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Budaun News: एनआरसी में दस बेड, घरों पर पोषित हो रहे अतिकुपोषित बच्चे

Sun, 29 Sep 2024 11:35 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 11:35 PM IST
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Ten beds in NRC, severely malnourished children are being nourished at home
जिला अस्पताल का एनआरसी वार्ड। संवाद
बदायूं। जिले में 2900 से अधिक अतिकुपोषित बच्चे हैं। इन सभी बच्चों को नियमित उपचार की जरूरत है, लेकिन जिला अस्पताल में बने एनआरसी (पुनर्वास केंद्र) में ऐसे बच्चों के लिए केवल 10 बेड हैं, जो अधिकांश फुल रहते हैं। ऐसे में अधिकतर बच्चे घरों पर ही कुपोषण को दूर कर रहे हैं।
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बाल विकास सेवा व पुष्टाहार विभाग में छह साल तक के बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विभाग की योजना के अनुरूप पुष्टाहार वितरित करती हैं। पंजीकृत बच्चों में से जिले में करीब 29 सौ बच्चे अतिकुपोषण का शिकार हैं। शासन के निर्देश पर इन अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने का प्रयास किया जा रहा है। इन सभी बच्चों को इलाज की जरूरत है। ऐसे में इन बच्चों को एनआरसी में भर्ती किया जाना आवश्यक है।
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जिले में केवल 10 बेड का एनआरसी होने की वजह से वह ऐसा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जो बच्चे अति गंभीर कुपोषित हैं, जो किसी कारणवश एनआरसी पर भर्ती नहीं हो सके हैं उन परिवार के लोगों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संपर्क बनाकर बच्चों को समय-समय पर हाई प्रोटीन खिलाने और स्वच्छता पर विशेष बल देने के लिए परिवार के सदस्यों को प्रेरित करती रहती हैं।
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सामुदायिक प्रबंधन इस प्रकार करता है काम
अगर कोई बच्चा अतिकुपोषित है तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उस बच्चे को टीकाकरण दिवस पर एएनएम को दिखाती हैं। अगर एएनएम को लगता है कि वह बच्चा खान-पान के सुधार, स्वच्छता और कुछ जरूरी दवाओं से ठीक हो सकता है तो वह आंगनबाड़ी को इसकी जानकारी दे देती हैं।

संस्थागत प्रबंधन इस प्रकार करता है काम
आंगनबाड़ी द्वारा लगाए गए अतिकुपोषित बच्चा को देखकर एएनएम को लगता है कि वह ऐसे ठीक नहीं हो सकता तो एएनएम के माध्यम से उस बच्चे को डॉक्टर को दिखाया जाता है। वहां पर उस बच्चे को एनआरसी में भर्ती कराया जाता है, लेकिन एनआरसी में बेड की संख्या बेहद कम होने की वजह से डॉक्टर अपने स्तर से दवाएं दे देते हैं। ताकि बच्चा स्वस्थ हो सके।


कोशिश है कि सभी बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया जाए, इसके लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। जहां पर बच्चों के इलाज की जरूरत होती है तो स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उनका इलाज कराया जाता है। -प्रमोद कुमार, डीपीओ
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