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बदलता मौसम कहीं डाल न दे बीमार...सावधानी जरूरी
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बदायूं। करवट लेता मौसम स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सावधानी की जरूरत है। सुबह और शाम की सर्द हवाओं के बीच सोमवार रात हुई बारिश के बाद एकाएक तापमान में काफी गिरावट आई है। ऐसे में अगर लापरवाही बरती तो दवा खानी पड़ सकती है। जिससे सांस, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियां घर कर सकती है।
पर्यावरण प्रदूषण के कारण पहले से ही स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। बढ़ती ठंड सावधानी से काम न लेने पर बीमारियों का दायरा और भी बढ़ा रहा है। तापमान गिरने के साथ सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया, दमा, ब्रोंकाइटिस, कोल्ड डायरिया और हृदय संबंधी बीमारियों के प्रकोप का खतरा भी बढ़नेे लगा है। सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी मौसम बदलने के साथ मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। तापमान में ज्यादा गिरावट आने के साथ प्रकोप और बढ़ जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सर्दी को लेकर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो समस्या ज्यादा होगी। डॉक्टर कहते हैं कि कि ठंड से होने वाली बीमारियों में सावधानियां ही बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। सावधानी बरतने से ठंड में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। इस मौसम में तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के कारण बच्चों और बुजुर्गो का खास ख्याल रखना चाहिए।
12 साल से कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं
- सर्दियां बढ़ने के साथ हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में दिल के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। गौर करने वाली बात यह है कि जिला अस्पताल में ही एक दशक से ज्यादा से कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इसके अलावा जिले में कोई प्राइवेट डॉक्टर भी हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में हृदय रोगियों को बरेली की दौड़ लगानी होती है। कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के चलते जिला अस्पताल का हृदय रोग विभाग भी बंद हो गया है। हालांकि, यहां ईसीजी की सुविधा जरूर मिल रही है।
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बदलते मौसम में ये करें उपाय-
- बदलते मौसम में संक्रमण का खतरा होता है। ऐसे में सूती और पर्याप्त वस्त्र पहनना चाहिए।
- खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। पौष्टिक आहार लेना चाहिए, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। मौसमी फलों एवं सब्जियों का खाने में प्रयोग करना चाहिए।
- विटामिन सी वाले फल जैसे संतरा, नींबू ज्यादा लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
- ठंडे पदार्थों का सेवन भी कई बार वायरल बुखार का कारण बन जाता है।
- आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए, साथ ही जंक फूड से भी बचना चाहिए।
- सुबह की सैर के साथ-साथ योग भी अच्छा व्यायाम होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ की बात
बच्चों को सर्दी में बाहर न निकालें। जुकाम से त्रस्त व्यक्ति को बच्चों से दूर रखें। सर्दियों में बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार, कोल्ड डायरिया के साथ ब्रोंकाइटिस का खतरा बना रहता है। बच्चों को टोपा, दस्ताने, मोजे जरूरत पहनाएं। सर्दियों में बच्चों को गरम पानी ही पीने को दें। गुनगुना दूध दें। जिस कमरे में बच्चे हों उसे गरम रखें, लेकिन धुआं आदि नहीं होना चाहिए। बच्चों को रखा हुआ खाना न दें। सोते समय उनका मुंह और नाक खुला रखें। पसलियां चलते समय ज्यादा सावधानी बरतें। बच्चों का खुद इलाज न करें। परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
डॉ. शरद गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ
बदलता मौसम सभी के लिए नुकसानदेह है। सर्दी-जुकाम और बुखार तो सामान्य सी बात है कई अन्य गंभीर बीमारियां भी ज्यादा ठंड होने पर हो जाती हैं। जहां तक संभव हो सर्दियों में गरम पानी का इस्तेमाल करें। ज्यादा देर तक खुले में न रहें। गरम कपड़े पहनें और अपने शरीर को अच्छी तरह से ढका रखें। कान और सीने को सर्दी से बचाने की ज्यादा जरूरत है। हृदय रोगियों के साथ सांस, दमा रोगियों के लिए भी सर्दियों का सीजन खतरनाक है। परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें। खाने-पीने में गरम चीजों का इस्तेमाल करें।
