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शिक्षकों ने अपने लिए भी ड्रेस कोड बनाया
अमर उजाला ब्यूरो/ रुदायन।
Updated Sat, 22 Apr 2017 10:57 PM IST
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ड्रेस कोड
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षकों ने अपने लिए भी ड्रेस कोड बनाया
प्राथमिक विद्यालय रुदायन के बच्चों में यूनिफार्म का आकर्षण बढ़ाने की कोशिश
विकास क्षेत्र इस्लामनगर के प्राथमिक विद्यालय रुदायन के शिक्षकों ने बच्चों में यूनिफार्म के प्रति आकर्षण बढ़ाने के लिए स्वयं के लिए भी ड्रेस कोड निर्धारित कर रखा है। सभी शिक्षक गहरे नीले रंग की पेंट और स्काई ब्ल्यू शर्ट पहनकर विद्यालय आते हैं, जिससे बच्चों के साथ ही नगरवासियों में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के प्रति नजरिया बदला है। जो लोग सरकारी विद्यालय के प्रति हीनभावना रखते थे, वे भी अब सरकारी स्कूल की ओर रुख कर रहे हैं। सुबह साढ़े सात बजे विद्यालय में पहली घंटी लगती है उसके बाद दूसरी फिर पीटी होती है, प्रार्थना होती है बच्चों को कहानी सुनाई जाती है और फिर आठ बजे से क्लास शुरू होती है। समस्या थी तो यह कि बच्चे यूनिफार्म नहीं पहनकर आना चाहते थे इस समस्या का समाधान अध्यापकों ने स्वयं के लिए यूनिफार्म निर्धारित करके कर लिया। अब अधिक संख्या में बच्चे यूनिफार्म पहनकर आने लगे हैं। इस संबंध में विद्यालय के शिक्षक तेजेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक का वास्तविक आइना बच्चे ही होते हैं। बच्चे अपने शिक्षक से शिक्षा के साथ साथ अनुशासित जीवन जीने की कला सीखते हैं उसके कार्य व्यवहार को अपने जीवन में उकेरते हैं। शिक्षक ललित मोहन ने कहा कि बच्चों और शिक्षकों में बेहतर संवाद के लिए एकरूपता नितांत अनिवार्य है। शिक्षक हरि सिंह और देवेन्द्र कुमार का भी यही कहना है कि बच्चों में भेदभाव मिटाने के लिए निर्धारित यूनिफार्म होना ही चाहिए।
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प्राथमिक विद्यालय रुदायन के बच्चों में यूनिफार्म का आकर्षण बढ़ाने की कोशिश
विकास क्षेत्र इस्लामनगर के प्राथमिक विद्यालय रुदायन के शिक्षकों ने बच्चों में यूनिफार्म के प्रति आकर्षण बढ़ाने के लिए स्वयं के लिए भी ड्रेस कोड निर्धारित कर रखा है। सभी शिक्षक गहरे नीले रंग की पेंट और स्काई ब्ल्यू शर्ट पहनकर विद्यालय आते हैं, जिससे बच्चों के साथ ही नगरवासियों में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के प्रति नजरिया बदला है। जो लोग सरकारी विद्यालय के प्रति हीनभावना रखते थे, वे भी अब सरकारी स्कूल की ओर रुख कर रहे हैं। सुबह साढ़े सात बजे विद्यालय में पहली घंटी लगती है उसके बाद दूसरी फिर पीटी होती है, प्रार्थना होती है बच्चों को कहानी सुनाई जाती है और फिर आठ बजे से क्लास शुरू होती है। समस्या थी तो यह कि बच्चे यूनिफार्म नहीं पहनकर आना चाहते थे इस समस्या का समाधान अध्यापकों ने स्वयं के लिए यूनिफार्म निर्धारित करके कर लिया। अब अधिक संख्या में बच्चे यूनिफार्म पहनकर आने लगे हैं। इस संबंध में विद्यालय के शिक्षक तेजेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक का वास्तविक आइना बच्चे ही होते हैं। बच्चे अपने शिक्षक से शिक्षा के साथ साथ अनुशासित जीवन जीने की कला सीखते हैं उसके कार्य व्यवहार को अपने जीवन में उकेरते हैं। शिक्षक ललित मोहन ने कहा कि बच्चों और शिक्षकों में बेहतर संवाद के लिए एकरूपता नितांत अनिवार्य है। शिक्षक हरि सिंह और देवेन्द्र कुमार का भी यही कहना है कि बच्चों में भेदभाव मिटाने के लिए निर्धारित यूनिफार्म होना ही चाहिए।