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Budaun News: धक्का देने से खुलती है लिफ्ट, वाटर कूलर खराब
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मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद
बदायूं। राजकीय मेडिकल काॅलेज जगह-जगह गंदगी फैली है। मरीजों की सुविधा के लिए लगी एक लिफ्ट काफी समय से बंद है। दूसरी लिफ्ट को धक्का देकर बंद करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को सीढि़यों से चढ़ना पड़ता है। कई जगह सीलिंग उखड़ गई है। तार भी खुल गए हैं।
मेडिकल कॉलेज के भूतल से चौथी मंजिल तक छत के तार खुले लटके हुए हैं। किसी मरीज के ऊपर गिर जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल में लगी एक लिफ्ट लंबे समय से बंद है। दूसरी लिफ्ट को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने भूतल से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए बटन दबाई। करीब 10 मिनट तक वह खड़ा रहा, लेकिन लिफ्ट नहीं खुली। इस दौरान उसने धक्का देकर खोलने का प्रयास किया, लेकिन लिफ्ट नहीं खुली। फिर मरीज को सीढि़यां के सहारे तीसरी मंजिल पर ले गया। कुछ देर बाद दूसरे लोगों ने धक्का दिया तो खुल गई। कई मरीजों ने इसकी शिकायत की लेकिन उसे ठीक नहीं कराया जा रहा है। सभी मंजिल की गैलरी में अंधेरा छाया रहता है।
कॉलेज के पीछे रास्ते में बनी रैंप में जगह-जगह गंदगी के ढेर है और गंदा पानी जमा हुआ था। अस्थि रोग वार्ड के बाहर रखे दो कूलर खराब हैं। यहां के मरीजों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। यही समस्या मेडिसिन वार्ड, स्त्री रोग प्रसूता विभाग में भी है। यहां के भी मरीजों को पानी के लिए भूतल में जाना पड़ता है। इस मामले में प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार का पक्ष जानने के लिए तीन बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने उठाया नहीं।
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बंदरों से मरीज परेशान
कॉलेज के पीछे के रास्ते में बंदरों की भीड़ रहती है। शुक्रवार को एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कूड़ा गाड़ी लेकर रैंप के सहारे जा रहा था। उस दौरान बंदरों ने उसे खदेड़ लिया। वह चिल्लाता हुआ नीचे भागा और डंडा लेकर गया तो बंदरों को भगाया।
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खुद स्ट्रेचर से खींचकर ले जाते मरीज
मेडिकल कॉलेज में वार्ड ब्वॉय की बड़ी टीम है। इसके बावजूद मरीज को स्ट्रेचर में लिटाकर रैंप से तीमारदार ही वार्ड तक ले जाते हैं और वही बेड पर लिटाते हैं। यह सभी गतिविधियां वरिष्ठ डॉक्टरों के सामने होती हैं, फिर भी सुधार नहीं हो रहा है।
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गंदे पानी से बर्तन धोते तीमारदार, शौचालय भी गंदे
शुक्रवार को तीमारदार मजबूरी में गंदे पानी में बर्तन धोते नजर आए। लोगों का कहना है कि शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है।
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फोटो-21
केस एक
वार्ड में पानी की व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए भूतल पर जाना पड़ता है। वहां भी पानी ठंडा नहीं रहता है। इस वजह से बाहर से पानी खरीदने को मजबूर है। - अहमद, चांदपुर
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फोटो-22
केस दो
- भूतल को छोड़कर किसी भी मंजिल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी में पानी की मांग ज्यादा है। इसके बाद भी कॉलेज के अधिकारी इस पर गंभीर नहीं हैं। - सुरेश, पिपर खगनार
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मेडिकल कॉलेज के भूतल से चौथी मंजिल तक छत के तार खुले लटके हुए हैं। किसी मरीज के ऊपर गिर जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल में लगी एक लिफ्ट लंबे समय से बंद है। दूसरी लिफ्ट को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने भूतल से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए बटन दबाई। करीब 10 मिनट तक वह खड़ा रहा, लेकिन लिफ्ट नहीं खुली। इस दौरान उसने धक्का देकर खोलने का प्रयास किया, लेकिन लिफ्ट नहीं खुली। फिर मरीज को सीढि़यां के सहारे तीसरी मंजिल पर ले गया। कुछ देर बाद दूसरे लोगों ने धक्का दिया तो खुल गई। कई मरीजों ने इसकी शिकायत की लेकिन उसे ठीक नहीं कराया जा रहा है। सभी मंजिल की गैलरी में अंधेरा छाया रहता है।
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कॉलेज के पीछे रास्ते में बनी रैंप में जगह-जगह गंदगी के ढेर है और गंदा पानी जमा हुआ था। अस्थि रोग वार्ड के बाहर रखे दो कूलर खराब हैं। यहां के मरीजों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। यही समस्या मेडिसिन वार्ड, स्त्री रोग प्रसूता विभाग में भी है। यहां के भी मरीजों को पानी के लिए भूतल में जाना पड़ता है। इस मामले में प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार का पक्ष जानने के लिए तीन बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने उठाया नहीं।
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बंदरों से मरीज परेशान
कॉलेज के पीछे के रास्ते में बंदरों की भीड़ रहती है। शुक्रवार को एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कूड़ा गाड़ी लेकर रैंप के सहारे जा रहा था। उस दौरान बंदरों ने उसे खदेड़ लिया। वह चिल्लाता हुआ नीचे भागा और डंडा लेकर गया तो बंदरों को भगाया।
खुद स्ट्रेचर से खींचकर ले जाते मरीज
मेडिकल कॉलेज में वार्ड ब्वॉय की बड़ी टीम है। इसके बावजूद मरीज को स्ट्रेचर में लिटाकर रैंप से तीमारदार ही वार्ड तक ले जाते हैं और वही बेड पर लिटाते हैं। यह सभी गतिविधियां वरिष्ठ डॉक्टरों के सामने होती हैं, फिर भी सुधार नहीं हो रहा है।
गंदे पानी से बर्तन धोते तीमारदार, शौचालय भी गंदे
शुक्रवार को तीमारदार मजबूरी में गंदे पानी में बर्तन धोते नजर आए। लोगों का कहना है कि शौचालय की स्थिति भी बेहद खराब है। शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है।
फोटो-21
केस एक
वार्ड में पानी की व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए भूतल पर जाना पड़ता है। वहां भी पानी ठंडा नहीं रहता है। इस वजह से बाहर से पानी खरीदने को मजबूर है। - अहमद, चांदपुर
फोटो-22
केस दो
- भूतल को छोड़कर किसी भी मंजिल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी में पानी की मांग ज्यादा है। इसके बाद भी कॉलेज के अधिकारी इस पर गंभीर नहीं हैं। - सुरेश, पिपर खगनार

मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद

मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद

मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद

मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद

मेडिकल कॉलेज में व्हीलचेयर पर मरीज को ले जाते तीमारदार। संवाद