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Budaun News: कर रहे थे दावेदारी, शेरवानी की पैरवी, एक बार फिर कटा आबिद का टिकट
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आंवला लोकसभा सीट से मांग रहे थे टिकट, विधानसभा में भी रह गए हाथ मलते
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। आंवला लोकसभा सीट से नीरज मौर्य को सपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पूर्व विधायक आबिद रजा को झटका लगा है। आबिद रजा आंवला लोकसभा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। इससे पहले पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट से धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर और बाद में राज्यसभा के तीन तीन प्रत्याशियों की घोषण से पांच बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सलीम शेरवानी को झटका दिया था। नाखुश शेरवानी ने इसके बाद रविवार को सपा का राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़ दिया।
आबिद रजा सपा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट कर रईस अहमद को प्रत्याशी बना दिया। इसके बाद 2023 में नगर निकाय चुनाव में उनकी पत्नी फात्मा रजा को भी पार्टी सिंबल नहीं दिया। हालांकि, फात्मा रजा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। आबिद रजा आंवला लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। सलीम शेरवानी भी उनकी पैरवी में लगे थे, लेकिन सोमवार को सपा ने आंवला सीट पर पत्ते खोले तो एक बार फिर से आबिद रजा हाथ मलते रह गए।
आंवला लोकसभा क्षेत्र में बदायूं के शेखूपुर और दातागंज विधानसभा क्षेत्र आते हैं। शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में शहर का भी बड़ा हिस्सा आता है। टिकट न मिलने को लेकर बात करने पर आबिद रजा ने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
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बनने लगा चुनावी माहौल, चर्चाओं का दौर शुरू
2009 में सपा से टिकट कटने के बाद सलीम शेरवानी ने धर्मेंद्र यादव के खिलाफ बदायूं लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2014 में भी वह धर्मेंद्र यादव के खिलाफ मैदान में उतरे, लेकिन 2019 में वह कांग्रेस के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद आबिद रजा ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने कई सीटों पर दूसरे दलों के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया था। हालांकि, वह सपा को खास नुकसान नहीं पहुंचा सके। लाकसभा चुनाव से ऐन पहले शेरवानी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफे और आबिद का टिकट कटने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएं हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। आंवला लोकसभा सीट से नीरज मौर्य को सपा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पूर्व विधायक आबिद रजा को झटका लगा है। आबिद रजा आंवला लोकसभा से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। इससे पहले पार्टी ने बदायूं लोकसभा सीट से धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर और बाद में राज्यसभा के तीन तीन प्रत्याशियों की घोषण से पांच बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सलीम शेरवानी को झटका दिया था। नाखुश शेरवानी ने इसके बाद रविवार को सपा का राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़ दिया।
आबिद रजा सपा के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट कर रईस अहमद को प्रत्याशी बना दिया। इसके बाद 2023 में नगर निकाय चुनाव में उनकी पत्नी फात्मा रजा को भी पार्टी सिंबल नहीं दिया। हालांकि, फात्मा रजा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। आबिद रजा आंवला लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। सलीम शेरवानी भी उनकी पैरवी में लगे थे, लेकिन सोमवार को सपा ने आंवला सीट पर पत्ते खोले तो एक बार फिर से आबिद रजा हाथ मलते रह गए।
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आंवला लोकसभा क्षेत्र में बदायूं के शेखूपुर और दातागंज विधानसभा क्षेत्र आते हैं। शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में शहर का भी बड़ा हिस्सा आता है। टिकट न मिलने को लेकर बात करने पर आबिद रजा ने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
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बनने लगा चुनावी माहौल, चर्चाओं का दौर शुरू
2009 में सपा से टिकट कटने के बाद सलीम शेरवानी ने धर्मेंद्र यादव के खिलाफ बदायूं लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2014 में भी वह धर्मेंद्र यादव के खिलाफ मैदान में उतरे, लेकिन 2019 में वह कांग्रेस के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद आबिद रजा ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने कई सीटों पर दूसरे दलों के प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया था। हालांकि, वह सपा को खास नुकसान नहीं पहुंचा सके। लाकसभा चुनाव से ऐन पहले शेरवानी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफे और आबिद का टिकट कटने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई चर्चाएं हैं।