बिल्सी। मोहल्ला आठ स्थित प्राचीन पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को पर्यूषण पर्व के समापन पर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसका शुभारंभ भगवान जिनेंद्र का मंगल जलाभिषेक के साथ किया गया। इसके बाद विधि विधान से सभी 24 तीर्थंकरों के अर्घ्य समर्पित किए गए।
श्री दिगंबर जैन महा समिति के मंडल अध्यक्ष पीके जैन ने बताया कि शरीर से दुर्बल व्यक्ति सुखी रह सकता है, लेकिन स्वभाव से दुर्बल व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। बाहर से व्यक्ति अच्छा दिखे तो यह जरूरी नहीं कि वह अंदर से भी अच्छा हो, ध्येय तो सभी का अच्छा बनने का ही होता है लेकिन वह अपने अंदर के दोष, दुर्बलता, दुर्गुण तथा दुष्ट प्रवृत्तियों को छोड़ नहीं पाते। उन्होंने कहा जब तक चेतना को विकृत करने वाले तत्वों की समझ आपके अंदर नहीं आएगी तब तक आप अपने अंदर के दोष, काम, क्रोध, मान, माया, लोभ से नहीं बच सकते। उन्होंने स्वभावगत दुर्बलता की चर्चा करते हुए कहा कि कुछ लोग इतने अधीर होते हैं कि वह बात-बात पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। कोई बात कर रहा है उनके बीच में जाकर बोलना, टोंकना, यह भावगत कमजोरी कहलाती है। अपशब्द बोलना, झूठ बोलना, व्यसन यह स्वभाव गत कमजोरियां होती हैं। इन कमजोरियों को दूर किए बिना आप अपने आपको अच्छा आदमी नहीं कह सकते। जो लोग हिंसा-पाप में लिप्त हैं वह दुष्प्रवृत्ति के लोग होते हैं। इस मौके पर जैन समाज के अधिकांश लोग मौजूद रहे।