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Budaun News: रक्षाबंधन पर महिलाओं ने घंटों इंतजार और धक्का-मुक्की झेली
Sat, 29 Aug 2026 12:20 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:20 AM IST
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रोडवेज चौराहा पर बसों का इंतजार करती सवारियां। संवाद
बदायूं। रक्षाबंधन पर रोडवेज अड्डे पर बसों की कमी, बैठने की अव्यवस्था और घंटों इंतजार से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। बसें न मिलने से बरेली, शाहजहांपुर और मुरादाबाद मार्ग की महिलाएं ज्यादा परेशान रहीं।
शुक्रवार सुबह से बस अड्डे पर हजारों की संख्या में बहनें पहुंचनी शुरू हो गईं, बस अड्डे पर समय पर बस न मिलने के कारण सवारियों को काफी इंतजार करना पड़ा। बस आने पर सवारियां बैठने के लिए भागती हुईं नजर आईं। भीड़ होने के कारण धक्का-मुक्की भी होती हुई दिखी। वहीं, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण महिलाएं व्यवस्था को कोसती नजर आईं।
दिल्ली रूट पर सर्वाधिक, लोकल रूट पर कम बसें चलीं
बदायूं डिपो से सबसे ज्यादा बसे आनंद बिहार के लिए चलीं। यहां से 120 बसों के संचालन का दावा किया गया। इन बसों के लिए डबल फेरे लगाने की भी व्यवस्था की गई। वहीं, लोकल रूट बरेली, मथुरा, फर्रुखाबाद, चंदौसी, दातागंज आदि के लिए 46 बसें चलाने का दावा किया गया।
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अव्यवस्था पर बोली, बहनें
बस अड्डे से बरेली जाने वाली सुमन देवी ने बताया कि उन्हें सुबह 9 बजे से बरेली के लिए बस का इंतजार करना पड़ा। 11 बजे तक बस नहीं मिली। बैठने के लिए शेड में जगह नहीं थी, धूप में खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ा।
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शाहजहांपुर जाने वाली रीना ने कहा कि वह भाई को राखी बांधने जा रही हैं। फ्री सेवा अच्छी है, लेकिन बसें समय से नहीं आ रही हैं। भीड़ इतनी है कि बस आते ही धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है।
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मुरादाबाद जाने वाली पूनम ने बताया कि मुरादाबाद के लिए बस में धक्का मुक्की होने के कारण वह नहीं बैठ सकीं, इसके बाद एक घंटे से बस अड्डे पर खड़ी का बस का इंतजार कर रही हैं।
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वजीरगंज जाने वाली आशा देवी ने बताया कि ग्रामीण रूटों की बसें सबसे ज्यादा लेट हैं। बैठने का कोई इंतजाम नहीं, बुजुर्ग महिलाएं जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
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डिपो को 27 लाख का मिला राजस्व
बृहस्पतिवार को बदायूं डिपो की बसों से 28 हजार महिला और सहयात्रियों ने बसों से निशुल्क सफर किया। इसमें 21 हजार महिला यात्री और 6 हजार सहयात्री शामिल है। एआरएम राजेश पाठक ने बताया कि इससे डिपो ने 27 लाख का राजस्व की कमाई हुई है।
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वर्जन
रूट डायवर्जन की वजह से भी सुबह के समय बसों को बस अड्डे में पहुंचने में परेशानी हुई थी। इसकी वजह से सुबह के समय भीड़ बढ़ने की वजह से कुछ सवारियों को इंतजार करना पड़ा। दोपहर के बाद में स्थिति ठीक हो गई।
राजेश पाठक, एआरएम
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रक्षाबंधन पर ट्रेनें रहीं फुल, सीट के लिए यात्रियों को करनी पड़ी मशक्कत
फोटो-17
बदायूं। रक्षाबंधन पर रोडवेज बसों के साथ ट्रेनों में भी भारी भीड़ देखने को मिली। बरेली, कासगंज, मथुरा रूट की ट्रेनों में सुबह से ही यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। सीट पाने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही बहनों की भीड़ थी, जो राखी बांधने के लिए अपने भाई के घर जा रही थीं। कासगंज-बरेली, और बरेली कासगंज की रूट की ट्रेनों में में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। महिलाएं बच्चों के साथ गेट के पास खड़े होकर सफर करती नजर आईं। यात्रियों का कहना था कि त्योहार को देखते हुए रेलवे को अतिरिक्त कोच या स्पेशल ट्रेन चलानी चाहिए थी। सीट न मिलने से बुजुर्ग और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। संवाद
