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जल्द ही सरकारी अस्पतालों में तैनात किए जाएंगे वालंटियर
अमर उजाला ब्यूरो/ उझानी
Updated Thu, 13 Apr 2017 11:33 PM IST
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जल्द ही सरकारी अस्पतालों में
तैनात किए जाएंगे वालंटियर
स्वास्थ्य महानिदेशक का फरमान, मांगे गए हैं सेलफोन नंबर
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर किस वक्त पहुंचकर कब तक रुकते हैं, यह जानने के लिए वालंटियर रखे जाएंगे। जो इस संबंध में जानकारी उपलब्ध कराएंगे। वालंटियर तैनात करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय ने ऐसे लोगों का नाम-पता और फोन नंबर उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
अस्पतालों की असलियत जानने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक का फरमान सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंच गया है। इस फरमान में वालंटियर के चयन की जिम्मेदारी चिकित्साधीक्षकों को सौंपी गई है। वह उसी शख्स को वालंटियर बनाएंगे जो अस्पताल के नजदीक का दुकानदार हो या फिर सड़क किनारे चाय-खोमचा लगाता हो। उसका नाम-पता और सेलफोन नंबर स्वास्थ्य महानिदेशालय में रहेगा। महानिदेशक जब चाहे उसे कॉल कर अस्पताल भेजकर सेलफोन पर ही डॉक्टरों की मौजूदगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत जान लेंगे। वह सही जानकारी दे रहा है या नहीं इस संबंध में समय-समय पर क्रास चेक भी किया जाएगा। सूत्रों की माने तो इससे सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर भी अंकुश लगेगा।
फोटो से जानी जाएगी असलियत
उझानी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की नीयत के उद्देश्य से ही महानिदेशालय ने एक और योजना बनाई है। नई योजना के मुताबिक- अस्पताल में सफाई और भवन का रंग-रोगन अच्छा है या नहीं, यह जानने के लिए डॉक्टरों की मौजूदगी में स्वास्थ्य कर्मियों को ग्रुप फोटो कराना होगा। ग्रुप फोटो उसी स्थान पर खिंचेगा, जहां से अस्पताल परिसर स्पष्ट दिख रहा हो। बाद में फोटो महानिदेशालय की आईडी पर भेज दिया जाएगा।
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स्वास्थ्य महानिदेशक के इस फैसले से सेहत सुविधाओं में सुधार होगा। सभी कर्मचारियों को टीम भावना से काम करने का मौका मिलेगा। वालंटियर के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक-दो दिन में उसका नाम-पता और सेलफोन नंबर महानिदेशालय का भेज दिया जाएगा।
- डॉ. मोहम्मद तहसीन, चिकित्साधिकारी।
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तैनात किए जाएंगे वालंटियर
स्वास्थ्य महानिदेशक का फरमान, मांगे गए हैं सेलफोन नंबर
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर किस वक्त पहुंचकर कब तक रुकते हैं, यह जानने के लिए वालंटियर रखे जाएंगे। जो इस संबंध में जानकारी उपलब्ध कराएंगे। वालंटियर तैनात करने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय ने ऐसे लोगों का नाम-पता और फोन नंबर उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
अस्पतालों की असलियत जानने के लिए स्वास्थ्य महानिदेशक का फरमान सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंच गया है। इस फरमान में वालंटियर के चयन की जिम्मेदारी चिकित्साधीक्षकों को सौंपी गई है। वह उसी शख्स को वालंटियर बनाएंगे जो अस्पताल के नजदीक का दुकानदार हो या फिर सड़क किनारे चाय-खोमचा लगाता हो। उसका नाम-पता और सेलफोन नंबर स्वास्थ्य महानिदेशालय में रहेगा। महानिदेशक जब चाहे उसे कॉल कर अस्पताल भेजकर सेलफोन पर ही डॉक्टरों की मौजूदगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत जान लेंगे। वह सही जानकारी दे रहा है या नहीं इस संबंध में समय-समय पर क्रास चेक भी किया जाएगा। सूत्रों की माने तो इससे सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर भी अंकुश लगेगा।
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फोटो से जानी जाएगी असलियत
उझानी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की नीयत के उद्देश्य से ही महानिदेशालय ने एक और योजना बनाई है। नई योजना के मुताबिक- अस्पताल में सफाई और भवन का रंग-रोगन अच्छा है या नहीं, यह जानने के लिए डॉक्टरों की मौजूदगी में स्वास्थ्य कर्मियों को ग्रुप फोटो कराना होगा। ग्रुप फोटो उसी स्थान पर खिंचेगा, जहां से अस्पताल परिसर स्पष्ट दिख रहा हो। बाद में फोटो महानिदेशालय की आईडी पर भेज दिया जाएगा।
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स्वास्थ्य महानिदेशक के इस फैसले से सेहत सुविधाओं में सुधार होगा। सभी कर्मचारियों को टीम भावना से काम करने का मौका मिलेगा। वालंटियर के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक-दो दिन में उसका नाम-पता और सेलफोन नंबर महानिदेशालय का भेज दिया जाएगा।
- डॉ. मोहम्मद तहसीन, चिकित्साधिकारी।