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Budaun News: जिले के ऐतिहासिक स्थल को जानेंगे छात्र-छात्राएं

Wed, 22 May 2024 06:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 May 2024 06:24 AM IST
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Students will know about the historical places
जबाहरपुरी ​स्थित इखलास खां का रोजा। फाइल फोटो
बदायूं। माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा और रीति-रिवाजों के साथ जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों से भी वाकिफ कराया जाएगा। विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्तर पर प्रशिक्षण शिविर भी लगाए जाएंगे। इस शिविर के माध्यम से विद्यार्थी संगीत के लिए विख्यात सहसवान घराने के बारे में जानेंगे। इस दौरान सहसवान से जुड़े राजा सहस्त्रबाहु के पौराणिक महत्व को भी समझेंगे।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारी चाहते हैं कि प्रत्येक जिले के विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान अपने जिले की सामाजिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के साथ जिले की खासियत को समझें। उसका महत्व उन्हें पता चले। अतीत उनके व्यक्तित्व को भी निखारेगा।
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विद्यार्थियों के लिए लगेगा प्रशिक्षण शिविर
माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध जिले में 304 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को विशेष शिविर लगाकर प्रशिक्षण प्रदान करने की कार्य योजना तैयार की गई है। सबसे पहले विभाग की ओर से 39 राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसमें विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा के विषय में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा उनको जिले के ऐतिहासिक स्थलों के विषय में भी बताया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को समूहों में आसपास के ग्रामीण व पर्यटन स्थलों पर ले जाया जाएगा। उनको ऐतिहासिक, भौगोलिक, रीति- रिवाज, परंपराओं, हस्त शिल्प के विषय में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक से होने वाले नुकसान के विषय में भी जानकारी दी जाएगी।
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राजा सहस्त्रबाहु कभी सहसवान में करते थे राज, संगीत के घराने ने भी शान बढ़ाई
त्रेता युग में हुए राजा सहस्त्रबाहु की राजधानी रहे सहसवान में उनके किले के अवशेष और टीले आज भी हैं। संगीत में रामपुर- सहसवान घराने का नाम बड़ी शान से लिया जाता है। रामपुर-सहसवान घराने के संगीतकारों को प्रतिष्ठित पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण पुरस्कार मिल चुके हैं।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी संगीत घराने के उस्ताद राशिद खां को 2022 में पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा था। घराने की नींव करीब दो सौ साल पहले उस्ताद इनायत हुसैन खां ने रखी थी। वह रामपुर नवाब के यहां संगीतकार थे, लेकिन अपने ही शानदार अतीत से जिले के ही विद्यार्थी वाकिफ नहीं हैं। ऐसी खासियतें अन्य जिलों की भी हैं।

डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि छात्र-छात्राओं के लिए पढ़ाई के साथ-साथ जिले की जानकारी होना भी जरूरी है। इसके लिए जिले के ऐतिहासिक व पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों का विकास होगा। संवाद
जिले में यह भी हैं ऐतिहासिक व पर्यटन स्थल
-कादरचौक में ककोड़ा देवी मंदिर
- बिनावर में पैराणिक स्थल राजा बेन
- उसहैत में बाबा कालसेन का मंदिर
- कछला गंगा घाट
- शक्ति पीठ नगला देवी मंदिर
- बड़ी ज्यारत
- छोटी ज्यारत
- इखलास खां का रोजा
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