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प्रधान के पिता समेत तीन की मौत, 35 नए रोगी मिले
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बदायूं। डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों की जान भी जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू और बुखार से मौतों की बात स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सोमवार को भी जिले में डेंगू के 35 नए रोगी मिले। उझानी में प्रधान के पिता समेत दो की डेंगू, नगर पंचायत गुलड़िया में एक छात्रा की बुखार से मौत हुई है।
स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से सोमवार को जिले में 22 स्थानों पर कैंप लगाए गए। इस दौरान 800 से ज्यादा लोगों की जांच की गई। जांच में एक को मलेरिया और एक को फैल्सीपेरम की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही 327 बुखार पीड़ितों की एलाइजा जांच कराई गई। इनमें 35 लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें शहर में 17 व डहरपुर में दस रोगी मिले हैं। इसके साथ ही जिले में सक्रिय डेंगू रोगियों की संख्या बढ़कर 245 हो गई है। गंभीर बीमार 58 रोगियों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस बीच रविवार रात डेंगू से उझानी ब्लॉक के गांव कठौली गांव के प्रधान पंकज सक्सेना के पिता ओम प्रकाश सक्सेना की मौत हो गई। वह 72 वर्ष के थे। पंकज सक्सेना परिवार के साथ उझानी के मोहल्ला अहीरटोला में रहते हैं। ओमप्रकाश सक्सेना के बेटे संजीव सक्सेना ने बताया कि निजी लैब ने डेंगू की पुष्टि की थी।
डेंगू प्रभावित नगर पंचायत गुलाड़िया में वार्ड नंबर चार निवासी रामचंद्र सिंह की 23 वर्षीय बेटी प्रीति को पांच-छह दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले बरेली के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर रविवार रात बरेली से आगरा ले जा रहे थे। प्रीति ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वह एमएससी करने के बाद योग का कोर्स कर रही थी।
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निजी लैब की रिपोर्ट की अनदेखी पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच पर भरोसा करता है। दूसरी ओर निजी लैब बुखार पीड़ितों को धड़ल्ले से डेंगू की पुष्टि कर रही हैं। लगातार डेंगू और बुखार से मौतें भी हो रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू से मौतों की बात मानने को तैयार ही नहीं है। इसके साथ ही विभाग निजी लैबों की जांच रिपोर्ट को भी नकार रहा है। निजी लैब के साथ झोलाछापों पर भी अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। दरअसल, एक सितंबर से अब तक जिले में 4937 बुखार पीड़ितों की एलाइजा जांच हो सकी है। इनमें अब तक 327 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में डेंगू से अब तक एक ही मौत हुई है।
रोजगार सेवक की डेंगू से मौत
उसहैत के गांव करीमनगर में रोजगार सेवक की भी डेंगू से मौत हो गई। गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक राम सिंह के पुत्र सर्वेश सिंह रोजगार सेवक थे। उनको कई दिन से बुखार आ रहा था। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद परिवार वालों ने इलाज के लिए बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां इलाज के दौरान सोमवार को सर्वेश की मौत हो गई।
ज्यादा से ज्यादा लोगों की एलाइजा जांच कराई जा रही है। अवैध रूप से चलने वाली पैथोलॉजी लैबों और झोलाछाप के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। नगरीय क्षेत्र एमेत पांच ब्लॉकों के 76 गांवों और मोहल्लों में डेंगू के सक्रिय रोगी हैं। धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ
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स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से सोमवार को जिले में 22 स्थानों पर कैंप लगाए गए। इस दौरान 800 से ज्यादा लोगों की जांच की गई। जांच में एक को मलेरिया और एक को फैल्सीपेरम की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही 327 बुखार पीड़ितों की एलाइजा जांच कराई गई। इनमें 35 लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें शहर में 17 व डहरपुर में दस रोगी मिले हैं। इसके साथ ही जिले में सक्रिय डेंगू रोगियों की संख्या बढ़कर 245 हो गई है। गंभीर बीमार 58 रोगियों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इस बीच रविवार रात डेंगू से उझानी ब्लॉक के गांव कठौली गांव के प्रधान पंकज सक्सेना के पिता ओम प्रकाश सक्सेना की मौत हो गई। वह 72 वर्ष के थे। पंकज सक्सेना परिवार के साथ उझानी के मोहल्ला अहीरटोला में रहते हैं। ओमप्रकाश सक्सेना के बेटे संजीव सक्सेना ने बताया कि निजी लैब ने डेंगू की पुष्टि की थी।
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डेंगू प्रभावित नगर पंचायत गुलाड़िया में वार्ड नंबर चार निवासी रामचंद्र सिंह की 23 वर्षीय बेटी प्रीति को पांच-छह दिन से बुखार आ रहा था। परिवार वाले बरेली के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। हालत में सुधार न होने पर रविवार रात बरेली से आगरा ले जा रहे थे। प्रीति ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वह एमएससी करने के बाद योग का कोर्स कर रही थी।
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निजी लैब की रिपोर्ट की अनदेखी पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि के लिए सिर्फ एलाइजा जांच पर भरोसा करता है। दूसरी ओर निजी लैब बुखार पीड़ितों को धड़ल्ले से डेंगू की पुष्टि कर रही हैं। लगातार डेंगू और बुखार से मौतें भी हो रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग डेंगू से मौतों की बात मानने को तैयार ही नहीं है। इसके साथ ही विभाग निजी लैबों की जांच रिपोर्ट को भी नकार रहा है। निजी लैब के साथ झोलाछापों पर भी अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। दरअसल, एक सितंबर से अब तक जिले में 4937 बुखार पीड़ितों की एलाइजा जांच हो सकी है। इनमें अब तक 327 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में डेंगू से अब तक एक ही मौत हुई है।
रोजगार सेवक की डेंगू से मौत
उसहैत के गांव करीमनगर में रोजगार सेवक की भी डेंगू से मौत हो गई। गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक राम सिंह के पुत्र सर्वेश सिंह रोजगार सेवक थे। उनको कई दिन से बुखार आ रहा था। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद परिवार वालों ने इलाज के लिए बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां इलाज के दौरान सोमवार को सर्वेश की मौत हो गई।
ज्यादा से ज्यादा लोगों की एलाइजा जांच कराई जा रही है। अवैध रूप से चलने वाली पैथोलॉजी लैबों और झोलाछाप के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। नगरीय क्षेत्र एमेत पांच ब्लॉकों के 76 गांवों और मोहल्लों में डेंगू के सक्रिय रोगी हैं। धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं।
- डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर, सीएमओ