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सामाजिक मान्यताएं अब भी पुरुष नसबंदी में बाधक
अमर उजाला, बदायूं
Updated Mon, 26 Oct 2015 11:43 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग को 2015 में 1523 पुरुषों और 13438 महिलाओं की नसबंदी
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कराने का लक्ष्य मिला था। सितंबर की बात करें तो इस महीने जिले में सिर्फ
12 पुरुषों ने नसबंदी कराई। इसके मुकाबले 1583 महिलाओं ने नसबंदी कराकर
परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया। सितंबर 2015 में स्वास्थ्य विभाग ने पुरुष
नसबंदी में सिर्फ 0.79 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। जबकि महिलाओं का आंकड़ा
11.78 प्रतिशत रहा। चालू माह अक्तूबर में भी महिलाएं पुरुषों से आगे हैं।
इस महीने विभाग के लिए 50 पुरुषों और 2766 महिलाओं की नसबंदी कराने का
लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष 1555 महिलाओं ने नसबंदी कराई जबकि परिवार
नियोजन के लिए सिर्फ पांच पुरुष ही आगे आए। लक्ष्य हासिल करने की बात करें
तो विभाग ने 56.22 लक्ष्य हासिल किया है। इसमें पुरुषों का प्रतिशत सिर्फ
पांच है।
सिर्फ एक सर्जन के सहारे नसबंदी कार्यक्रम
बदायूं। परिवार नियोजन के तहत चलने वाला नसबंदी कार्यक्रम सिर्फ एक सर्जन के सहारे चल रहा है। जिले में नसबंदी ऑपरेशन करने के नाम पर सिर्फ एक सर्जन की तैनाती है। ऐसे में लक्ष्य को हासिल करने के स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों की मानें तो लक्ष्य के सापेक्ष काफी हद तक अच्छा काम हो रहा है लेकिन सर्जन की कमी भी आड़े आ रही है।
परिवार नियोजन राष्ट्रीय महत्व का है कार्यक्रम है। इसमें अब अच्छी सफलता मिल रही है। कार्यक्रम के तहत जो भी लक्ष्य मिल रहा है उसे पूरा कर लिया जाएगा।-डॉ. आरडी तिवारी, सीएमओ
सिर्फ एक सर्जन के सहारे नसबंदी कार्यक्रम
बदायूं। परिवार नियोजन के तहत चलने वाला नसबंदी कार्यक्रम सिर्फ एक सर्जन के सहारे चल रहा है। जिले में नसबंदी ऑपरेशन करने के नाम पर सिर्फ एक सर्जन की तैनाती है। ऐसे में लक्ष्य को हासिल करने के स्वास्थ्य विभाग के पसीने छूट रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों की मानें तो लक्ष्य के सापेक्ष काफी हद तक अच्छा काम हो रहा है लेकिन सर्जन की कमी भी आड़े आ रही है।
परिवार नियोजन राष्ट्रीय महत्व का है कार्यक्रम है। इसमें अब अच्छी सफलता मिल रही है। कार्यक्रम के तहत जो भी लक्ष्य मिल रहा है उसे पूरा कर लिया जाएगा।-डॉ. आरडी तिवारी, सीएमओ