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Budaun News: नेता के भाई ने हाईजैक कर लिया था प्लांट, गुर्गों ने फैला दी थी अराजकता

Tue, 17 Mar 2026 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:28 AM IST
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The politician's brother had hijacked the plant, and his henchmen had unleashed chaos.
बदायूं। इलाके के एक नेता की शह पर उनके भाई ने कंपनी के प्लांट को गुर्गों के जरिये हाईजैक कर रखा था। प्लांट में न तो स्थानीय स्तर पर माल की आपूर्ति हो पा रही थी और न ही कामगार ढंग से काम कर रहे थे। व्यवस्था बेपटरी कर दी गई, जिसे दुरुस्त करने की कोशिश में दोनों अफसरों की जान चली गई।
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मूसाझाग के सैजनी में बनाए गए इस प्लांट का श्रेय तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह को जाता है। इसके साथ ही इलाके के नेताओं ने भी प्लांट स्थापना का श्रेय लेने की कोशिश की थी। 27 जनवरी 2024 को प्लांट शुरू हुआ तो डीजीएम मृगांक सिन्हा थे। बताते हैं कि उस दौरान स्थानीय नौजवानों को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन इसके लिए सूची एक नेता के भाई के पास से आती थी। अजय के परिवार के ही करीब दस लोगों को रोजगार दिया गया। इन लोगों को जरूरत से ज्यादा पगार दी जाती थी।
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सूत्र बताते हैं कि नेता के घर काम करने वाले माली, नौकरों से लेकर ड्राइवरों तक की तैनाती कागजों में प्लांट में चल रही थी। वह कंपनी से पगार पाने के साथ ही काम नेता व उसके भाई के घर पर किया करते थे। एक पार्टी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के नाम भी कर्मचारी बतौर दर्ज होने की बात कंपनी सूत्रों से सामने आई है। धान की खेती सीमित होने से पराली स्थानीय स्तर पर बेहद कम मिल रही थी तो प्लांट संचालन में दिक्कत आ रही थी।
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ऐसे में पंजाब, शाहजहांपुर व पीलीभीत से पराली मंगाकर बॉयो गैस बनाना काफी महंगा पड़ रहा था। ऊपर से कर्मचारियों की हठधर्मिता हावी थी। इससे परेशान होकर सुधीर गुप्ता ने वीआरएस लेने के लिए आवेदन कर दिया था। इस महीने के अंत में उनका नौकरी छोड़ना तय था। हर्षित ने भी सुधीर गुप्ता की तरह प्लांट की व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए मेहनत की, लेकिन सफल नहीं हो सके। नतीजा दोनों की मौत के रूप में सामने आया।



हत्यारोपी की मां है कोटेदार, करीबी को बनाया प्रधान

शाहजहांपुर से आए दबंग परिवार ने सैजनी में बसने के बाद यहां भी बादशाहत कायम कर ली थी। अजय और उसके परिवार ने हथियारों के दम पर इलाके में दहशत फैलाई और जिला पंचायत सदस्य पद से लेकर प्रधानी तक हासिल कर ली। अजय के ताऊ गांव के प्रधान और तहेरा भाई जिपं सदस्य रह चुके हैं। अजय ने अपनी मां को कोटेदार बना रखा है। गांव के कुछ खास लोगों को छोड़कर बाकी को दो महीने बाद एक महीने का राशन मिलने की बात अमर उजाला की पड़ताल में सामने आई। बताते हैं कि कोटे में भी नेता के भाई को चौथ (हिस्सेदारी) देने की परंपरा निभाई जा रही थी। इसके बाद किसी तरह की शिकायत पर जांच या कार्रवाई नहीं होती थी। सामान्य के बाद पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आवंटित हुई तो अजय ने अपने बेहद करीबी शख्स को प्रधान बनवा दिया।
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