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Budaun News: शहर में नहीं कोई ट्रैफिक प्लान, परेशान हो रहे लोग
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कलक्ट्रेट तिराहे के पास लगे जाम में फंसी एंबुलेंस। संवाद
बदायूं। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। आलम यह है कि पांच मिनट का सफर 20-25 मिनट में तय करना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह है कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए जिम्मेदारों की तरफ से कोई पहल नहीं की गई। ई-रिक्शा व डग्गामार वाहनों की भरमार और इनके लिए कोई रूट तय न होने से शहर में जाम लग रहा है। रविवार को भी शहर के कई हिस्से जाम की चपेट में रहे। इसी के साथ संडे बाजार की वजह से लावेला चौक से नई सराय पुलिस चौकी तक रुक-रुककर जाम लगता रहा, जिससे लोग परेशान रहे।
शहर में नवादा से लेकर पुलिस लाइन चौराहे तक सबसे बुरा हाल है। पुरानी चुंगी से पुलिस लाइन तक रात के समय में आने में महज पांच से सात मिनट का समय लगता है, लेकिन यहां दिन के समय में आने में 20 से 25 मिनट का समय लग जाता है। यहां हाईवे के नाम पर सड़क महज सात मीटर चौड़ी है।
सड़क पर कहीं भी डिवाइडर नहीं बनाए गए हैं। ई-रिक्शा व अन्य वाहन आड़े-तिरछे फंसने पर यहां जाम लग जाता है। करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन रोजाना इस सड़क से होकर गुजरते हैं। बरेली-मथुरा हाईवे के अलावा मुरादाबाद-मुजफ्फरनगर हाईवे होने के कारण इस सड़क पर वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। वाहनों का दबाव होने के कारण ही करीब तीन किलोमीटर की सड़क पर करीब चार जगह यातायात पुलिस तैनात रहती है। पुलिस लाइन चौराहे, दातागंज तिराहे, पुरानी चुंगी व नवादा चौकी पर पुलिस तैनात रहती है।
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चार हजार ई-रिक्शा बिगाड़ रहे व्यवस्था
शहर में करीब चार हजार ऑटो व ई-रिक्शा हैं, जिनका कोई रूट निर्धारित नहीं है। यही कारण है कि शहर में कहीं भी ई-रिक्शा घुस जाते हैं। मीरा की सराय, सुभाष चौक, छह सड़का आदि भीड़ वाले स्थानों पर इन ई-रिक्शा की वजह से रोजाना जाम लग रहा है। यातायात पुलिस अब तक शहर में ई-रिक्शा के लिए रूट तय नहीं कर सकी है। लोगों का कहना है कि अगर ई-रिक्शा के आने व जाने के लिए सड़कें निर्धारित कर दीं जाएं तो शहर का यातायात सुगम हो सकता है।
शहर के अंदर से गुजर रहीं 300 से ज्यादा रोडवेज बसें
बदायूं डिपो के पास करीब 180 बसें हैं। इसके अलावा दूसरे डिपो की दिन में करीब 100-150 बसें यहां से होकर गुजरती हैं। ये बसें शहर के अंदर से होकर ही गुजरती है। दीपावली के समय डीएम ने बसों के शहर में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह व्यवस्था एक-डेढ़ महीने ही चली। अब बसें फिर से लालपुल, इस्लामिया रोड, कलक्ट्रेट तिराहे से जिला अस्पताल गेट होते हुए रोडवेज बस अड्डे तक पहुंच रहीं हैं। इससे रोजाना जाम लगता है।
नो इंट्री का सख्ती से पालन कराएंगे : टीएसआई
टीएसआई आरएल राजपूत का कहना है कि ई-रिक्शा की वजह से शहर में जाम न लगे, इसके लिए कई रूट पर नो इंट्री लगाई गई है। यहां पुलिस कर्मी भी तैनात किए गए हैं। पुलिस लाइन चौराहे से रोडवेज की तरफ, हाथी पार्क से कचहरी की तरफ, छह सड़का से रोडवेज की तरफ नो इंट्री लगाई गई है। यहां पुलिसकर्मी भी तैनात है। नियम का पालन न करने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं।
संडे बाजार के कारण भी लग रहा जाम
गांधी ग्राउंड में लगने वाली संडे बाजार में दुकानदार सड़क पर सामान रखकर बेचते हैं। इसी वजह से जाम लग जा रहा है। इस ओर कोई देखने वाला ही नहीं है। यहां बता दें कि संडे बाजार की अनुमति केवल गांधी ग्राउंड परिसर में ही दुकानें लगाने की है, बावजूद इसके हो उलट रहा है।
शहर के लिए ट्रैफिक प्लान बनाएं : डॉ. सचिन
