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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हरकत में आई बीमा कंपनी, दिया फसल का मुआवजा
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रिपोर्ट दर्ज होने के बाद हरकत में आई बीमा कंपनी, दिया फसल का मुआवजा
बुलंदशहर। किसानों की बारिश से खराब हुई फसल का मुआवजा देने में बीमा कंपनी आनाकानी कर रही थी। इस पर डीएम ने कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज करवा दी। इस कार्रवाई के बाद ही बीमा कंपनी हरकत में आई और 1932 किसानों को फसल खराब होने पर 39.50 लाख रुपये का मुआवजा क्षतिपूर्ति के रूप में दे दिया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों का बीमा भी किया जाता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विगत वर्ष 17, 18 और 24 अक्तूबर को भारी बारिश होने के कारण किसानों की खेतों में पानी भर जाने से फसल खराब हो गई थी। जिन किसानों की फसल खराब हुई थी, उन्होंने अपनी फसल बर्बादी का बीमा कंपनी से क्लेम कर मुआवजा मांगा था, लेकिन बीमा कंपनी फसल बर्बादी का किसानों को मुआवजा नहीं दे रही थी। इस पर कई बार कंपनी को नोटिस जारी किए गए। बावजूद इसके जब कंपनी ने कोई सुनवाई नहीं की तो मामला डीएम तक पहुंच गया था। इस मामले में डीएम ने बीमा कंपनी पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश जारी किए थे। अब जब कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज हुई तो हरकत में आई और 1932 किसानों को फसल खराब होने पर 39.50 लाख रुपये का मुआवजा क्षतिपूर्ति के रूप में दे दिया है। इस पूरे मामले में कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा उत्तर प्रदेश की ओर से भी कड़ा संज्ञान लिया गया था। इसके निदेशक राजेश कुमार गुप्ता ने उप कृषि निदेशक को पत्र भेजकर किसानों को फसल बर्बादी की क्षतिपूर्ति किए जाने की सूचना दी गई है।
61 किसानों को खराब धान की फसल के मिले 40 हजार
विगत वर्ष 17, 18 और 24 अक्तूबर को भारी बारिश होने के कारण किसानों की धान की फसल भी खराब हो गई थी। सबसे अधिक फसल गांव आलमगीर धनौरा के 61 किसानों की हुई थी। इन किसानों को भी बीमा कंपनी की ओर से क्षतिपूर्ति के रूप में 40,148 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया है।
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किसानों को 10 रुपये से कम राशि का भी मिला मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों को बीमा कंपनी ने क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा राशि जारी की है। उसमें अधिकतर किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें 10 रुपये से भी कम राशि का मुआवजा मिला है। इन किसानों का कहना है कि यह मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे समान है। जबकि उनकी फसल काफी हद तक खराब हुई थी और मुआवजा राशि बहुत कम मिली है। 10 रुपये से भी कम मुआवजा देकर किसानों के साथ मजाक किया है।
कोट
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में जिस बीमा कंपनी को नामित किया गया है। वह कंपनी किसानों की फसल खराबी का मुआवजा देने में आनाकानी कर रही थी। नियमानुसार पहले नोटिस जारी किए गए। बावजूद इसके जब कोई बात नहीं बनी तो डीएम के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद अब बीमा कंपनी हरकत में आई किसानों की खराब हुई फसल का मुआवजा जारी कर दिया है। - राहुल सिंह तेवतिया, जिला कृषि अधिकारी
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बुलंदशहर। किसानों की बारिश से खराब हुई फसल का मुआवजा देने में बीमा कंपनी आनाकानी कर रही थी। इस पर डीएम ने कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज करवा दी। इस कार्रवाई के बाद ही बीमा कंपनी हरकत में आई और 1932 किसानों को फसल खराब होने पर 39.50 लाख रुपये का मुआवजा क्षतिपूर्ति के रूप में दे दिया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की फसलों का बीमा भी किया जाता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विगत वर्ष 17, 18 और 24 अक्तूबर को भारी बारिश होने के कारण किसानों की खेतों में पानी भर जाने से फसल खराब हो गई थी। जिन किसानों की फसल खराब हुई थी, उन्होंने अपनी फसल बर्बादी का बीमा कंपनी से क्लेम कर मुआवजा मांगा था, लेकिन बीमा कंपनी फसल बर्बादी का किसानों को मुआवजा नहीं दे रही थी। इस पर कई बार कंपनी को नोटिस जारी किए गए। बावजूद इसके जब कंपनी ने कोई सुनवाई नहीं की तो मामला डीएम तक पहुंच गया था। इस मामले में डीएम ने बीमा कंपनी पर एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश जारी किए थे। अब जब कंपनी पर रिपोर्ट दर्ज हुई तो हरकत में आई और 1932 किसानों को फसल खराब होने पर 39.50 लाख रुपये का मुआवजा क्षतिपूर्ति के रूप में दे दिया है। इस पूरे मामले में कृषि सांख्यिकी एवं फसल बीमा उत्तर प्रदेश की ओर से भी कड़ा संज्ञान लिया गया था। इसके निदेशक राजेश कुमार गुप्ता ने उप कृषि निदेशक को पत्र भेजकर किसानों को फसल बर्बादी की क्षतिपूर्ति किए जाने की सूचना दी गई है।
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61 किसानों को खराब धान की फसल के मिले 40 हजार
विगत वर्ष 17, 18 और 24 अक्तूबर को भारी बारिश होने के कारण किसानों की धान की फसल भी खराब हो गई थी। सबसे अधिक फसल गांव आलमगीर धनौरा के 61 किसानों की हुई थी। इन किसानों को भी बीमा कंपनी की ओर से क्षतिपूर्ति के रूप में 40,148 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया है।
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किसानों को 10 रुपये से कम राशि का भी मिला मुआवजा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों को बीमा कंपनी ने क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा राशि जारी की है। उसमें अधिकतर किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें 10 रुपये से भी कम राशि का मुआवजा मिला है। इन किसानों का कहना है कि यह मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे समान है। जबकि उनकी फसल काफी हद तक खराब हुई थी और मुआवजा राशि बहुत कम मिली है। 10 रुपये से भी कम मुआवजा देकर किसानों के साथ मजाक किया है।
कोट
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में जिस बीमा कंपनी को नामित किया गया है। वह कंपनी किसानों की फसल खराबी का मुआवजा देने में आनाकानी कर रही थी। नियमानुसार पहले नोटिस जारी किए गए। बावजूद इसके जब कोई बात नहीं बनी तो डीएम के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद अब बीमा कंपनी हरकत में आई किसानों की खराब हुई फसल का मुआवजा जारी कर दिया है। - राहुल सिंह तेवतिया, जिला कृषि अधिकारी