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Budaun News: बिना कोल्ड चेन का ध्यान रखे मेडिकल स्टोर पर बिक रहे सीरम और वैक्सीन
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बदायूं। जिले में कुत्ता और बंदर के काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर एंटी रेबीज वैक्सीन का संकट गहरा गया है। वहीं, दूसरी ओर निजी मेडिकल स्टोर पर एआरवी और रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (सीरम) आसानी से उपलब्ध हैं। मजबूरी में मरीज 900 से 1000 रुपये खर्च कर वैक्सीन और सीरम खरीद रहे हैं। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
बुधवार को पड़ताल में सामने आया कि शहर के कई मेडिकल स्टोर पर एआरवी और सीरम खुलेआम बेचा जा रहा है। खराब बात यह है कि इसमें कोल्ड चेन का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसकी वजह से इंजेक्शन लगने के बाद भी रेबीज फैलने की आशंका रहती है।
हालात यह हैं कि जिला अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 400 रुपये और सीरम 600 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं महिला अस्पताल के पास एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 360 रुपये और सीरम 580 रुपये में देने की बात कही गई।
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सुभाष चौक स्थित एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 350 रुपये और सीरम 550 रुपये, जबकि रजी चौक क्षेत्र के एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 370 रुपये और सीरम 580 रुपये में उपलब्ध होने की बात कही गई। जांच में यह भी सामने आया कि कई निजी मेडिकल स्टोर पर एआरवी के लिए निर्धारित कोल्ड चेन की व्यवस्था मौजूद नहीं थी। एआरवी की वायल सामान्य फ्रिज में रखीं मिलीं।
सीरम एंटीबॉडी है, तुरंत करता है काम
अगर किसी को कुत्ते या बंदर ने काट लिया है और उसका घाव गहरा है या कंधे के ऊपर है, तो वैक्सीन के साथ सीरम लगवाना ज्यादा सुरक्षित होता है। वैक्सीन एक एंटीजेन होती है, जब यह शरीर में जारी है तो रेबीज वायरस से लड़ने के लिए पहले एंटीबॉडी बनाती है। इसमें 3 से 4 दिन लग जाते हैं, जबकि सीरम एंटीबॉडी होता है। यह शरीर में जाते ही रेबीज के वायरस को खत्म करना शुरू कर देता है।
विषाणु जनित रोग है रेबीज
रेबीज एक विषाणु जनित रोग है। यह कुत्ते, बिल्ली, बंदर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से स्वस्थ व्यक्ति या पशु के शरीर में प्रवेश कर जाता है। नाड़ियों से मस्तिष्क में पहुंचकर उसमें बीमारी के लक्षण पैदा करते हैं।
ऐसे करें प्राथमिक उपचार
- कुत्ते के काटने से हुए घाव को 15 मिनट तक साफ पानी से धोएं।
- रेबीज का वायरस लार छोड़ता है, धोने से 80 प्रतिशत तक रेबीज से बचाव हो जाता है।
- घाव पर कोई पट्टी या कपड़ा न बांधें, घाव को खुला छोड़ दें।
- तुरंत डॉक्टर के पास पीड़ित को ले जाना चाहिए।
- 24 घंटे के अंडर एंटी रेबीज की पहली डोज लगवाएं। इसके बाद फिर तीसरे, 7वें, 14वें और 28वें दिन इसे लगवाना होता है।
- झाड़-फूंक और घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें
मेडिकल स्टोर पर अगर एआरवी व सीरम मौजूद हैं तो उसे खराब होने से बचाने के लिए कोल्ड चेन में रखना जरूरी होता है। अगर दुकानदार ऐसा नहीं करते हैं, तो यह पूरी तरह से काम नहीं करेगा। वहीं, एआरवी की कमी पिछले दिनों सीएचसी पर हुई थी। उसके बाद शासन ने कुछ एआरवी उपलब्ध करा दी थी। डिमांड लगातार भेजी जा रही है। अभी रामपुर से भभी कुछ एआरवी मिली है। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
