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Budaun News: आवास का लाभ पाने के लिए भटक रहे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त नेत्रहीन सुरेंद्र

Fri, 17 Apr 2026 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:33 AM IST
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Surendra, a visually impaired National Award recipient, wanders in pursuit of housing benefits.
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुरेंद्र कुमार। - फोटो : 1
अलापुर/जगत। जिले के ब्लॉक मुख्यालय जगत निवासी नेत्रहीन सुरेन्द्र कुमार ने 18 साल पहले चरखे पर महीन सूत कातने में राष्ट्रीय पुरस्कार पाकर जिला और प्रदेश का नाम रोशन किया था। वह पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास के लिए आवेदन करते आ रहे हैं, जो उन्हें अब तक नहीं मिल सका है। वह आवास पाने के लिए पूर्व विधायक शेखूपुर धर्मेंद्र शाक्य से भी सिफारिश लगवा चुके हैं।
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गरीबी में तंग जीवन जी रहे नेत्रहीन सुरेंद्र कुमार पिछले कई वर्षों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास के लिए आवेदन कर चुके हैं। उनका आवास भी बहुत पुराना और जर्जर है। सुरेंद्र के मुताबिक, उनके प्रार्थना पत्र पर अधिकारियों ने बिना सर्वे ही उनका नाम आवास योजना से निकलवा दिया, जबकि वह ब्लॉक मुख्यालय गांव जगत में ही रहते हैं। कुछ मिनटों में ही उनके यहां का सर्वे होकर रिपोर्ट लग सकती है।
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तीन बार उन्होंने आवास के लिए आवेन किया। नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने ब्लॉक मुख्यालय के कई चक्कर लगाए, लेकिन न तो उन्हें कोई आश्वासन मिला और न ही आवास। हारकर उन्होंने शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक धर्मेंद्र शाक्य से गुहार लगाई। उन्होंने सिफारिश के लिए बीडीओ जगत को पत्र भी जारी किया, बावजूद इसके सब सिस्टम की भेंट चढ़ गया।
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18 साल पहले मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार
तत्कालीन केंद्रीय खादी ग्रामोद्योग मंत्री महावीर प्रसाद की सिफारिश पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें 18 साल पहले राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था। वह जन्म से ही नेत्रहीन हैं। उन्होंने अपनी मां सोनकली और पड़ोसियों के सहयोग से ''कातिन'' का काम सीख लिया। बदायूं की जनसेवा आश्रम समिति के माध्यम से चरखे पर सूत कताई का काम शुरू किया। गांव की महिलाओं और बच्चों को सूत कातने का प्रशिक्षण भी देते रहे। संस्था के प्रबंधक विष्णु स्वरूप वर्मा उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराते थे और बना हुआ सूत ले लेते थे। 30 अगस्त 2007 को दिल्ली में उन्हें पुरस्कृत किया गया। 25 हजार रुपये नकद व एक मैडल और प्रशस्ति-पत्र दिया गया था।

मामला संज्ञान में आया है, इसे ब्लॉक स्तर पर दिखवाया जाएगा और दिव्यांग को लाभ दिलाया जाएगा।- अखिलेश चौबे, पीडी डीआरडीए
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