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‘त्याग-बलिदान का प्रतीक है भगवाध्वज’
ब्यूरो/बदायूं
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:02 AM IST
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शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय प्राथमिक शिक्षा वर्ग(आईटीसी) के छठें दिन भगवाध्वज तथा आदर्श स्वयंसेवक विषय को सबके सम्मुख रखा गया।
बौद्धिक वर्ग में विहिप ब्रजप्रांत के सहमंत्री जगपाल सिंह ने कहा कि विश्व में भारत सबसे प्राचीन राष्ट्र है। परम पवित्र भगवा ध्वज त्याग, बलिदान, तपस्या का प्रतीक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इन्हीं गुणों के कारण भगवाध्वज हो अपना गुरु माना। यज्ञ के समान पवित्रता, त्याग, तपस्या, उद्योग और उत्सर्ग करने का भाव इस ध्वज से प्राप्त होता है। अत: अनादिकाल से यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। रामनिवास राजपूत ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार आदर्श स्वयं की प्रमिमूर्ति थे। आदर्श स्वयंसेवक को अनुशासित, विवेकशील, धैर्यवान और चरित्रवान होना चाहिए। इसके अलावा कठोर परिश्रमी और शुद्ध सात्विक के गुण भी हों। कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक भीषण प्राकृतिक एवं दैवीय आपदा में सहायता करने प्रथम पंक्ति में पहुंचते हैं। शारीरिक कार्यक्रमों ने समता, आसन, व्यायाम योग, सूर्य नमस्कार, पद विन्यास, दंड योग खेल आदि कराए गए। इस मौके पर जगजीवन राम, अंकुर पाराशरी, दिनेश शर्मा, निरंजन सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, नाथूराम वर्मा, रामपाल सिंह, रूम सिंह, वेद प्रकाश, राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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बौद्धिक वर्ग में विहिप ब्रजप्रांत के सहमंत्री जगपाल सिंह ने कहा कि विश्व में भारत सबसे प्राचीन राष्ट्र है। परम पवित्र भगवा ध्वज त्याग, बलिदान, तपस्या का प्रतीक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इन्हीं गुणों के कारण भगवाध्वज हो अपना गुरु माना। यज्ञ के समान पवित्रता, त्याग, तपस्या, उद्योग और उत्सर्ग करने का भाव इस ध्वज से प्राप्त होता है। अत: अनादिकाल से यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। रामनिवास राजपूत ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार आदर्श स्वयं की प्रमिमूर्ति थे। आदर्श स्वयंसेवक को अनुशासित, विवेकशील, धैर्यवान और चरित्रवान होना चाहिए। इसके अलावा कठोर परिश्रमी और शुद्ध सात्विक के गुण भी हों। कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक भीषण प्राकृतिक एवं दैवीय आपदा में सहायता करने प्रथम पंक्ति में पहुंचते हैं। शारीरिक कार्यक्रमों ने समता, आसन, व्यायाम योग, सूर्य नमस्कार, पद विन्यास, दंड योग खेल आदि कराए गए। इस मौके पर जगजीवन राम, अंकुर पाराशरी, दिनेश शर्मा, निरंजन सिंह, राम प्रकाश गुप्ता, नाथूराम वर्मा, रामपाल सिंह, रूम सिंह, वेद प्रकाश, राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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