रामलीला मैदान के पास रहने वाले डॉ. सचिन का कहना है कि शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। कार लेकर जाओ तो महज चार-पांच किलोमीटर हिस्सा चलने में ही 20 से 25 मिनट लग जाते हैं। सड़कों के हिसाब से यहां वाहनों के आने-जाने की व्यवस्था की जाए।
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शहर में नवादा से लेकर पुलिस लाइन चौराहे तक सबसे बुरा हाल है। पुरानी चुंगी से पुलिस लाइन तक रात के समय में आने में महज पांच से सात मिनट का समय लगता है, लेकिन यहां दिन के समय में आने में 20 से 25 मिनट का समय लग जाता है। यहां हाईवे के नाम पर सड़क महज सात मीटर चौड़ी है।
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सड़क पर कहीं भी डिवाइडर नहीं बनाए गए हैं। ई-रिक्शा व अन्य वाहन आड़े-तिरछे फंसने पर यहां जाम लग जाता है। करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन रोजाना इस सड़क से होकर गुजरते हैं। बरेली-मथुरा हाईवे के अलावा मुरादाबाद-मुजफ्फरनगर हाईवे होने के कारण इस सड़क पर वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। वाहनों का दबाव होने के कारण ही करीब तीन किलोमीटर की सड़क पर करीब चार जगह यातायात पुलिस तैनात रहती है। पुलिस लाइन चौराहे, दातागंज तिराहे, पुरानी चुंगी व नवादा चौकी पर पुलिस तैनात रहती है।
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चार हजार ई-रिक्शा बिगाड़ रहे व्यवस्था
शहर में करीब चार हजार ऑटो व ई-रिक्शा हैं, जिनका कोई रूट निर्धारित नहीं है। यही कारण है कि शहर में कहीं भी ई-रिक्शा घुस जाते हैं। मीरा की सराय, सुभाष चौक, छह सड़का आदि भीड़ वाले स्थानों पर इन ई-रिक्शा की वजह से रोजाना जाम लग रहा है। यातायात पुलिस अब तक शहर में ई-रिक्शा के लिए रूट तय नहीं कर सकी है। लोगों का कहना है कि अगर ई-रिक्शा के आने व जाने के लिए सड़कें निर्धारित कर दीं जाएं तो शहर का यातायात सुगम हो सकता है।
शहर के अंदर से गुजर रहीं 300 से ज्यादा रोडवेज बसें
बदायूं डिपो के पास करीब 180 बसें हैं। इसके अलावा दूसरे डिपो की दिन में करीब 100-150 बसें यहां से होकर गुजरती हैं। ये बसें शहर के अंदर से होकर ही गुजरती है। दीपावली के समय डीएम ने बसों के शहर में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन यह व्यवस्था एक-डेढ़ महीने ही चली। अब बसें फिर से लालपुल, इस्लामिया रोड, कलक्ट्रेट तिराहे से जिला अस्पताल गेट होते हुए रोडवेज बस अड्डे तक पहुंच रहीं हैं। इससे रोजाना जाम लगता है।
नो इंट्री का सख्ती से पालन कराएंगे : टीएसआई
टीएसआई आरएल राजपूत का कहना है कि ई-रिक्शा की वजह से शहर में जाम न लगे, इसके लिए कई रूट पर नो इंट्री लगाई गई है। यहां पुलिस कर्मी भी तैनात किए गए हैं। पुलिस लाइन चौराहे से रोडवेज की तरफ, हाथी पार्क से कचहरी की तरफ, छह सड़का से रोडवेज की तरफ नो इंट्री लगाई गई है। यहां पुलिसकर्मी भी तैनात है। नियम का पालन न करने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं।
संडे बाजार के कारण भी लग रहा जाम
गांधी ग्राउंड में लगने वाली संडे बाजार में दुकानदार सड़क पर सामान रखकर बेचते हैं। इसी वजह से जाम लग जा रहा है। इस ओर कोई देखने वाला ही नहीं है। यहां बता दें कि संडे बाजार की अनुमति केवल गांधी ग्राउंड परिसर में ही दुकानें लगाने की है, बावजूद इसके हो उलट रहा है।
शहर के लिए ट्रैफिक प्लान बनाएं : डॉ. सचिन
रामलीला मैदान के पास रहने वाले डॉ. सचिन का कहना है कि शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। कार लेकर जाओ तो महज चार-पांच किलोमीटर हिस्सा चलने में ही 20 से 25 मिनट लग जाते हैं। सड़कों के हिसाब से यहां वाहनों के आने-जाने की व्यवस्था की जाए।

कलक्ट्रेट तिराहे के पास लगे जाम में फंसी एंबुलेंस। संवाद

कलक्ट्रेट तिराहे के पास लगे जाम में फंसी एंबुलेंस। संवाद