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Budaun News: दो पीढि़यों ने सियासी रसूख बनाया... तीसरी पीढ़ी ने रखा कायम

Sun, 07 Apr 2024 12:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2024 12:27 AM IST
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Two generations created political influence... the third generation maintained it
बदायूं। आज हम बात कर रहे हैं जिले के एक ऐसे राजनीतिक परिवार की जहां दो पीढ़ियों ने सियासी रसूख बनाया तो तीसरी पीढ़ी ने उसे कायम रखा। जब कभी पार्टी में उपेक्षा हाथ लगी तो प्रतिद्वंद्वी दल में अपनी धाक जमा ली, लेकिन अपना राजनीतिक वर्चस्व कम नहीं होने दिया। 1957 से 2024 तक राजनीतिक कई उतार-चढ़ाव के बीच अपनी सियासी साख बचाए रखी।
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पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधुचंद्रा के दादा केशोराम 1957 में कांग्रेस से पहली बार बिसौली सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद राजनीति में उनका कद बढ़ता रहा। वर्ष 1967 में परिसीमन आदेश पारित होने के बाद अस्तित्व में आए बिल्सी विधानसभा क्षेत्र से केशोराम 1980 से 1985 तक विधायक रहे। इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत बेटे भोलाशंकर मौर्या को सौंप दी।
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वर्ष 1985 में कांग्रेस ने भोलाशंकर पर भरोसा जताकर उन्हें मैदान में उतारा और इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 1989 में भोलाशंकर को जनता दल के दौलतराम से पराजय मिली, लेकिन अगले ही चुनाव यानी वर्ष 1991 में फिर भोलाशंकर मौर्य ने फिर वापसी की। जनता ने फिर एक बार जीत का सेहरा उनके सिर सजा दिया। वर्ष 1993 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार योगेंद्र सागर से भोलाशंकर हार गए। वर्ष 1997 में भोलाशंकर मौर्य ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया और फिर वह 1997 से 2002 तक बसपा से विधायक रहे।
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भोलाशंकर के निधन के बाद उनके बेटे आशुतोष मौर्या उर्फ राजू ने राजनीतिक विरासत संभाल ली। आशुतोष ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर 2002 में चुनाव लड़कर जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्हें बसपा के योगेंद्र सागर से हार का सामना करना पड़ा। बिल्सी सीट के अनारक्षित हो जाने पर वर्ष 2012 में आशुतोष अपनी पुश्तैनी सीट बिसौली के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने पर वहां से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

वर्ष 2017 में भाजपा प्रत्याशी कुशाग्र सागर ने आशुतोष से सीट छीन ली, लेकिन अगले ही चुनाव यानी वर्ष 2022 में आशुतोष मौर्या ने कुशाग्र को हराकर हिसाब बराबर कर लिया। वर्तमान में आशुतोष बिसौली सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, लेकिन बीते दिनों राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने के बाद से उनके भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। आशुतोष की बहन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चंद्रा और पत्नी बिल्सी नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष सुषमा मौर्या के भाजपा में शामिल हो जाने से यह तो साफ हो ही गया है कि लोकसभा चुनाव में आशुतोष भाजपा प्रत्याशी दुर्विजय शाक्य की ही मदद करेंगे।
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