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डाटा अधूरा मिलने से अधर में लटकी जांच

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2020 11:08 PM IST
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डाटा अधूरा मिलने से अधर में लटकी जांच
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बुलंदशहर। आम लोगों की कोराना जांच को आई एंटीजन किट बाजार में बेचे जाने के मामले में जांच टीम को अधूरा डाटा मिलने से जांच अधर में लटकी हुई है। फर्जीवाड़े में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पूरा विवरण न दिए जाने के कारण विलंब हो रहा है। जबकि, डीएम ने 30 नवंबर को तीन सदस्यीय टीम को एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट मांगी थी।

कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए शासन द्वारा जून में जांच का दायरा बढ़ाने के लिए रैपिड एंटीजन किट से कोरोना जांच की व्यवस्था की थी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने करोड़ों रुपये की एंटीजन किट खरीदे। बाजार में कोरोना जांच किट की डिमांड और कोरोना के खौफ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के मास्टर माइंड दो फार्मासिस्ट और कुछ लैब टेक्नीशियन ने खूब भुनाया और आमजन की निशुल्क जांच के लिए आई एंटीजन किट को बाजार में बेच दिया। जिसकी शिकायत एक गुमनाम पत्र द्वारा चीफ फार्मासिस्ट जगदीश तेवतिया, फार्मासिस्ट मनोज चौधरी और छह लैब टेक्नीशियन पर एंटीजन किट को बाजार में बेचे जाने का आरोप लगाकर की गई थी। एक माह से स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर रहा था, लेकिन मुख्य आरोपी तक पहुंच नहीं पा रहा था। हालांकि इस बीच विभाग ने फर्जीवाड़े की बात कुबूली और चीफ फार्मासिस्ट समेत गुमनाम पत्र में शामिल एक अन्य फार्मासिस्ट और छह लैब टेक्नीशियन को कोविड-19 जांच से हटा दिया गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसर मास्टर माइंड तक पहुंचने में नाकाम साबित रहे। विभाग की लापरवाही और मंद गति से जांच किए जाने पर डीएम ने डिप्टी कलेक्टर को जांच समिति का अध्यक्ष नामित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। जांच टीम में शामिल अफसरों का कहना है कि एंटीजन किट मामले में विभाग द्वारा पूरा डाटा नहीं दिया गया है। साथ ही जो डाटा मिला है वो भी इनकंप्लीट है। जिसमें काफी खामियां हैं। अगर पूरा डाटा मिले तो जांच सही ढंग से हो सकती है। डीएम रविंद्र कुमार ने बताया कि जांच रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। अगर विभाग द्वारा जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है तो इसके लिए निर्देश दिए जाएंगे। मामले में जो भी दोषी होगा उस पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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