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भगवान के रूप अनेक पर एकाग्र मन से करें पूजा
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अब्दुल्लागंज में कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। अब्दुल्लागंज में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास ने कहा कि भगवान के रूप अनेक हैं पर एकाग्र मन से पूजा करनी चाहिए। इसी के साथ कथा समापन हो गया। इस मौके पर हुए भंडारे में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा भी की।
श्रीमद् भागवत कथा छह दिन पहले शुरू हुई। अंतिम दिन रामचंद्राचार्य स्वामी ने प्रवचन के दौरान कहा कि इंसान को सही रास्ते पर चलना चाहिए। कभी दूसरे का अहित नहीं सोचना चाहिए। दूसरों के बारे में अच्छा सोचने से आत्मीय शांति की अनुभूति होती है। प्रभु का स्मरण भी एकाग्र मन से करना चाहिए। प्रभु के रूप अनेक हैं।
कथा समापन पर भवन वाली माता के मंदिर पर धार्मिक अनुष्ठान हुआ। रामचंद्राचार्य स्वामी, महंत नारायण स्वामी और अक्षित महाराज ने मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद भंडारे में पहले कन्याओं को भोज कराया गया। व्यवस्थाओं में आनंद मिश्रा, बबलू मिश्रा, सत्यवीर सिंह, मोनू सिसोदिया, ओमवीर चौहान, गौरव साहू और संतोष कश्यप आदि का सहयोग रहा।
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श्रीमद् भागवत कथा छह दिन पहले शुरू हुई। अंतिम दिन रामचंद्राचार्य स्वामी ने प्रवचन के दौरान कहा कि इंसान को सही रास्ते पर चलना चाहिए। कभी दूसरे का अहित नहीं सोचना चाहिए। दूसरों के बारे में अच्छा सोचने से आत्मीय शांति की अनुभूति होती है। प्रभु का स्मरण भी एकाग्र मन से करना चाहिए। प्रभु के रूप अनेक हैं।
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कथा समापन पर भवन वाली माता के मंदिर पर धार्मिक अनुष्ठान हुआ। रामचंद्राचार्य स्वामी, महंत नारायण स्वामी और अक्षित महाराज ने मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद भंडारे में पहले कन्याओं को भोज कराया गया। व्यवस्थाओं में आनंद मिश्रा, बबलू मिश्रा, सत्यवीर सिंह, मोनू सिसोदिया, ओमवीर चौहान, गौरव साहू और संतोष कश्यप आदि का सहयोग रहा।

अब्दुल्लागंज में कथा सुनाते पुष्कर के रामचंद्राचार्य स्वामी। संवाद- फोटो : BADAUN
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