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शुक्रवार सुबह से बस अड्डे पर हजारों की संख्या में बहनें पहुंचनी शुरू हो गईं, बस अड्डे पर समय पर बस न मिलने के कारण सवारियों को काफी इंतजार करना पड़ा। बस आने पर सवारियां बैठने के लिए भागती हुईं नजर आईं। भीड़ होने के कारण धक्का-मुक्की भी होती हुई दिखी। वहीं, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण महिलाएं व्यवस्था को कोसती नजर आईं।
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दिल्ली रूट पर सर्वाधिक, लोकल रूट पर कम बसें चलीं
बदायूं डिपो से सबसे ज्यादा बसे आनंद बिहार के लिए चलीं। यहां से 120 बसों के संचालन का दावा किया गया। इन बसों के लिए डबल फेरे लगाने की भी व्यवस्था की गई। वहीं, लोकल रूट बरेली, मथुरा, फर्रुखाबाद, चंदौसी, दातागंज आदि के लिए 46 बसें चलाने का दावा किया गया।
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अव्यवस्था पर बोली, बहनें
बस अड्डे से बरेली जाने वाली सुमन देवी ने बताया कि उन्हें सुबह 9 बजे से बरेली के लिए बस का इंतजार करना पड़ा। 11 बजे तक बस नहीं मिली। बैठने के लिए शेड में जगह नहीं थी, धूप में खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ा।
शाहजहांपुर जाने वाली रीना ने कहा कि वह भाई को राखी बांधने जा रही हैं। फ्री सेवा अच्छी है, लेकिन बसें समय से नहीं आ रही हैं। भीड़ इतनी है कि बस आते ही धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है।
मुरादाबाद जाने वाली पूनम ने बताया कि मुरादाबाद के लिए बस में धक्का मुक्की होने के कारण वह नहीं बैठ सकीं, इसके बाद एक घंटे से बस अड्डे पर खड़ी का बस का इंतजार कर रही हैं।
वजीरगंज जाने वाली आशा देवी ने बताया कि ग्रामीण रूटों की बसें सबसे ज्यादा लेट हैं। बैठने का कोई इंतजाम नहीं, बुजुर्ग महिलाएं जमीन पर बैठने को मजबूर हैं।
डिपो को 27 लाख का मिला राजस्व
बृहस्पतिवार को बदायूं डिपो की बसों से 28 हजार महिला और सहयात्रियों ने बसों से निशुल्क सफर किया। इसमें 21 हजार महिला यात्री और 6 हजार सहयात्री शामिल है। एआरएम राजेश पाठक ने बताया कि इससे डिपो ने 27 लाख का राजस्व की कमाई हुई है।
वर्जन
रूट डायवर्जन की वजह से भी सुबह के समय बसों को बस अड्डे में पहुंचने में परेशानी हुई थी। इसकी वजह से सुबह के समय भीड़ बढ़ने की वजह से कुछ सवारियों को इंतजार करना पड़ा। दोपहर के बाद में स्थिति ठीक हो गई।
राजेश पाठक, एआरएम
रक्षाबंधन पर ट्रेनें रहीं फुल, सीट के लिए यात्रियों को करनी पड़ी मशक्कत
फोटो-17
बदायूं। रक्षाबंधन पर रोडवेज बसों के साथ ट्रेनों में भी भारी भीड़ देखने को मिली। बरेली, कासगंज, मथुरा रूट की ट्रेनों में सुबह से ही यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। सीट पाने के लिए यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही बहनों की भीड़ थी, जो राखी बांधने के लिए अपने भाई के घर जा रही थीं। कासगंज-बरेली, और बरेली कासगंज की रूट की ट्रेनों में में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। महिलाएं बच्चों के साथ गेट के पास खड़े होकर सफर करती नजर आईं। यात्रियों का कहना था कि त्योहार को देखते हुए रेलवे को अतिरिक्त कोच या स्पेशल ट्रेन चलानी चाहिए थी। सीट न मिलने से बुजुर्ग और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। संवाद

रोडवेज चौराहा पर बसों का इंतजार करती सवारियां। संवाद

रोडवेज चौराहा पर बसों का इंतजार करती सवारियां। संवाद

रोडवेज चौराहा पर बसों का इंतजार करती सवारियां। संवाद

रोडवेज चौराहा पर बसों का इंतजार करती सवारियां। संवाद