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कम मूल्य पर गन्ना बेचने के लिए मजबूर किसान

Sat, 24 Oct 2015 11:37 PM IST
कादरचौक (बदायूं)
कादरचौक (बदायूं) Updated Sat, 24 Oct 2015 11:37 PM IST
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Sell sugarcane at low price Forcing farmers

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 अक्तूबर गुजरने में केवल एक सप्ताह समय बाकी है, लेकिन चीनी मिलों में पेराई शुरू न होने की वजह से गन्ना किसान कोल्हू पर अपना गन्ना आधी से कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। जरूरत के चलते किसान नगद दाम मिलने के चक्कर में गन्ने की उपज पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही बेच दे रहे हैं। किसानों को बाजिव मूल्य भी नहीं मिल रहा।  
जिले में 20733 हेक्टेयर रकबे में गन्ने की बुवाई की गई है। यह गन्ना जिले की दो चीनी मिलों सहित आस-पास जिलों की पांच चीनी मिलों में पेराई के लिए भेजा जाता है। चीनी मिलों में पेराई शुरू न होने की वजह से किसानों ने कोल्हुओं पर गन्ना बेचना शुरू कर दिया है। जिले में करीब 400 कोल्हू हैं, जबकि गन्ना विभाग के रिकार्ड के मुताबिक गत वर्ष केवल 147 कोल्हू ही जिले में थे। इसमें से करीब 100 कोल्हू पर गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है।
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बता दें कि गत वर्ष शासन की ओर से 280 रुपये गन्ना मूल्य घोषित किया गया था। यदि इस रेट पर गरीब और कमजोर किसानों का गन्ना खरीद लिया जाए तो किसानों को काफी राहत मिले। लेकिन चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य का भुगतान लेटलतीफ करने और किसानों की जरूरत के चलते फसल पहले बेचने से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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गन्ने से बनी राब का बड़ा केंद्र है कादरचौक
जिले में कादरचौक गन्ने से बनी राब का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां से गैर जनपदों के साथ अन्य प्रांतों में भी राब भेजी जाती है। कादरचौक ब्लाक में करीब 100 कोल्हू हैं। इसके साथ ही उझानी, सहसवान और उसहैत क्षेत्र में काफी कोल्हू संचालित होते हैं। इन क्षेत्रों में गन्ने की बिक्री जोरदार तरीके से होना शुरू हो गई है।  
मजबूरी में बेच रहे गन्ना: मुन्नालाल  
कादरचौक ब्लाक क्षेत्र के गांव लभारी के गन्ना किसान मुन्नालाल कहते हैं दिवाली, भैयादूज और ककोड़ा मेला जैसे त्योहार सिर पर हैं। ऐसे में रुपयों की जरूरत की वजह से मजबूरी में गन्ने की बिक्री करनी पड़ती है, क्योंकि हम लोगों की आय का एकमात्र स्रोत फसल ही होती है। -------
गन्ना मूल्य के भुगतान में होती देरी: धीरेंद्र  
कादरचौक के गन्ना किसान धीरेंद्र का कहना है कि चीनी मिलों को गन्ना देने के बाद उसका मूल्य मिलने में बहुत समय लगता है। मिल में गन्ना देने के बाद किसान को अपनी फसल के मोल के लिए मुंह ताकना पड़ता है, जबकि जरूरत पडने पर भुगतान नहीं हो पाता है।

जिला गन्ना अधिकारी दिलीप सैनी के अनुसार गन्ना किसानों को कोल्हू पर गन्ने को नहीं बेचना चाहिए। जिले की चीनी मिलों में पेराई नवंबर के दूसरे पखवाड़े में शुरू हो जाएगी, जिससे उनका गन्ना चीनी मिलें खरीदना शुरू कर देंगी। गन्ना रकबा का आवंटन 15 दिनों के अंदर आने की उम्मीद है।

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