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अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही बरन वाटिका
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अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही बरन वाटिका
बुलंदशहर। शहर की शान के रूप में स्थापित हुई बरन वाटिका आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने कूड़े के ढेर को खत्म कर वहां पर वाटिका का निर्माण कराया था। लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते लोगों को मायूसी ही मिली है।
एक समय था जब शहर के मुख्य बाजार के पास पुरानी जेल के पीछे कूड़े का ढेर लगा रहता था। आते जाते राहगीर मुंह पर रुमाल रखकर निकला करते थे। उसी दौरान नगर में डीएम रोशन जैकब की पोस्टिंग हुई और उन्होंने वहां पर गंदगी को हटाने का निर्देश पालिका को दिया। इसके बाद वहां पर बीडीए से कहकर लोगों को घूमने के लिए एक वाटिका बनवाने का निर्देश दिया। इसका नाम बुुलंदशहर के पूर्व नाम पर बरन रखा गया। 26 जनवरी 2018 को बरन वाटिका का शुभारंभ तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने किया। उस समय उसे शहर की शान बताया। वाटिका में कई फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज भी लगाया। दीवारों पर जनपद के व्यवसाय जैसे दूध, खुर्जा की पॉटरी, नरौरा परमाणु केंद्र, कुचेसर फोर्ट आदि की पेंटिंग बनवाई गई। बताया जा रहा है कि इसको बनाने में करीब 30 लाख रुपये का खर्चा हुआ था। इसको बनाने के लिए बनारस से आर्टिस्टों को बुलवाया गया था। बनने के बाद बरन वाटिका लोगों की पहली पसंद बन गई। सुबह और शाम यहां पर घूमने व शांति से बैठने वालों की भीड़ रहने लगी। लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही और अनदेखी के चलते इसका हाल बद से बद्तर हो गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते पेड़ पौधे तो सूख ही गए है, हालात इतने खराब है कि दीवार को सुन्दर दिखाने के लिए जो पेंटिंग बनाई गई थी वो सारी बारिश और धूप के चलते उखड़ गई है। जबकि तत्कालीन डीएम ने इसके सौंद्रीयकरण के लिए बीडीए से कहा था। लेकिन डीएम के तबादले के बाद बीडीए और पालिका एक दूसरे पर सौंद्रीयकरण करने को कह रहे है। बहराल जो भी शहरवासियों के लिए एक अच्छा काम हुआ था, जोकि सरकारी तंत्र की अनदेखी के चलते बदहाल हो चुका है।
कोट
हमने बरन वाटिका के सुंदरीकरण का काम पालिका को हैंडओवर कर दिया है। पहली बार जो खर्चा आएगा वह बीडीए देगा और बाद में पालिका ही इसका सुंदरीकरण कराएगा।
ज्ञानेेंद्र कुमार वर्मा, बीडीए सचिव
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बुलंदशहर। शहर की शान के रूप में स्थापित हुई बरन वाटिका आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने कूड़े के ढेर को खत्म कर वहां पर वाटिका का निर्माण कराया था। लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही के चलते लोगों को मायूसी ही मिली है।
एक समय था जब शहर के मुख्य बाजार के पास पुरानी जेल के पीछे कूड़े का ढेर लगा रहता था। आते जाते राहगीर मुंह पर रुमाल रखकर निकला करते थे। उसी दौरान नगर में डीएम रोशन जैकब की पोस्टिंग हुई और उन्होंने वहां पर गंदगी को हटाने का निर्देश पालिका को दिया। इसके बाद वहां पर बीडीए से कहकर लोगों को घूमने के लिए एक वाटिका बनवाने का निर्देश दिया। इसका नाम बुुलंदशहर के पूर्व नाम पर बरन रखा गया। 26 जनवरी 2018 को बरन वाटिका का शुभारंभ तत्कालीन डीएम रोशन जैकब ने किया। उस समय उसे शहर की शान बताया। वाटिका में कई फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज भी लगाया। दीवारों पर जनपद के व्यवसाय जैसे दूध, खुर्जा की पॉटरी, नरौरा परमाणु केंद्र, कुचेसर फोर्ट आदि की पेंटिंग बनवाई गई। बताया जा रहा है कि इसको बनाने में करीब 30 लाख रुपये का खर्चा हुआ था। इसको बनाने के लिए बनारस से आर्टिस्टों को बुलवाया गया था। बनने के बाद बरन वाटिका लोगों की पहली पसंद बन गई। सुबह और शाम यहां पर घूमने व शांति से बैठने वालों की भीड़ रहने लगी। लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही और अनदेखी के चलते इसका हाल बद से बद्तर हो गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते पेड़ पौधे तो सूख ही गए है, हालात इतने खराब है कि दीवार को सुन्दर दिखाने के लिए जो पेंटिंग बनाई गई थी वो सारी बारिश और धूप के चलते उखड़ गई है। जबकि तत्कालीन डीएम ने इसके सौंद्रीयकरण के लिए बीडीए से कहा था। लेकिन डीएम के तबादले के बाद बीडीए और पालिका एक दूसरे पर सौंद्रीयकरण करने को कह रहे है। बहराल जो भी शहरवासियों के लिए एक अच्छा काम हुआ था, जोकि सरकारी तंत्र की अनदेखी के चलते बदहाल हो चुका है।
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कोट
हमने बरन वाटिका के सुंदरीकरण का काम पालिका को हैंडओवर कर दिया है। पहली बार जो खर्चा आएगा वह बीडीए देगा और बाद में पालिका ही इसका सुंदरीकरण कराएगा।
ज्ञानेेंद्र कुमार वर्मा, बीडीए सचिव