- डॉ. मुकेश जौहरी, फिजीशियन
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पर्यावरण प्रदूषण के कारण पहले से ही स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है। बढ़ती ठंड सावधानी से काम न लेने पर बीमारियों का दायरा और भी बढ़ा रहा है। तापमान गिरने के साथ सर्दी, खांसी, बुखार, निमोनिया, दमा, ब्रोंकाइटिस, कोल्ड डायरिया और हृदय संबंधी बीमारियों के प्रकोप का खतरा भी बढ़नेे लगा है। सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी मौसम बदलने के साथ मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। तापमान में ज्यादा गिरावट आने के साथ प्रकोप और बढ़ जाएगा। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सर्दी को लेकर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो समस्या ज्यादा होगी। डॉक्टर कहते हैं कि कि ठंड से होने वाली बीमारियों में सावधानियां ही बचाव का सर्वोत्तम उपाय है। सावधानी बरतने से ठंड में होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है। इस मौसम में तापमान में गिरावट और ठंड बढ़ने के कारण बच्चों और बुजुर्गो का खास ख्याल रखना चाहिए।
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12 साल से कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं
- सर्दियां बढ़ने के साथ हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्दियों में दिल के मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। गौर करने वाली बात यह है कि जिला अस्पताल में ही एक दशक से ज्यादा से कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इसके अलावा जिले में कोई प्राइवेट डॉक्टर भी हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में हृदय रोगियों को बरेली की दौड़ लगानी होती है। कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के चलते जिला अस्पताल का हृदय रोग विभाग भी बंद हो गया है। हालांकि, यहां ईसीजी की सुविधा जरूर मिल रही है।
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बदलते मौसम में ये करें उपाय-
- बदलते मौसम में संक्रमण का खतरा होता है। ऐसे में सूती और पर्याप्त वस्त्र पहनना चाहिए।
- खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। पौष्टिक आहार लेना चाहिए, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। मौसमी फलों एवं सब्जियों का खाने में प्रयोग करना चाहिए।
- विटामिन सी वाले फल जैसे संतरा, नींबू ज्यादा लेना चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
- ठंडे पदार्थों का सेवन भी कई बार वायरल बुखार का कारण बन जाता है।
- आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए, साथ ही जंक फूड से भी बचना चाहिए।
- सुबह की सैर के साथ-साथ योग भी अच्छा व्यायाम होता है।
बाल रोग विशेषज्ञ की बात
बच्चों को सर्दी में बाहर न निकालें। जुकाम से त्रस्त व्यक्ति को बच्चों से दूर रखें। सर्दियों में बच्चों को सर्दी, खांसी, बुखार, कोल्ड डायरिया के साथ ब्रोंकाइटिस का खतरा बना रहता है। बच्चों को टोपा, दस्ताने, मोजे जरूरत पहनाएं। सर्दियों में बच्चों को गरम पानी ही पीने को दें। गुनगुना दूध दें। जिस कमरे में बच्चे हों उसे गरम रखें, लेकिन धुआं आदि नहीं होना चाहिए। बच्चों को रखा हुआ खाना न दें। सोते समय उनका मुंह और नाक खुला रखें। पसलियां चलते समय ज्यादा सावधानी बरतें। बच्चों का खुद इलाज न करें। परेशानी होने पर डॉक्टर की सलाह लें।
डॉ. शरद गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ
बदलता मौसम सभी के लिए नुकसानदेह है। सर्दी-जुकाम और बुखार तो सामान्य सी बात है कई अन्य गंभीर बीमारियां भी ज्यादा ठंड होने पर हो जाती हैं। जहां तक संभव हो सर्दियों में गरम पानी का इस्तेमाल करें। ज्यादा देर तक खुले में न रहें। गरम कपड़े पहनें और अपने शरीर को अच्छी तरह से ढका रखें। कान और सीने को सर्दी से बचाने की ज्यादा जरूरत है। हृदय रोगियों के साथ सांस, दमा रोगियों के लिए भी सर्दियों का सीजन खतरनाक है। परेशानी होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें। खाने-पीने में गरम चीजों का इस्तेमाल करें।
- डॉ. मुकेश जौहरी, फिजीशियन