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Budaun News: निर्माणाधीन दीवार से गिरे मजदूर की फिर हालत बिगड़ने से मौत
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हीरालाल की फाइल फोटो
उझानी। चार सितंबर को भवन निर्माण के दौरान दीवार से गिरे मजदूर की सैफई मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होकर घर लौटने पर हालत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।
हादसा कृष्णा कॉलोनी में चार सितंबर को हुआ था। मृतक हीरालाल मौर्य (32) पुत्र चंद्रपाल कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दुल्लागंज के निवासी थे। उनके छोटे भाई योगेंद्र ने पुलिस को बताया कि निर्माणाधीन भवन के मालिक ने ही उन्हें हादसे के बारे में जानकारी दी थी। शुरू के पांच-छह दिन तक हीरालाल का निजी अस्पतालों में इलाज चला। इसके बाद उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया।
सैफई में दो दिन इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। सोमवार की शाम को उनकी अचानक ही फिर हालत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हीरालाल के शव का मंगलवार दोपहर पोस्टमॉर्टम कराया। इसके बाद शव उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
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सीओ राहुल पांडेय ने बताया कि मृतक के परिजनों की शिकायत के बाद हादसे की वजह की जांच कराई जा रही है। पुलिस को मृतक के परिजनों की ओर से तहरीर भी नहीं मिली है।
तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का भी साया
मजदूर हीरालाल मौर्य की मौत के बाद से परिवार के लोग बदहवास हैं। मृतक के भाई योगेंद्र ने बताया कि करीब नौ महीने पहले हीरालाल की पत्नी गीता की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। उनकी तीन संतानों में सबसे बड़ी बेटी स्वाति नौ साल की तो उससे छोटा आठ साल का बेटा नितिन है। मासूम दो वर्षीय छोटी बेटी आयुषी को तो पिता का साया उठ जाने का भी अहसास नहीं है। तीनों बच्चों की परवरिश को लेकर योगेंद्र ने कहा कि अब परिवार के लोग ही बच्चों का सहारा बनेंगे।
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हादसा कृष्णा कॉलोनी में चार सितंबर को हुआ था। मृतक हीरालाल मौर्य (32) पुत्र चंद्रपाल कोतवाली क्षेत्र के गांव अब्दुल्लागंज के निवासी थे। उनके छोटे भाई योगेंद्र ने पुलिस को बताया कि निर्माणाधीन भवन के मालिक ने ही उन्हें हादसे के बारे में जानकारी दी थी। शुरू के पांच-छह दिन तक हीरालाल का निजी अस्पतालों में इलाज चला। इसके बाद उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया।
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सैफई में दो दिन इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। सोमवार की शाम को उनकी अचानक ही फिर हालत बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे। इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने हीरालाल के शव का मंगलवार दोपहर पोस्टमॉर्टम कराया। इसके बाद शव उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
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सीओ राहुल पांडेय ने बताया कि मृतक के परिजनों की शिकायत के बाद हादसे की वजह की जांच कराई जा रही है। पुलिस को मृतक के परिजनों की ओर से तहरीर भी नहीं मिली है।
तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का भी साया
मजदूर हीरालाल मौर्य की मौत के बाद से परिवार के लोग बदहवास हैं। मृतक के भाई योगेंद्र ने बताया कि करीब नौ महीने पहले हीरालाल की पत्नी गीता की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी। उनकी तीन संतानों में सबसे बड़ी बेटी स्वाति नौ साल की तो उससे छोटा आठ साल का बेटा नितिन है। मासूम दो वर्षीय छोटी बेटी आयुषी को तो पिता का साया उठ जाने का भी अहसास नहीं है। तीनों बच्चों की परवरिश को लेकर योगेंद्र ने कहा कि अब परिवार के लोग ही बच्चों का सहारा बनेंगे।