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श्रीलंका में किसान के बेटे ने जीता ब्राउंज मेडल
Updated Thu, 10 Aug 2017 10:32 PM IST
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श्रीलंका में किसान के बेटे ने जीता ब्राउंज मेडल
- जिले के गांव किशनपुर के खिलाड़ी ने भाला फेंक प्रतियोगिता में जीता मेडल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले के गांव किशनपुर के युवा खिलाड़ी ने श्रीलंका में आयोजित एशियन चैंपियनशिप की भाला फेंक प्रतियोगिता में ब्राउंज मेडल जीतकर जिले का ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया है। खिलाड़ी किसान का बेटा है और उसकी इस उपलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है।
गांव किशनपुर के रहने वाले युवा खिलाड़ी शेखर कपासिया ने बताया कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीए अंग्रेजी ऑनर की पढ़ाई कर रहा है। उसने स्टूडेंट ओलंपिक एसोसिएशन के बैनर तले 26 से 30 जुलाई तक श्रीलंका के कोलंबो में संपन्न हुई एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया। यहां उसने भाला फेंक प्रतियोगिता में भाग लेकर ब्राउंज मेडल जीता है। शेखर की इस जीत पर दादा रामरिख, दादी रामवती देवी, पिता इंद्रपाल और मां विमलेश देवी सहित पूरे परिवार के सदस्यों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों में भी खुशी है। शेखर का दावा है कि वह अपने इस खेल को आगे जारी रखेगा और इसी तरह मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेगा। उसने अपनी जीत का श्रेय अपने परिजनों को दिया है। उसका कहना है कि यदि परिजनों का सहयोग नहीं मिलता तो वह श्रीलंका जाकर मेडल नहीं जीत पाता।
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- जिले के गांव किशनपुर के खिलाड़ी ने भाला फेंक प्रतियोगिता में जीता मेडल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जिले के गांव किशनपुर के युवा खिलाड़ी ने श्रीलंका में आयोजित एशियन चैंपियनशिप की भाला फेंक प्रतियोगिता में ब्राउंज मेडल जीतकर जिले का ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन किया है। खिलाड़ी किसान का बेटा है और उसकी इस उपलब्धि पर परिवार में खुशी का माहौल है।
गांव किशनपुर के रहने वाले युवा खिलाड़ी शेखर कपासिया ने बताया कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीए अंग्रेजी ऑनर की पढ़ाई कर रहा है। उसने स्टूडेंट ओलंपिक एसोसिएशन के बैनर तले 26 से 30 जुलाई तक श्रीलंका के कोलंबो में संपन्न हुई एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया। यहां उसने भाला फेंक प्रतियोगिता में भाग लेकर ब्राउंज मेडल जीता है। शेखर की इस जीत पर दादा रामरिख, दादी रामवती देवी, पिता इंद्रपाल और मां विमलेश देवी सहित पूरे परिवार के सदस्यों में ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों में भी खुशी है। शेखर का दावा है कि वह अपने इस खेल को आगे जारी रखेगा और इसी तरह मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करेगा। उसने अपनी जीत का श्रेय अपने परिजनों को दिया है। उसका कहना है कि यदि परिजनों का सहयोग नहीं मिलता तो वह श्रीलंका जाकर मेडल नहीं जीत पाता।
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