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कटरी में लहलहाने लगी तंबाकू की फसल

Fri, 17 Mar 2017 12:06 AM IST
बदायूं, ब्यूरो
बदायूं, ब्यूरो Updated Fri, 17 Mar 2017 12:06 AM IST
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गेहूं और मटर के मुकाबले आमदनी भी अधिक 
 कैश क्राप की ओर बढ़ रहे किसानों में अब तंबाकू का एक और नाम जुड़ता जा रहा है। कभी दो-चार खेतों में तंबाकू उगाने वाले किसानों की संख्या में इजाफा हुआ तो इसमें कटरी का इलाका भी शामिल हो गया। गेहूं और मटर की फसल से अधिक आमदनी मुहैया कराने वाली तंबाकू की फसल के प्रति किसानों का रुझान बरकरार रहा तो उनकी आर्थिक खुशहाली का द्वार भी खुल जाएगा।
तंबाकू उत्पादन के रकबा को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के पास फिलहाल कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो चार-पांच साल से कछला, सहसवान, कादरचौक और उसहैत की कटरी से जुड़े गांवों के लोगों ने तंबाकू की खेती शुरू कर दी है। अमूमन सितंबर के लास्ट और अक्तूबर के पहले सप्ताह में तंबाकू की पौध की रोपाई की जाती है। करीब साढे़ तीन से चार महीना में पककर तैयार होने वाली तंबाकू की फसल को लेकर कटरी के गांव अल्लीपुर निवासी राजपाल कहते हैं कि उन्होंने पिछले साल से खेती शुरू की तो अच्छी पैदावार मिली। प्रति बीघा करीब 18 हजार रुपया तक की आमदनी हुई। यह गेहूं और मटर की फसल के मुकाबले अधिक थी। इसकी कई प्रजातियों पीटी-76, वैशाली स्पेशल और सोना विच्छवी भी शामिल हैं। इन प्रजातियों में निकोटिन की मात्रा भी अधिक पाई जाती है।
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धुआं देकर तैयार करते हैं पत्तियां
उझानी। तंबाकू की फसल पक कर तैयार होने के बाद उसकी मुलायम पत्तियों को इकट्ठा कर लिया जाता है। उन्हें धुआं भी लगाया जाता है। धुआं दिए जाने से पत्तियां पीली पड़ जाती है। बाद में उन्हें गैर नमी वाले स्थान पर सुरक्षित रख लिया जाता है। ताकि वह खराब नहीं हो सकें। पौधों के डंठल को भी सुखा लिया जाता है। हालांकि डंठल बिक जाते हैं लेकिन उनकी कीमत पत्तियों के मुकाबले काफी कम होती है।
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खुद आकर संपर्क साधते हैं खरीदार
उझानी। किसानों की मानें तो धुआं देकर तैयार तंबाकू की पत्तियों को खरीदने के लिए सिगरेट और बीड़ी बनाने वाली कंपनियों के साथ ऐसे लोग भी पहुंचते हैं जो उन्हें सीधे कच्चा माल मुहैया कराते हैं। तंबाकू का रेट उसकी ग्रेडिंग से तय होता है। जितना अच्छा माल कीमत भी उतनी ही अधिक मिलेगी। वैसे, राजस्थान और हरियाणा में खासकर हुक्का के लिए तंबाकू उपलब्ध कराने वाले थोक के व्यापारी भी इलाके में आकर किसानों के संपर्क में रहते हैं।

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तंबाकू की खेती की ओर पिछले सालों में जिस तेजी से रुझान बढ़ा है, उससे तो यही लगता है कि कटरी क्षेत्र में गन्ने के बाद यह प्रमुख फसल का रूप ले लेगी। कटरी से जुड़े इलाके की भौगोलिक स्थिति भी तंबाकू उत्पादन के अनुरूप है।- डॉ. अर्जुन सिंह, कृषि वैज्ञानिक
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