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Budaun News: संभल में संभली, बदायूं में सूख रही सोत नदी की धार
Mon, 25 Sep 2023 01:08 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Updated Mon, 25 Sep 2023 01:08 AM IST
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शहर के लालपुल स्थित सोत नदी। संवाद
बदायूं। संभल के लोगों ने सोत नदी की धारा को पुनर्जीवित कर दिया, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में संभल के लोगों का पूरा श्रेय मिल गया। बदायूं में यह नदी अब भी बदहाली पर सिसक रही है। यहां इसकी धार लगातार सूख रही है। सिर्फ बारिश के दिनों में ही नदी में पानी दिखाई देता है। बाकी के दिनों में नदी के किनारे लोग खेती करने लगते हैं और इसके बहाव क्षेत्र में अवैध कब्जे कर लिए गए हैं। शहर के आसपास नदी में कूड़ा-कचरा भी फेंका जाता है।
यह नदी जिले में 105 किलोमीटर के हिस्से से होकर निकलती है। बिसौली, बिल्सी, सदर और दातागंज तहसील क्षेत से होती हुई नदी की धारा उसावां के नौलीफतुआबाद गांव पहुंचती है। इसके बाद मेें शाहजहांपुर की सीमा में प्रवेश कर जाती है। बिसौली के बझेड़ा गांव से जिले में प्रवेश करते ही नदी का स्वरूप नाले जैसा लगता है। कहीं-कहीं तो नदी का अस्तित्व ही खत्म सा लगता है।
ग्रामीणों के अनुसार खास बात यह है कि इस नदी के खुद के कई प्राकृतिक जलस्रोत हैं। इसकी वजह से इसमें हमेशा पानी हमेशा बहता रहता था, लेकिन धीरे-धीरे पॉलिथीन, कूड़ा-कचरा नदी में आने लगा। इसकी वजह से नदी के स्रोत बंद होने लगे। इसकी वजह उसका पानी कम होने लगा। इसके अलावा भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि भी नदी पर लगी रहती है। इसलिए कई जगह नदी के किनारों पर अवैध कब्जे होने लगे।
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यह नदी जिले में 105 किलोमीटर के हिस्से से होकर निकलती है। बिसौली, बिल्सी, सदर और दातागंज तहसील क्षेत से होती हुई नदी की धारा उसावां के नौलीफतुआबाद गांव पहुंचती है। इसके बाद मेें शाहजहांपुर की सीमा में प्रवेश कर जाती है। बिसौली के बझेड़ा गांव से जिले में प्रवेश करते ही नदी का स्वरूप नाले जैसा लगता है। कहीं-कहीं तो नदी का अस्तित्व ही खत्म सा लगता है।
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ग्रामीणों के अनुसार खास बात यह है कि इस नदी के खुद के कई प्राकृतिक जलस्रोत हैं। इसकी वजह से इसमें हमेशा पानी हमेशा बहता रहता था, लेकिन धीरे-धीरे पॉलिथीन, कूड़ा-कचरा नदी में आने लगा। इसकी वजह से नदी के स्रोत बंद होने लगे। इसकी वजह उसका पानी कम होने लगा। इसके अलावा भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि भी नदी पर लगी रहती है। इसलिए कई जगह नदी के किनारों पर अवैध कब्जे होने लगे।
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