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यहां तो पुरानी किताबों से चल रहा है काम,कई स्कूल ऐसे जहां नहीं हैं शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
Updated Fri, 21 Jul 2017 10:05 PM IST
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शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अभी तक सरकार की ओर से नि:शुल्क दी जाने वाली पाठ्यपुस्तकें पूरी नहीं मिल सकी हैं। इसके अलावा कई स्कूल ऐसे हैं जहां पर शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित चल रहा है। जिले में प्राथमिक के 1802 और जूनियर के 656 यानी कुल 2458 विद्यालय हैं, जिनमें तीन लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 7384 शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं जिले में 3530 शिक्षकों की कमी है।
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स्कूलों में बच्चों के ठहराव के लिए एमडीएम के अलावा हर साल यू्निफार्म के दो सैट दिए जाते हैं। पिछली सरकार ने मिड-डे मील में दूध और फल वितरण की भी योजना शुरू की थी। बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें भी दी जातीं हैं। अब उन्हें बैग, जूते-मौजे आदि भी दिए जाने की मौजूदा प्रदेश सरकार ने घोषणा की है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि इतनी योजनाएं चलाने के बाद भी बेसिक शिक्षा में वह सुधार नहीं हो पा रहा है, जो होना चाहिए। अब बात करते हैं शैक्षिक सत्र 2017-18 की। उसे चालू हुए चौथा महीना चल रहा है। बता दें कि बीते दो साल से शैक्षिक सत्र अप्रैल से शुरू होता है। सत्र को शुरू हुए चार महीने होने को हैं, लेकिन अब तक नामांकित तीन लाख 17 हजार 141 बच्चों को पूरी तरह नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकीं हैं। कुछ पुस्तकें हीं दीं गईं हैं। शासन के निर्देश थे कि जुलाई के प्रथम सप्ताह में हर बच्चे को यूनिफार्म उपलब्ध करा दी जाए लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के बहुत से स्कूल ऐसे हैं जिनके खाते में इस मद में धनराशि ही नहीं पहुंची है। चंद स्कूल होंगे जिनके बच्चों को यूनिफार्म मिल सकी है।
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