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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   Upper Ganges constantly growing Water alarm bells

ऊपरी गंगा में लगातार बढ़ रहा पानी खतरे की घंटी

Thu, 09 Jul 2015 07:03 PM IST
badaun
badaun Updated Thu, 09 Jul 2015 07:03 PM IST
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जिले की ऊपरी गंगा में लगातार पानी की बढ़ोतरी खतरे का संकेत दे रही है। हालांकि अभी जिले में गंगा अधिक नुकसान नहीं कर सकी है, लेकिन बचाव कार्य में बाधा जरूर डाल दी। जिले में पांच प्वाइंट अत्याधिक खतरे के हैं, बाढ़ खंड पानी कम होते ही शांत बैठ गया है।

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कभी समय था जो बांध गंगा का छह लाख क्यूसेक पानी को झेल गए थे। पहाड़ों पर बारिश गंगा को उफनाने में सहायक होती है। पहाड़ों पर फिलहाल हल्की बारिश हुई है लेकिन आगे अधिक बारिश की संभावना है। अगर, बारिश अधिक होती है तो गंगा का पानी संभाले नहीं संभलेगा। इसके लिए तैयारियां नहीं हैं। जो प्वाइंट संवेदनशील हैं उनको धन के अभाव में ऐसे ही छोड़ दिया गया है।
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पिछली बार पानी अधिक आ जाने के कारण गंगा में पथरामई काम को जहां के तहां छोड़ना पड़ा था और यही हाल रामगंगा के निशाने पर नवादा मधुकर में हुआ यहां भी बाढ़ खंड को काम पर विराम लगाना पड़ा। अब कहीं भी कोई बाढ़ बचाव का काम नहीं हो रहा है। निगरानी की बात की जा रही है। ऐसे में निगरानी से क्या होता है। जहां संवेदनशील बांध हैं, उनकी सुरक्षा होनी चाहिए।
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बाढ़ आने पर खतरनाक इलाके
गंगा किनारे-
1. गंगा-महावा तटबंध
टोंटपुर करसरी गांव के पास। यहां गंगा गत वर्ष भी अपना असर दिखा चुकी थी। गांव खाली कराना पड़ा था। अन्य कई गांवों को भी भारी नुकसान की संभावना है। इसी सीजन में गंगा ने भारी कटान किया।
2. चंदनपुर हुसैनपुर तटबंध
गांव खेड़ा हुसैनपुर पर गंगा मोड़ ले चुकी है। बांध की ओर पानी चल रहा है। कभी अधिक पानी आने पर बांध टूटने का खतरा है। कछला सहसवान रोड भी प्रभावित हो सकता है।
3. उसहैत बांध
उसहैत बांध पर पथरामई पर गंगा का पानी आ जाने के कारण बांध पर काम नहीं हो सका। बचाव कार्य अधूरा रह गया है। बाढ़ आती है तो बांध को खतरा है। ऐसे में बाढ़ खंड निराश नजर आ रहा है।
4. कछला के पास सरोता तटबंध पर खतरा
गंगा का रुख इस तरफ होने के कारण सरोता गांव के पास तटबंध खतरे में है। कभी भी पानी इधर आ सकता है। हालांकि इस पर कुछ काम कराकर ही बाढ़ खंड सुरक्षित मान रहा है। कासगंज जिला द्वारा नही खुदवा दिए जाने के कारण गंगा का रुख इधर हो गया है। जो खतरनाक बन गया है।


रामगंगा किनारे
रामगंगा किनारे नवादा मधुकर गांव को बचाने के लिए बाढ़ और कटान बचाव का काम किया जा रहा था। इससे अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। काफी प्रयासों के बाद कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा तो बाढ़ खंड विभाग ने काम को जहां के तहां छोड़ दिया है। नवादा मधुकर के अलावा चितरी, चंगासी गांव भी खतरे में हैं।
गंगा में छोड़े गए पानी की स्थिति
नरौरा डेम- 24,280 क्यूसेक   
बिजनौर डेम - 33,381 क्यूसेक
हरिद्वार डेम - 40,452 क्यूसेक
गंगा गेज मीटर पर- 162.350
रामगंगा गेज मीटर पर- 160.260

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