{"_id":"61eeecd72869a026247e43ff","slug":"thousands-of-bees-died-in-cold-big-loss-of-honey-business-badaun-news-bly473512428","type":"story","status":"publish","title_hn":"ठंड में हजारों मधुमक्खियां मरीं, शहद कारोबार का नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ठंड में हजारों मधुमक्खियां मरीं, शहद कारोबार का नुकसान
विज्ञापन
डिब्बे से निकलतीं मधुमक्खियां। संवाद
- फोटो : BADAUN
कादरचौक (बदायूं)। 20 दिन से लगातार खराब चल रहे मौसम का शहद कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है। मौसम खराब होने और ठंड के कारण मधुमक्खियां डिब्बों से बाहर नहीं निकल रहीं हैं। हजारों मधुमक्खियां मर भी र्गइं हैं।
कादरचौक ब्लॉक में बेहटा डंबर नगर व मुहम्मदगंज में शहद का बड़ा करोबार होता है। दूरदराज के व्यापारी यहां शहद खरीदने आते हैं। यहां से शहद कई कंपनियों को सीधे भी भेजा जाता है।
यहां बता दें कि दोनों गांवों में लगभग 15 हजार मधुमक्खियों के डिब्बे हैं। इनमें लाखों मधुमक्खियां शहद बनाती हैं। मौसम की खराबी के कारण मधुमक्खियां डिब्बे से बाहर नहीं निकल रहीं हैं। डिब्बों में जो शहद था, उसी को खाकर जिंदा हैं। यही नहीं जिन डिब्बों में शहद नहीं है उनमें शहद का कारोबार करने वालों को मक्खियां जिंदा रखने के लिए काफी मात्रा में चीनी डालनी पड़ रही है, बावजूद इसके हजारों की संख्या में मधुमक्खियां मर भी गईं हैं। इससे शहद का कारोबार करने वालों को काफी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
शहद का कारोबार करने वाले शमशाद ने बताया कि अगर 20 दिन में दो बार शहद निकाला जाता तो पंद्रह हजार बॉक्स से हजारों टिन शहद निकलता। ठंड के कारण मक्खियां के डिब्बों से बाहर नहीं निकलने और उनके मर जाने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
शमशाद ने कहा कि मधुमक्खियां इतनी तेजी से ठंड की चपेट में आईं कि रानी मक्खी बचाना भी मुश्किल हो गया।
शहद कारोबारी पिंटू गुप्ता ने कहा कि शहद के कारोबारी मौसम की मार से काफी परेशान है। बहुत नुकसान हुआ है। कोई सरकारी अनुदान नहीं मिल पाता है।
सकरे आलम ने बताया कि कभी खराब मौसम तो कभी उचित मूल्य न मिल पाने से कारोबार घाटे में जाता है। सरकारी विभागों ने कोई प्रोत्साहन नहीं दिया। मक्खियां मरने पर बड़ा नुकसान हुआ है।
-
फोटो- 49
सर्दी के मौसम में मधुमक्खियों को बचाने के लिए अधिकतर शहद कारोबारी नवंबर में ही अपने डिब्बे गर्म स्थान वाले शहरों खासकर दक्षिण भारत में ले जाते हैं और फरवरी में इधर लाते हैं। स्थानीय स्तर पर धुआं देकर भी मधुमक्खियों को मरने से बचाया जा सकता है। मधुमक्खी पालकों को हरसंभव उपाय करके इन्हें बचाना चाहिए।
- पूजा, मंडलीय निदेशक उद्यान विभाग
विज्ञापन
कादरचौक ब्लॉक में बेहटा डंबर नगर व मुहम्मदगंज में शहद का बड़ा करोबार होता है। दूरदराज के व्यापारी यहां शहद खरीदने आते हैं। यहां से शहद कई कंपनियों को सीधे भी भेजा जाता है।
विज्ञापन
यहां बता दें कि दोनों गांवों में लगभग 15 हजार मधुमक्खियों के डिब्बे हैं। इनमें लाखों मधुमक्खियां शहद बनाती हैं। मौसम की खराबी के कारण मधुमक्खियां डिब्बे से बाहर नहीं निकल रहीं हैं। डिब्बों में जो शहद था, उसी को खाकर जिंदा हैं। यही नहीं जिन डिब्बों में शहद नहीं है उनमें शहद का कारोबार करने वालों को मक्खियां जिंदा रखने के लिए काफी मात्रा में चीनी डालनी पड़ रही है, बावजूद इसके हजारों की संख्या में मधुमक्खियां मर भी गईं हैं। इससे शहद का कारोबार करने वालों को काफी नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
शहद का कारोबार करने वाले शमशाद ने बताया कि अगर 20 दिन में दो बार शहद निकाला जाता तो पंद्रह हजार बॉक्स से हजारों टिन शहद निकलता। ठंड के कारण मक्खियां के डिब्बों से बाहर नहीं निकलने और उनके मर जाने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
शमशाद ने कहा कि मधुमक्खियां इतनी तेजी से ठंड की चपेट में आईं कि रानी मक्खी बचाना भी मुश्किल हो गया।
शहद कारोबारी पिंटू गुप्ता ने कहा कि शहद के कारोबारी मौसम की मार से काफी परेशान है। बहुत नुकसान हुआ है। कोई सरकारी अनुदान नहीं मिल पाता है।
सकरे आलम ने बताया कि कभी खराब मौसम तो कभी उचित मूल्य न मिल पाने से कारोबार घाटे में जाता है। सरकारी विभागों ने कोई प्रोत्साहन नहीं दिया। मक्खियां मरने पर बड़ा नुकसान हुआ है।
-
फोटो- 49
सर्दी के मौसम में मधुमक्खियों को बचाने के लिए अधिकतर शहद कारोबारी नवंबर में ही अपने डिब्बे गर्म स्थान वाले शहरों खासकर दक्षिण भारत में ले जाते हैं और फरवरी में इधर लाते हैं। स्थानीय स्तर पर धुआं देकर भी मधुमक्खियों को मरने से बचाया जा सकता है। मधुमक्खी पालकों को हरसंभव उपाय करके इन्हें बचाना चाहिए।
- पूजा, मंडलीय निदेशक उद्यान विभाग

नामांकन ः जिला कारागार के पास पुलिस ने लगाया बैरियर। संवाद- फोटो : BADAUN