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Budaun News: दुष्कर्म के मामले में युवक को 10 साल व दो अन्य को पांच-पांच साल की कैद
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बदायूं। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश तिवारी की अदालत ने मंगलवार को किशोरी को बहलाकर ले जाने और दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की कैद और 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। सहयोगी चंद्रपाल व शकुंतला को पांच-पांच साल का कठोर कारावास की कैद और 10-10 हजार का अर्थदंड लगाया। तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में लेने के भी निर्देश दिए हैं।
थाना सिविल लाइन में 17 सितंबर 2020 को किशोरी के घर पहुंचे पुषेंद्र, चंद्रपाल और शकुंतला उसे श्याम सिंह के घर ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए थे। काफी देर तक किशोरी के वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश की। बाद में पुलिस में शिकायत दी गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना के दौरान किशोरी को बरामद कर उसका बयान दर्ज कराया और चिकित्सीय परीक्षण कराया।
अदालत में अभियोजन ने पीड़िता, उसके माता-पिता समेत कई गवाहों के बयान कराए। पीड़िता ने बयान में बताया कि उसे बहलाकर ले जाया गया और ईंट-भट्ठे पर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत ने सुनवाई शुरू की। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने पुषेंद्र को दुष्कर्म और अपहरण के आरोप में दोषी माना।
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हालांकि, पीड़िता की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम होने का आरोप अभियोजन पर्याप्त साक्ष्य से संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने पुषेंद्र को पॉक्सो एक्ट की धाराओं व चंद्रपाल और शकुंतला को पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड की राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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थाना सिविल लाइन में 17 सितंबर 2020 को किशोरी के घर पहुंचे पुषेंद्र, चंद्रपाल और शकुंतला उसे श्याम सिंह के घर ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गए थे। काफी देर तक किशोरी के वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने तलाश की। बाद में पुलिस में शिकायत दी गई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद विवेचना के दौरान किशोरी को बरामद कर उसका बयान दर्ज कराया और चिकित्सीय परीक्षण कराया।
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अदालत में अभियोजन ने पीड़िता, उसके माता-पिता समेत कई गवाहों के बयान कराए। पीड़िता ने बयान में बताया कि उसे बहलाकर ले जाया गया और ईंट-भट्ठे पर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत ने सुनवाई शुरू की। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने पुषेंद्र को दुष्कर्म और अपहरण के आरोप में दोषी माना।
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हालांकि, पीड़िता की उम्र घटना के समय 18 वर्ष से कम होने का आरोप अभियोजन पर्याप्त साक्ष्य से संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने पुषेंद्र को पॉक्सो एक्ट की धाराओं व चंद्रपाल और शकुंतला को पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया था। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड की राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।