डीप फ्रिज (डीप फ्रीजर) में सीरम या अन्य वैक्सीन को रखना चाहिए। अगर कहीं पर मानकों की अनदेखी हो रही है तो जांच कराकर संबंधित मेडिकल स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -लवकुश, औषधि निरीक्षक
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बुधवार को पड़ताल में सामने आया कि शहर के कई मेडिकल स्टोर पर एआरवी और सीरम खुलेआम बेचा जा रहा है। खराब बात यह है कि इसमें कोल्ड चेन का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसकी वजह से इंजेक्शन लगने के बाद भी रेबीज फैलने की आशंका रहती है।
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हालात यह हैं कि जिला अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 400 रुपये और सीरम 600 रुपये में बेचा जा रहा है। वहीं महिला अस्पताल के पास एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 360 रुपये और सीरम 580 रुपये में देने की बात कही गई।
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सुभाष चौक स्थित एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 350 रुपये और सीरम 550 रुपये, जबकि रजी चौक क्षेत्र के एक मेडिकल स्टोर पर एआरवी 370 रुपये और सीरम 580 रुपये में उपलब्ध होने की बात कही गई। जांच में यह भी सामने आया कि कई निजी मेडिकल स्टोर पर एआरवी के लिए निर्धारित कोल्ड चेन की व्यवस्था मौजूद नहीं थी। एआरवी की वायल सामान्य फ्रिज में रखीं मिलीं।
सीरम एंटीबॉडी है, तुरंत करता है काम
अगर किसी को कुत्ते या बंदर ने काट लिया है और उसका घाव गहरा है या कंधे के ऊपर है, तो वैक्सीन के साथ सीरम लगवाना ज्यादा सुरक्षित होता है। वैक्सीन एक एंटीजेन होती है, जब यह शरीर में जारी है तो रेबीज वायरस से लड़ने के लिए पहले एंटीबॉडी बनाती है। इसमें 3 से 4 दिन लग जाते हैं, जबकि सीरम एंटीबॉडी होता है। यह शरीर में जाते ही रेबीज के वायरस को खत्म करना शुरू कर देता है।
विषाणु जनित रोग है रेबीज
रेबीज एक विषाणु जनित रोग है। यह कुत्ते, बिल्ली, बंदर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से स्वस्थ व्यक्ति या पशु के शरीर में प्रवेश कर जाता है। नाड़ियों से मस्तिष्क में पहुंचकर उसमें बीमारी के लक्षण पैदा करते हैं।
ऐसे करें प्राथमिक उपचार
- कुत्ते के काटने से हुए घाव को 15 मिनट तक साफ पानी से धोएं।
- रेबीज का वायरस लार छोड़ता है, धोने से 80 प्रतिशत तक रेबीज से बचाव हो जाता है।
- घाव पर कोई पट्टी या कपड़ा न बांधें, घाव को खुला छोड़ दें।
- तुरंत डॉक्टर के पास पीड़ित को ले जाना चाहिए।
- 24 घंटे के अंडर एंटी रेबीज की पहली डोज लगवाएं। इसके बाद फिर तीसरे, 7वें, 14वें और 28वें दिन इसे लगवाना होता है।
- झाड़-फूंक और घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें
मेडिकल स्टोर पर अगर एआरवी व सीरम मौजूद हैं तो उसे खराब होने से बचाने के लिए कोल्ड चेन में रखना जरूरी होता है। अगर दुकानदार ऐसा नहीं करते हैं, तो यह पूरी तरह से काम नहीं करेगा। वहीं, एआरवी की कमी पिछले दिनों सीएचसी पर हुई थी। उसके बाद शासन ने कुछ एआरवी उपलब्ध करा दी थी। डिमांड लगातार भेजी जा रही है। अभी रामपुर से भभी कुछ एआरवी मिली है। -डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
डीप फ्रिज (डीप फ्रीजर) में सीरम या अन्य वैक्सीन को रखना चाहिए। अगर कहीं पर मानकों की अनदेखी हो रही है तो जांच कराकर संबंधित मेडिकल स्वामी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -लवकुश, औषधि निरीक्षक