिससे क्षेत्र के 110 गांवों के लोगों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद जगी थी। विधायक के अनुसार करीब दस बार वह अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक चिकित्सक व स्टाफ की कमी को दूर नहीं करा सके हैं। आलम यह है कि अस्पताल में सात चिकित्सकों के स्थान पर केवल दो चिकित्सक तैनात हैं। वहीं, बारिश में जल भराव की समस्या से भी लोगों को जूझना प़ड़ता है। अस्पताल में खून की जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। विधायक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल को गोद लेने के बाद भवन की रंगाई-पुताई कराते हुए परिसर में साफ-सफाई भी कराई है। इसके अलावा समय-समय पर अस्पताल में पहुंचकर मरीजों से बातचीत और अस्पताल में सुविधाओं की जानकारी ली जाती है।
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स्याना में नहीं लगी एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन
स्याना सीएचसी को विधायक देवेंद्र सिंह लोधी ने गोद लिया है। अस्पताल में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। कोविड के दौर में ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने अपनी निधि से 50 लाख रुपये ऑक्सीजन प्लांट और 25 लाख रुपये से अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन की सुविधा के लिए प्रयास किए हैं। अस्पताल में मरीजों के लिए 30 ऑक्सीजन बेड के साथ ही आईसीयू की सुविधा है। हालांकि विधायक निधि से अभी तक एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित नहीं हो सकी है। जिसके लिए मरीजों को आज भी निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है, या फिर जिला अस्पताल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। विधायक देवेंद्र सिंह ने बताया कि जल्द से जल्द मरीजों को अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधाएं दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल का करीब पांच बार दौरा कर चुका हूं। मौके पर जो भी अव्यवस्था मिलती है उसके सुधार के प्रयास रहते हैं।
139 गांवों के मरीजों के लिए रेफरल सेंटर है वैर पीएचसी
सिकंदराबाद विधायक विमला सोलंकी ने वैर पीएचसी को गोद तो ले लिया, लेकिन 139गांवों के मरीजों के लिए आज भी वह एक रेफर सेंटर से अधिक कुछ नहीं है। स्थिति यह है कि अभी तक विधायक ने केवल पांच बार ही अस्पताल का निरीक्षण किया है। हालांकि दावा है कि इमरजेंसी रूम वह 30 केवीए का जेनरेटर लगवाया है। साथ ही इमरजेंसी के लिए आठ बेड ऑक्सीजन युक्त व तीमारदारों के बैठने के लिए एक टीन शेड की व्यवस्था कराई गई है। केंद्र प्रभारी के मुताबिक पीएचसी में डिलीवरी, इमरजेंसी, ओपीडी, आईपीडी की सुविधाएं मौजूद है। जबकि एक्सरे, अल्ट्रासाउंडसमेत अन्य सुविधाएं अभी भी नदारद हैं। विधायक विमला सोलंकी ने बताया कि अस्पताल में काफी कार्य कराए गए हैं। मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए संसाधन जुटाने के लिए शासन को पत्र भी लिखा है। अस्पताल का चार बार दौरा किया है।
सीएचसी में आज भी स्ट्रेचर पर उपचार के लिए मजबूर हैं मरीज
डिबाई सीएचसी को विधायक अनीता लोधी ने गोद तो लिया, लेकिन इमरजेंसी कक्ष न होने के कारण सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को आज भी स्ट्रेचर पर उपचार कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सीएचसी में प्रतिदिन करीब 400 मरीज उपचार के लिए आते हैं। यहां पर उन्हें परामर्श देने के लिए केवल दो ही चिकित्सक तैनात हैं। इन्हें भी मेडिकोलीगल व अन्य सरकारी कार्यों का बोझ दिया गया है। विधायक डा. अनीता लोधी ने बताया कि 15 लाख डिबाई सीएचसी, 12 लाख कसरेकलां पीएचसी तथा दो लाख की धनराशि दानपुर सीएचसी को सुविधाएं बढ़ाने के लिए दी गई है। शासन व सीएमओ को चिकित्सक तैनाती को कई बार पत्र लिखा गया है। गोद लेने के बाद अस्पताल का पांच बार निरीक्षण किया है।