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‘कल्याण रिटर्न’ में देरी से अटकी भाजपा जिलाध्यक्ष की ताजपोशी
Bulandshahr
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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बुलंदशहर। पूर्व सीएम कल्याण सिंह रिटर्न के कारण यहां के भाजपा जिलाध्यक्ष की ताजपोशी अटक गई है। बाबू जी की पसंद का भाजपा खेमा पूरा ख्याल रखना चाहता है। यही वजह है कि यहां का चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, जबकि मेरठ मंडल के दूसरों जिलोें में चुनाव हो चुके हैं। बुलंदशहर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के गृह मंडल का जनपद है।
सत्ता से संगठन नहीं बल्कि संगठन से सत्ता बनती और मिलती है। इस सूत्र पर भाजपा ने प्रदेश में संगठन चुनाव पर पूरा जोर दे रखा है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की प्राथमिकताओं में संगठन चुनाव है। बुलंदशहर वाजपेयी के गृह मंडल का जिला होने के बाद भी यहां का चुनाव अटका हुआ है। ऐेसे हालात तब हैं जब जिले से संगठन के आधार पर बनाए गए मंडलों के चुनाव हो चुके हैं। उनको पक्ष में करने के लिए जिलाध्यक्ष बनने की चाह रखने वाले जी तोड़ कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए स्वागत समारोह को बहाना बनाया गया है। जिलाध्यक्ष की ताजपोशी में देरी की वजह कल्याण सिंह की वापसी के कारण हो रही है। कल्याण की भाजपा में वापसी होते ही अलीगढ़ और बुलंदशहर में उनका पूरा दखल होगा। जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष भी उनकी पसंद के होने की पक्की उम्मीद है। यहां तक कि कल्याण सिंह की पार्टी राष्ट्रवादी जनक्रांति पार्टी के नेता भाजपा में विलय के बाद किसी साथी को जिलाध्यक्ष बनवाने की भरपूर कोशिश करेंगे। जबकि भाजपा हर हाल में अपने व्यक्ति की ताजपोशी ही पसंद करेगी। अभी तक डीके शर्मा, वीरेंद्र राणा और रामेश्वर लोधी के नाम प्रमुख दावेदारों में हैं। इसी माह कल्याण की वापसी अगर हुई तो दिसंबर के शुरू में जिलाध्यक्ष का चुनाव या सर्वसम्मति से नामित होना भी तय है।
प्रदेश चुनाव प्रभारी और नेतृत्व से अभी बात नहीं हुई हैं। एक दो दिन में बात संभव है। उसके बाद तिथि घोषित करने के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
नरेंद्र सिंह, जिला चुनाव प्रभारी भाजपा
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सत्ता से संगठन नहीं बल्कि संगठन से सत्ता बनती और मिलती है। इस सूत्र पर भाजपा ने प्रदेश में संगठन चुनाव पर पूरा जोर दे रखा है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की प्राथमिकताओं में संगठन चुनाव है। बुलंदशहर वाजपेयी के गृह मंडल का जिला होने के बाद भी यहां का चुनाव अटका हुआ है। ऐेसे हालात तब हैं जब जिले से संगठन के आधार पर बनाए गए मंडलों के चुनाव हो चुके हैं। उनको पक्ष में करने के लिए जिलाध्यक्ष बनने की चाह रखने वाले जी तोड़ कोशिश में जुटे हैं। इसके लिए स्वागत समारोह को बहाना बनाया गया है। जिलाध्यक्ष की ताजपोशी में देरी की वजह कल्याण सिंह की वापसी के कारण हो रही है। कल्याण की भाजपा में वापसी होते ही अलीगढ़ और बुलंदशहर में उनका पूरा दखल होगा। जिसमें भाजपा जिलाध्यक्ष भी उनकी पसंद के होने की पक्की उम्मीद है। यहां तक कि कल्याण सिंह की पार्टी राष्ट्रवादी जनक्रांति पार्टी के नेता भाजपा में विलय के बाद किसी साथी को जिलाध्यक्ष बनवाने की भरपूर कोशिश करेंगे। जबकि भाजपा हर हाल में अपने व्यक्ति की ताजपोशी ही पसंद करेगी। अभी तक डीके शर्मा, वीरेंद्र राणा और रामेश्वर लोधी के नाम प्रमुख दावेदारों में हैं। इसी माह कल्याण की वापसी अगर हुई तो दिसंबर के शुरू में जिलाध्यक्ष का चुनाव या सर्वसम्मति से नामित होना भी तय है।
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प्रदेश चुनाव प्रभारी और नेतृत्व से अभी बात नहीं हुई हैं। एक दो दिन में बात संभव है। उसके बाद तिथि घोषित करने के बारे में कुछ कहा जा सकता है।
नरेंद्र सिंह, जिला चुनाव प्रभारी भाजपा