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Budaun News: दुनिया में आने वाले उस मासूम को भी अदालत के फैसले से मिला न्याय

Sat, 25 May 2024 05:27 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2024 05:27 AM IST
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That innocent child who came into this world also got justice through the court's decision.
बदायूं। बेटा है या बेटी, यह देखने के लिए पन्नालाल ने मेरी बहन का पेट न फाड़ा होता तो मेरा भांजा दुनिया में होता। यह बात पत्नी का पेट फाड़ने में दोषी पाए गए पन्नालाल के सगे साले रवि ने कही। वीभत्स हमले का संदर्भ देकर उसने वर्तमान के हालात भी बयां किए।
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रवि ने बताया कि आठवें महीने में 19 सितंबर को शाम चार बजे अचानक बहनोई ने यह कहते हुए बहन के हंसिये से पेट चीर दिया कि वह देखना चाहता है कि पेट में बालक है या बालिका। बहन की आंतें बाहर आ गईं। घटना घर के बाहर हुई थी और आसपास के लोग तत्काल दौड़ पड़े थे। वह जब पहुंचे तो बहन की आंतें अपने हाथों से संभालते हुए उसको लेकर अस्पताल गए।
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स्थानीय डाक्टरों ने जवाब दे दिया। तत्काल ही बरेली लेकर गए। गर्भ में पल रहा मासूम मृत हो चुका था। बहन का बरेली में कुछ दिनों तक इलाज चला फिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लेकर गए। वहां पर आठ महीने तक जिंदगी के लिए बहन जूझी। अपने पास तो इतने रुपये भी न थे कि सरकारी अस्पताल में भर्ती बहन के लिए सिर्फ दवाई का इंतजाम कर पाएं। डाक्टर पर्चे हर रोज थमा देते थे। पहले अपनी जेब के रुपये खर्च किए, फिर रिश्तेदारों और दोस्तों की मदद ली। इसके बाद इलाज के लिए कुछ लोगों से चंदा करना पड़ा था। वे मुसीबत के दिन कभी भुलाए नहीं भूलते। जब पन्नालाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने का फैसला अदालत ने सुनाया तो लगा कि उस मासूम के साथ न्याय हो गया जो इस दुनिया में आना चाहता था।
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अनीता के सगे भाई रवि का कहना था कि अब तो वह यही कहना चाहते हैं कि सरकार से आर्थिक मदद मिले ताकि बहन अपनी पांच बेटियों के पालन पोषण और पढ़ाई में आर्थिक रूप से कमजोर न साबित हो। फिलहाल तो बहन मोहल्ले में दुकान चलाती है। आप खुद समझ सकते हैं कि उससे गुजारे लायक आमदनी भी मुश्किल है।
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