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Budaun News: गंगा एक्सप्रेस-वे में जमीन जाने से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अटका

Tue, 06 Aug 2024 11:00 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 11:00 PM IST
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Solid waste management plant stuck due to loss of land in Ganga Expressway
उतरना गांव में बना सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का अधूरा प्लांट। संवाद
बदायूं। कूड़ा निस्तारण के लिए बनाया जाने वाला सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट बीस साल में नहीं लग सका। प्लांट के लिए प्रस्तावित जमीन का एक हिस्सा अब गंगा एक्सप्रेस-वे में चला गया है। ऐसे में प्रक्रिया फिर अटक गई है। इस कारण जल निगम की कंट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस (सीएनडीएस) की कार्ययोजना रद्द कर दी गई है, जो दोबारा नए सिरे से बनाई जाएगी। इस माह के अंत तक लखनऊ से टीम आकर दोबारा जगह की जांच कर कार्य योजना बनाएगी।
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शहरवासियाें को कूड़े से निजात दिलाने के लिए पूर्व में उतरना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए जमीन देखी गई थी, लेकिन वहां पर प्लांट बनकर तैयार नहीं हो सका था। ऐसे में शहर से प्रतिदिन निकालने वाला करीब 85 टन कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में डाला जाने लगा। कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने के कारण डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
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बढ़ते कूड़े के ढेरों की समस्या के चलते शासन ने दोबारा से उतरना में पूर्व की चयनित जगह पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने की मंजूरी दे दी। शासन से जल निगम की कंट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विस (सीएनडीएस) का चयन कार्यदायी संस्था के रूप में किया गया। लोगों उम्मीद जागी थी कि अब कूड़े के ढेरों से लोगों को राहत मिल जाएगी, लेकिन जमीन का एक हिस्सा गंगा एक्सप्रेस-वे में जाने से इसमें फिर अड़ंगा लग गया है।
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20 साल में प्लांट नहीं बन पाने की यह रही वजह
नगर पालिका प्रशासन ने प्लांट का प्रस्ताव करीब 2001-02 में भेजा था। करीब दो साल बाद मंजूरी मिल गई थी। प्लांट निर्माण के लिए 12 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बाद काफी समय जमीन चयनित करने में बीत गया। दातागंज रोड से करीब तीन-चार किलोमीटर दूर उतरना गांव में जमीन ली गई। कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन इन डिजाइनिंग सर्विसिंग (सीएनडीसी) को प्लांट के निर्माण का जिम्मा दिया गया। प्लांट का कुछ काम अकार्डो हाइड्रो एअर कंपनी को सौंपा गया। कंपनी ने बैंक गारंटी के रूप में लखनऊ की एक बैंक से जो गारंटी लगवाई, उसमें कंपनी के खाते में कोई पैसा न होने का खुलासा हुआ। खुलासा होने पर सीएनडीसी ने इस कंपनी पर घपलेबाजी का मुकदमा बरेली के एक थाने में दर्ज करा दिया। तब से काम रुका हुआ था।

करीब साढ़े पांच करोड़ के उपकरण बने कबाड़
12 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में पांच करोड़ 42 लाख रुपये खर्च कर मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं। विवाद की वजह से किसी ने इस मशीनों को लगाने के बाद में दोबारा नहीं देखा। इसकी वजह से यह मशीनें कबाड़ बन गईं। साथ ही कुछ उपकरण तो लोग निकालकर ले जा भी चुके हैं।


सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के लिए कार्ययोजना को दोबारा से तैयार किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ से टीम आकर मौके पर सर्वे करेगी। इसके बाद में एक्शन प्लान तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। - मोहम्मद साऊद अंसारी, आरई, सीएनडीएस
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