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Budaun News: गोदाम से पटाखों का सच नहीं आया बाहर, कारोबारी को क्लीनचिट

Mon, 06 Nov 2023 12:36 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Updated Mon, 06 Nov 2023 12:36 AM IST
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The truth about firecrackers did not come out from the warehouse, clean chit to the businessman
उझानी। आतिशबाजी के थोक कारोबारियों के प्रतिष्ठान और एक गोदाम पर पुलिस और एसओजी की संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई के बाद दूसरे दिन भी गोदाम से पटाखों का सच बाहर नहीं आ पाया। कार्रवाई के दौरान शनिवार दोपहर पुलिस ने हालांकि कुछ नहीं मिलने का दावा किया था, लेकिन अंदर भारी मात्रा में पटाखे होने के शोर के बीच दूसरे दिन गोदाम में रखे पटाखों के मालिक को यह कहकर क्लीनचिट दे दी गई कि कारोबारी के पास 500 किलोग्राम आतिशबाजी रखने का लाइसेंस है।
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छापामार कार्रवाई के बाद दूसरे दिन रविवार को भी थोक के पटाखा कारोबारियों में हकीकत सामने आ जाने का डर बना हुआ है। शनिवार दोपहर एसओजी और कोतवाली पुलिस ने एक थोक कारोबारी के संजरपुर रोड स्थित प्रतिष्ठान पर छापा मारा था। इसके बाद पुलिस को उसके गोदाम के बारे में पता लगा तो उसकी घेराबंदी करके गेट खुलवाया गया था। गोदाम प्रतिष्ठान से काफी दूर था। पुलिस और एसओजी ने गोदाम का मुख्य द्वार अंदर से बंद करके जांच की थी। इसके बाद प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह और एसओजी प्रभारी धर्वेंद्र सिंह ने अंदर कुछ खास नहीं मिलने का संकेत दे दिया था।
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उसी दौरान सीएफओ रामराजा यादव ने सुरक्षा के इंतजाम जांचे। सुरक्षा के सभी इंतजामों पर गौर करने के लिए वह अग्निशमन विभाग की टीम के साथ तीनों थोक कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर गए। बताते हैं कि गोदाम के अंदर पटाखे थे। पटाखों का भंडारण करने के लिए गोदाम का उल्लेख लाइसेंस में नहीं है। थोक के जिस कारोबारी के गोदाम में पटाखे थे, उसके पास 500 किलोग्राम का लाइसेंस भी है। इसी आधार पर पुलिस ने कारोबारी को क्लीनचिट दे दी गई है।
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प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जब गोदाम में कुछ खास मिला ही नहीं, तो कार्रवाई किस आधार पर की जा सकती है। क्लीनचिट मिलने के बाद से थोक के तीनों कारोबारियों ने राहत महसूस की है।



आबादी के पास बिक्री पर नहीं किया गौर : दीपावली से पहले आतिशबाजी का थोक कारोबार आबादी के पास होने की बात सामने आई थी। करोबारियों के जहां प्रतिष्ठान हैं, उसके आसपास घर बन चुके हैं। घरों में लोग रहते भी हैं। पिछले सालों में कारोबारियों को इन स्थानों पर आतिशबाजी की दुकानें चलाने का लाइसेंस मिला था, तब आसपास आबादी नहीं थी।
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