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चम्मच से स्विस कॉटेज तक होगा चुनाव खर्च में शामिल
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 09 Jan 2017 11:49 PM IST
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चुनाव आयोग ने खर्चे के लिए जारी की रेट लिस्ट
विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को वोटरों के साथ-साथ चुनाव खर्च की चिंता भी करनी होगी। निर्वाचन आयोग ने चुनाव खर्च की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 28 लाख कर दी है लेकिन इसमें चुनाव प्रचार के दौरान आयोजनों में इस्तेमाल की जाने वाली छोटी से छोटी वस्तुओं का खर्च भी शामिल किया जाएगा। मसलन, प्रत्याशियों की ओर से होने वाले चुनाव प्रचार संबंधी कार्यक्रमों में स्विस कॉटेज के किराए की धनराशि के साथ ही खाने में प्रयोग होने वाले चम्मत तक का खर्च जोड़कर हिसाब देना होगा। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने लिस्ट जारी कर दी है। इसमें हर वस्तु पर होने वाला खर्च भी शामिल है। उसी दर से हर प्रत्याशी के चुनावी खर्चे का ब्योरा बनेगा।
चुनाव आयोग ने साइकिल से लेकर टेंपो, टैक्सी, कार, ट्रक बस समेत डीजल और पेट्रोल के खर्च तक की राशि तय कर दी है। वहीं, लाउडस्पीकर, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, गेट निर्माण, कट आउट आदि समस्त चुनाव प्रचार सामिग्री के रेट तय कर दिए हैं। यही नहीं, होटल और गेस्ट हाउस की दरें भी निर्धारित कर दीं। वहीं, टेंट की दरें तय कर दी हैं। चुनाव आयोग के खर्च में आने वाली धनराशि सबसे कम और सर्वाधिक है। इसमें जहां चम्मच और गिलास का किराया 50 पैसे से लेकर स्विस कॉटेज का किराया 33 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। प्रचार की दर भी तय कर रखी है। साथ ही चुनाव में कार्य करने वाले मजदूरों को श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से तय किए गए मूल्यों की ओर से मजदूरी देनी होगी। चुनाव में अनापशनाप खर्चे पर लगाम लगाने और खर्चे का ब्योरा देने में किसी तरह का हेरफेर न हो सके, इसके लिए आयोग ने रेट लिस्ट जारी की है। सारे प्रत्याशियों के खर्चों पर चुनाव आयोग ने कड़ी नजर रखने के निर्देश भी जिला प्रशासन को दिए हैं।
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सभी राजनीतिक दलों और निगरानी टीमों को रेट लिस्ट की जानकारी दी जा चुकी है। चुनाव आयोग के निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाएगा।
-हवलदार यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व
विधानसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को वोटरों के साथ-साथ चुनाव खर्च की चिंता भी करनी होगी। निर्वाचन आयोग ने चुनाव खर्च की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 28 लाख कर दी है लेकिन इसमें चुनाव प्रचार के दौरान आयोजनों में इस्तेमाल की जाने वाली छोटी से छोटी वस्तुओं का खर्च भी शामिल किया जाएगा। मसलन, प्रत्याशियों की ओर से होने वाले चुनाव प्रचार संबंधी कार्यक्रमों में स्विस कॉटेज के किराए की धनराशि के साथ ही खाने में प्रयोग होने वाले चम्मत तक का खर्च जोड़कर हिसाब देना होगा। इसके लिए निर्वाचन आयोग ने लिस्ट जारी कर दी है। इसमें हर वस्तु पर होने वाला खर्च भी शामिल है। उसी दर से हर प्रत्याशी के चुनावी खर्चे का ब्योरा बनेगा।
चुनाव आयोग ने साइकिल से लेकर टेंपो, टैक्सी, कार, ट्रक बस समेत डीजल और पेट्रोल के खर्च तक की राशि तय कर दी है। वहीं, लाउडस्पीकर, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, गेट निर्माण, कट आउट आदि समस्त चुनाव प्रचार सामिग्री के रेट तय कर दिए हैं। यही नहीं, होटल और गेस्ट हाउस की दरें भी निर्धारित कर दीं। वहीं, टेंट की दरें तय कर दी हैं। चुनाव आयोग के खर्च में आने वाली धनराशि सबसे कम और सर्वाधिक है। इसमें जहां चम्मच और गिलास का किराया 50 पैसे से लेकर स्विस कॉटेज का किराया 33 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। प्रचार की दर भी तय कर रखी है। साथ ही चुनाव में कार्य करने वाले मजदूरों को श्रम प्रवर्तन अधिकारी की ओर से तय किए गए मूल्यों की ओर से मजदूरी देनी होगी। चुनाव में अनापशनाप खर्चे पर लगाम लगाने और खर्चे का ब्योरा देने में किसी तरह का हेरफेर न हो सके, इसके लिए आयोग ने रेट लिस्ट जारी की है। सारे प्रत्याशियों के खर्चों पर चुनाव आयोग ने कड़ी नजर रखने के निर्देश भी जिला प्रशासन को दिए हैं।
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सभी राजनीतिक दलों और निगरानी टीमों को रेट लिस्ट की जानकारी दी जा चुकी है। चुनाव आयोग के निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाएगा।
-हवलदार यादव, एडीएम वित्त एवं राजस्व