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जोया हत्याकांड : मासूम पुत्री के रोने से तंग आकर उसकी हत्या करने वाले पिता को मिला आजीवन कारावास
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जोया हत्याकांड : मासूम पुत्री के रोने से तंग आकर उसकी हत्या करने वाले पिता को मिला आजीवन कारावास
बुलंदशहर। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में करीब पांच वर्ष पूर्व मासूम पुत्री की गला काटकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम संजय मिश्रा ने आरोपी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आरोपी पिता ने मासूम पुत्री के रोने से तंग आकर उसकी गला काटकर हत्या कर दी थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राहुल उपाध्याय और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केशव देव शर्मा ने बताया कि 13 अगस्त 2014 को वादी महरूद्दीन ने कोतवाली जहांगीराबाद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार वादी महरूद्दीन किसी काम से गांव बदरखां में अपने भांजे तौसीम पुत्र शौकीन के घर के सामने से साबिर एवं शहजाद के साथ जा रहा था। तभी तौसीम की पुत्री जोया के रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर वादी ने उसके घर का दरवाजा खोलकर देखा तो तौसीम हाथ में चाकू लेकर चारपाई पर अपनी एक वर्षीय पुत्री जोया से कह रहा था कि तू रोती बहुत है, आज तेरा रोना बंद कर देता हूं। जब तक वादी एवं अन्य लोग उसे रोक पाते, तब तक आरोपी तौसीम ने बच्ची जोया के गर्दन पर चाकू से वार कर दिया। इससे मासूम जोया की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी तौसीम को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोपी तौसीम के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम संजय मिश्रा ने मामले की सुनवाई की। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर आरोपी तौसीम पुत्र शौकीन को घटना का दोषी पाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त तौसीम को उम्रकैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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बुलंदशहर। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में करीब पांच वर्ष पूर्व मासूम पुत्री की गला काटकर हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम संजय मिश्रा ने आरोपी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आरोपी पिता ने मासूम पुत्री के रोने से तंग आकर उसकी गला काटकर हत्या कर दी थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राहुल उपाध्याय और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी केशव देव शर्मा ने बताया कि 13 अगस्त 2014 को वादी महरूद्दीन ने कोतवाली जहांगीराबाद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके अनुसार वादी महरूद्दीन किसी काम से गांव बदरखां में अपने भांजे तौसीम पुत्र शौकीन के घर के सामने से साबिर एवं शहजाद के साथ जा रहा था। तभी तौसीम की पुत्री जोया के रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर वादी ने उसके घर का दरवाजा खोलकर देखा तो तौसीम हाथ में चाकू लेकर चारपाई पर अपनी एक वर्षीय पुत्री जोया से कह रहा था कि तू रोती बहुत है, आज तेरा रोना बंद कर देता हूं। जब तक वादी एवं अन्य लोग उसे रोक पाते, तब तक आरोपी तौसीम ने बच्ची जोया के गर्दन पर चाकू से वार कर दिया। इससे मासूम जोया की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी तौसीम को पकड़कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना उपरांत आरोपी तौसीम के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम संजय मिश्रा ने मामले की सुनवाई की। न्यायाधीश ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर आरोपी तौसीम पुत्र शौकीन को घटना का दोषी पाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त तौसीम को उम्रकैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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