{"_id":"689b994451336dcecf08c9b1","slug":"villagers-surrounded-by-floods-are-struggling-to-save-their-homes-belongings-cattle-and-lives-badaun-news-c-123-1-akb1003-145013-2025-08-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: बाढ़ से घिरे ग्रामीणों कर रहे घर, सामान, मवेशी और जीवन बचाने की जद्दोजहद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: बाढ़ से घिरे ग्रामीणों कर रहे घर, सामान, मवेशी और जीवन बचाने की जद्दोजहद
विज्ञापन
भमरौलिया गांव में ऊंचे स्थान पर ग्रामीणों ने बनाए आशियानें। संवाद
सहसवान। बाढ़ से घिरे ग्रामीणों के सामने अपना घर, सामान, मवेशी और जीवन बचाने का संकट है। दिनों दिन यह संकट बढ़ता जा रहा है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 60 सेंटीमीटर ऊपर है। सबसे सहसवान के छह गांवों के लोग प्रभावित हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों का जन जीवन अस्त व्यस्त है।
गांवों के लोग घरों से अपना सामान नाव के जरिए बाहर निकाल रहे हैं। जानवरों का पेट भरने के लिए गांव से भूसा ले जाना किसी जंग से कम नहीं है। कमर-कमर पानी में होकर लोग घर से तटबंध तक आ-जा रहे हैं। बच्चों व महिलाओं को नाव से ले जाया जा रहा है। यह छह गांव ऐसे हैं जो तटबंध व गंगा के बीच में हैं। अधिकांश घर पक्के बने हुए हैं। इन घरों के लोग छतों पर बसेरा बनाए हुए हैं। इन गांव में रहने वाले लोगों को हर साल बाढ़ का कहर झेलना पड़ रहा है। लोग इतने सबल नहीं हो पा रहे हैं कि गांव से किसी और शहर ओर रुख कर सकें। साल भर के मेहनत की कमाई से भोजन और रहने भर का ही इंतजाम हो पाता है। इसके अलावा कमाई का बड़ा हिस्सा बाढ़ में नष्ट हो जाता है।
गांव वीरसहाय नगला तक पहुंचने के लिए नाव भी दो तटबंध तक नहीं पहुंच पा रहीं है। इसके बीच में तेज गति से बाढ़ का पानी बह रहा है। मंगलवार को नवागत एसडीएम इस गांव जाने को निकले लेकिन तटबंध के बाद पानी का तेज बहाव देख गांव तक नहीं पहुंच सके। गांव के अधिकांश लोगों को निकालकर तटबंध पर ठहराया गया है। गांव के रहने वाले अजीत ने बताया कि लोग बाढ़ का पानी कम होने की दुआ कर रहे हैं। अधिकांश दिनों तक बाढ़ की मार भी नहीं झेल सकते। जानवरों की सबसे अधिक समस्या हो रही है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -
चोरी का डर, रात को घर की छत और दिनभर तटबंध पर बसेरा
बाढ़ में फंसे लोग परिवार सहित तटबंध पर बसेरा बनाए हैं। चोरी के डर से रात को एक व्यक्ति घर तक पहुंच कर छतों पर रुकता है। दिनभर तटबंध पर रह रहे हैं। बच्चों और परिवार के लोग तटबंध पर रह रहे हैं। ऐसे में उनके सामने परिवार और कमाई की बचाने का संकट है। साथ ही मवेशियों को बचाना है। उनके लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
विज्ञापन
गांवों के लोग घरों से अपना सामान नाव के जरिए बाहर निकाल रहे हैं। जानवरों का पेट भरने के लिए गांव से भूसा ले जाना किसी जंग से कम नहीं है। कमर-कमर पानी में होकर लोग घर से तटबंध तक आ-जा रहे हैं। बच्चों व महिलाओं को नाव से ले जाया जा रहा है। यह छह गांव ऐसे हैं जो तटबंध व गंगा के बीच में हैं। अधिकांश घर पक्के बने हुए हैं। इन घरों के लोग छतों पर बसेरा बनाए हुए हैं। इन गांव में रहने वाले लोगों को हर साल बाढ़ का कहर झेलना पड़ रहा है। लोग इतने सबल नहीं हो पा रहे हैं कि गांव से किसी और शहर ओर रुख कर सकें। साल भर के मेहनत की कमाई से भोजन और रहने भर का ही इंतजाम हो पाता है। इसके अलावा कमाई का बड़ा हिस्सा बाढ़ में नष्ट हो जाता है।
विज्ञापन
गांव वीरसहाय नगला तक पहुंचने के लिए नाव भी दो तटबंध तक नहीं पहुंच पा रहीं है। इसके बीच में तेज गति से बाढ़ का पानी बह रहा है। मंगलवार को नवागत एसडीएम इस गांव जाने को निकले लेकिन तटबंध के बाद पानी का तेज बहाव देख गांव तक नहीं पहुंच सके। गांव के अधिकांश लोगों को निकालकर तटबंध पर ठहराया गया है। गांव के रहने वाले अजीत ने बताया कि लोग बाढ़ का पानी कम होने की दुआ कर रहे हैं। अधिकांश दिनों तक बाढ़ की मार भी नहीं झेल सकते। जानवरों की सबसे अधिक समस्या हो रही है।
विज्ञापन
चोरी का डर, रात को घर की छत और दिनभर तटबंध पर बसेरा
बाढ़ में फंसे लोग परिवार सहित तटबंध पर बसेरा बनाए हैं। चोरी के डर से रात को एक व्यक्ति घर तक पहुंच कर छतों पर रुकता है। दिनभर तटबंध पर रह रहे हैं। बच्चों और परिवार के लोग तटबंध पर रह रहे हैं। ऐसे में उनके सामने परिवार और कमाई की बचाने का संकट है। साथ ही मवेशियों को बचाना है। उनके लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।

भमरौलिया गांव में ऊंचे स्थान पर ग्रामीणों ने बनाए आशियानें। संवाद